पांचवीं कक्षा

पांचवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में पवन चौहान की कहानी को मिला स्थान

  • पांचवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में पवन चौहान की कहानी को मिला स्थान
  • अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है कविताएं और कहानियां
  • सुंदरनगर के महादेव के निवासी है पवन चौहान
  • सुंदरनगर: हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत पांचवी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक गुंजन -5
  • लीलाधर शर्मा

    लीलाधर शर्मा
    मण्डी ब्यूरो (हिमाचल प्रदेश)

 

 

 

 

 

 

सुंदरनगर: हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत पांचवी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक गुंजन -5 में सुंदरनगर के महादेव निवासी युवा कहानीकार, साहित्यकार एवं कवि पवन चौहान की कहानी अनोखी होली को स्थान मिला है। पांचवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में उनकी इस कहानी का चयन कहानी की शिक्षा के आधार पर किया गया है। जिसमें उन्होंने बच्चों की अनोखी होली का वर्णन करते हुए उन्हें बूढ़े बुजुर्गों का सम्मान करने का संदेश दिया है। कहानी के माध्यम से बच्चों में यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि हम तो हर त्योहार मना लेते हैं लेकिन उन बुजुर्गों का क्या जो वृद्धाश्रम में अकेले रहते हैं। ऐसे में बच्चे होली का त्योहार वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ मनाते हैं उन्हें खुशियां प्रदान करते हैं। पवन चौहान की इस कहानी को पाचंवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में स्थान मिलने पर उन्होंने भी खुशी जाहिर की है।

दैनिक भास्कर में लेख से की लेखन की शुरूआत

पवन चौहान

 पवन चौहान

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हिप्र स्कूल शिक्षा बोर्ड के अंतर्गत पांचवी कक्षा की हिंदी की पाठ्यपुस्तक गुंजन -5
में सुंदरनगर के महादेव निवासी युवा पवन चौहान की कहानी अनोखी होली को मिला स्थान

पवन चौहान पेशे से स्कूल अध्यापक हैं और उन्होंने वर्ष 2002 में उस समय से लिखना शुरू किया जब उनका पहला लेख दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद उन्होंने तीन वर्ष तक लिखा और फिर छ: वर्ष तक स्वास्थ्य खराब होने के कारण नहीं लिख पाए। लेकिन उसके बाद उन्होंने फिर से सक्रीय होकर एक से बढक़र एक रचनाएं लिखी जो देश की विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई।

पवन चौहान की कहानियां विपाशा, वर्तमान साहित्य, शीराजा, साहित्य अमृत, अक्षर पर्व, हरिगंधा, जागरण सखी, मेरी सजनी, द संडे पोस्ट, अक्षर खबर, शैल सूत्र, जाहनवी, वीणा, कथा समय, शुभ तारिका, सरोपमा, रूबरू दुनिया, हिमप्रस्थ, युग मर्यादा, जगमग दीप ज्योति, जनप्रिय तथा हिमाचल टूडे सहित अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा वागर्श, विपाशा, बया, पाखी, कथाक्रम, अक्षरपर्व, समकालीन भारतीय साहित्य, रूबरू दुनिया सहित अनेक पत्रिकाओं में उनकी लिखी गई कविताओं को स्थान मिल चुका है। वहीं पवन चौहान की अनेक बाल कहानियां विभिन्न पत्रिकाओं में अब तक प्रकाशित हो चुकी है।

पवन चौहान के लेख व फीचर भी विभिन्न पत्रिकाओं के अलावा दैनिक समाचार पत्रों में समय समय पर प्रकाशित होते रहे हैं। इनमें अहा जिंदगी, हंस, लोकायत, सहारा समय, शुक्रवार आउटलुक, साहित्य अमृत, हिमप्रस्थ सहित अनेक पत्रिकाएं शामिल हैं। वर्ष 2014 में राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्र की रविवारीय मैगजीन उमंग में टूर नाम से उनके नियमित स्तंभ को स्थान दिया गया है। वहीं शिमला दूरदर्शन और शिमला आकाशवाणी से कहानी और कविता पाठ कर चुके हैं।

मिल चुका है सम्मान

लेखन के क्षेत्र में उभरते युवा पवन चौहान को बिलासपुर से शब्द मंच द्वारा लेखन के लिए सम्मान प्रदान किया गया है। इसके अलावा हिम साहित्य परिषद मंडी द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता में उनकी कहानी को द्वितीय पुरस्कार मिला है।

पवन चौहान का कहना है कि उन्हें लिखने का जूनून है तथा यह हमेशा बरकरार रहेगा। उन्होंने बताया कि वे समय समय पर लिखते रहते हैं और विभिन्न पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में उन्हें पूरे सम्मान के साथ सम्मान मिलता है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रकाशित कहानियों, कविताओं और बाल कविताओं को उन्होंने संग्रहित कर रखा है जो उनके लिए बहुमूल्य संपति है।

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