‘रावे’ (RAWE) प्रोग्राम में दौरान किसानों के साथ काम करेगें बागवानी के छात्र

  • नौणी विश्वविद्यालय के 98 छात्र मशोबरा, चंबा, जाछ और कुल्लू के लिए रवाना

शिमला: किसानों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और उनकी समस्याओं के बारे में छात्रों को अवगत करने के उद्देश्य से डॉ॰ यसवंत सिंह परमार औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय के बीएससी औद्यानिकी के अंतिम वर्ष के 98 छात्र  पिछले दिनों 10 सप्ताह के रुरल अवेरनेस्स वर्क एक्सपिरियन्स (Rural Awareness Work Experience (RAWE) प्रोग्राम के लिए रवाना हुए।

इन छात्रों को चार समूहों में बांटा गया है। यह सभी हिमचाल के चार कृषि जलवायु क्षेत्रों में किसानों के साथ काम करेगें। मशोबरा, कुल्लू, जाछ और चंबा में नौणी विवि के क्षेत्रीय अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्र प्रत्येक समूह की मेजबानी करेगा। दो सप्ताह की अवधि के बाद, हर छात्र समूह दूसरे जलवायु क्षेत्र में काम करेंगे, जिससे 10 हफ्ते की निर्धारित अवधि में सभी क्षेत्रों को कवर किया जा सके। यह पहली बार है कि छात्रों को हिमाचल प्रदेश के चार कृषि-जलवायु क्षेत्रों में काम करने का मौका मिल रहा है। प्रत्येक क्षेत्र के अंतर्गत गांवों का चयनित किया गया है। चयनित गांव के साथ चार विद्यार्थियों को संलग्न किया गया है। इसका उद्देश्य संस्कृति को समझने के साथ-साथ ग्रामीण, सामाजिक सांस्कृतिक पतिस्थिति, ग्रामीण विकास, स्थलाकृतिक बदलाव, जलवायु परिवर्तन, पशुपालन, फल, सब्जियां और सहकारी काम के बारे में सीखना है। वैज्ञानिक और किसानों की बीच बातचीत भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मानदंडों के अनुसार रावे प्रोग्राम, डिग्री का अनिवार्य हिस्सा है और छात्रों को कार्यक्रम के दौरान एक वेतनमान भी दिया जाता है।  औद्यानिकी कॉलेज के डीन डा॰ नरेंद्र शर्मा ने इन सभी छात्रों के लिए अभिसंस्करण कार्यक्रम का आयोजन किया और उनसे रावे जैसे व्यावहारिक संपर्क कार्यक्रम का अधिक से अधिक फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के बारे में बताते हुए डा॰ शर्मा ने कहा कि रावे का उद्देश्य ग्रामीण स्थितियों, किसानों द्वारा अपनाई गई बागवानी तकनीकों को समझना, कृषि की समस्याओं को प्राथमिकता देना, कौशल विकसित करना और ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के लिए कृषि परिवारों के साथ काम करने का रवैया बनाना है।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम विभिन्न कृषि-जलवायु जलवायु क्षेत्रों में बागवानी और संबद्ध गतिविधियों के संबंध में ग्रामीण पतिस्थिति को समझने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम के समन्वयक डा॰ केके रैना ने कहा कि किसानों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों और बागवानी विकास के संदर्भ में उनकी समस्याओं के साथ छात्रों को परिचित करने के अलावा, रावे वास्तविक क्षेत्र स्थितियों से संबंधित नैदानिक और उपचारात्मक ज्ञान प्रदान करने में मदद करेंगा।

प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में विस्तार शिक्षण विधियों के उपयोग से, छात्रों में संचार कौशल का विकास और उन्हें विस्तारित और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से परिचित करवाना भी रावे प्रोग्राम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। हर दो सप्ताह के बाद छात्रों की रोटेशन कर, नए क्षेत्र में काम काम करने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम के अंत में प्रत्येक समूह को काम के बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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