कांग्रेस अधिकांश समय शिमला नगर निगम पर भी काबिज रही, लेकिन किया कुछ नहीं : परमार

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए विभाग को 100 दिनों का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश

  • मिशनरी भावना से कार्य करें चिकित्सक : विपिन सिंह परमार

शिमला : चिकित्सक का समाज में सम्मानपूर्वक स्थान है तथा वे समाज की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों विशेषकर सरकारी अस्पतालों में जरूरतमंद लोग तथा आम लोग ही आते हैं। ऐसे में चिकित्सकों का दायित्व बनता है कि वे उनका उपचार के साथ-साथ अच्छा व्यवहार भी करें। स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने आज यहां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कहा कि वे सौ दिन का लक्ष्य निर्धारित करें तथा उसे पूर्ण करने के लिए सभी मिल-जुलकर प्रयास करें। परमार आज यहां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाग ने जो सौ दिन का लक्ष्य निर्धारित किया है उसे आपसी समन्वय से ही पूरा किया जा सकता है। सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को समर्पण की भावना से लागू किया जाना चाहिए तथा सरकार की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के लिए भरसक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों से आम लोग लाभान्वित हो सकें।

परमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रदेश के लोगों के हित में परियोजनाएं तैयार करें, जिन्हें भारत सरकार को भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जा सके। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एक ऐसा पेशा है जो हमें मिशन के रूप में कार्य करने को प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि राज्य में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भावस्था व बच्चे के जन्म के उपरान्त माता व शिशु को एक वर्ष तक निःशुल्क दवाओं के अतिरिक्त निःशुल्क स्वास्थ्य जांच व परिवहन सुविधा इत्यादि प्रदान की जा रही है। इस पर प्रतिवर्ष 20 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत बीपीएल, अनुसूचित जाति तथा जनजाति परिवारों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव के लिए 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है जबकि घर पर प्रसव होने की स्थिति में बीपीएल परिवारों को 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस पर प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भी चलाया गया है, जिसके अंतर्गत अप्रैल से दिसम्बर, 2017 तक 50 हजार महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को सप्ताह में एक गोली आयरन व फोलिक एसिड की दी जा रही है। इस कार्यक्रम को निजी स्कूलों में भी आरम्भ किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत छः लाख विद्यार्थियों को लाने का लक्ष्य है। राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत निःशुल्क दवाएं उपलब्ध करवाने के लिए धनराशि प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत 330 दवाओं को निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में सोलन, मण्डी, धर्मशाला, कुल्लू तथा बिलासपुर के जिला अस्पतालों में डायलायसिस इकाईयां स्थापित की गई है यह सुविधा बीपीएल परिवारों को निःशुल्क प्रदान की जा रही है जबकि अन्य मरीजों से 1000 रुपये से 1500 रुपये में यह सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि शिमला, ऊना, नाहन, चम्बा हमीरपुर, पांवटा तथा पालमपुर स्थित अस्पतालों में यह सुविधा शीघ्र उपलब्ध करवा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कैंसर रोगियों को घर के नजदीक किमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए 10 कैंसर उपचार इकाईयां स्थापित की गई है।

परमार ने कहा कि राज्य में राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम कार्यान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य शहरी मिशन के अंतर्गत चार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को सुदृढ़ किया जा रहा है जिनमें नगर निगम शिमला, बालूगंज, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र टूटू तथा अनाडेल शामिल है। विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक पंकज रॉय ने इस अवसर पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विभाग सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा तथा सरकार के आदेशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा ताकि विभाग द्वारा आरम्भ किए गए कार्यक्रमों से प्रदेश के लोग लाभान्वित हो सके। इस अवसर पर प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. बलदेव ठाकुर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी व वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे।

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