ग्रामीण मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर, समाजिक मेलजोल को मिलता है बढ़ावा : धूमल

ग्रामीण मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर, समाजिक मेलजोल को मिलता है बढ़ावा : धूमल

  • पूर्व मुख्यमंत्री ने कंज्याण में ग्रामीण मेले का किया शुभारम्भ

अंकुश दत्त शर्मा /हमीरपुर : ग्रामीण मेले हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं जहां समाज के सभी लोग मिलजुल कर गाँव के साधारण परिवेश में अपनी खुशियाँ बाँटते हैं। समाजिक मेलजोल को इन्ह मेलों से बढ़ावा मिलता है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज भोरंज के कंज्याण गाँव में ग्रामीण मेले का शुभारम्भ करने के पश्चात यह बात कही।  प्रो. धूमल ने कहा कि गाँव के लोग वर्षों से मनाये जा रहे इन्ह मेलों के माध्यम से जहां एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं वहीँ रोजगार के अवसर भी इन्ह मेलों में मिलते हैं। समाज में जागरूकता फैलाने का काम भी मेलों के माध्यम से अच्छी तरह होता है चूँकि जब लोग आपस में मिलते हैं तो संवाद के माध्यम से जानकारी आपस में बांटते हैं। सूचना प्रद्योगिकी के इस नवीन युग में भी ग्रामीण मेलों का महत्व कम नहीं हुआ है क्योंकि गाँव के भोले और सादे जीवन में इन्ह पारम्परिक मेलों की छाप अमिट है।

इस अवसर पर स्थानीय विधायक कमलेश कुमारी, झंडूता के विधायक जे.आर. कटवाल, स्थानीय प्रधान कर्मी देवी, प्यारे लाल शर्मा, दलबीर ठाकुर, बीना शर्मा, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों आदि सहित स्थानीय गाँववासी मौजूद रहे।

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