अभी पौधों के तौलिए बनाने का समय उचित नहीं : डॉ. एस.पी. भारद्वाज

अभी पौधों के तौलिए बनाने का समय उचित नहीं : डॉ. एस.पी. भारद्वाज

अभी पौधों के तौलियों को खोदने का उचित समय नहीं है क्योंकि वर्षा न होने के कारण तौलिए में पर्याप्त नमी नहीं है। इस समय अगर कोई बाग़वान तौलिए को बनाते भी हैं तो उसमें अत्यंत बारीक जड़ें जो हमारे बालों के समान होती है, टूट जाएंगी और इन जड़ों द्वारा ही पौधों को पोषक तत्वों की उपलब्धता भूमि से प्राप्त होती है। ऐसी अवस्था में यह जड़ें मार्च-अप्रैल में पहले तो स्वयं विकसित होंगी और उस समय तक तह पोषक तत्वों की आपूर्ति का कार्य नहीं कर सकेंगी।

  • बिना मिट्टी परीक्षण के तौलियों में किसी भी पोषक तत्वों का प्रयोग न करें

अधिकतर बागवान आजकल बागीचों में चूने का प्रयोग तने के आस-पास तौलियों में करते रहते हैं बिना मिट्टी परीक्षण के तौलियों में किसी भी पोषक तत्वों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चूने का प्रयोग यदि तने के आस-पास किया गया है तो वहां पौधे की छाल भी जल सकती है क्योंकि चूना छाल के संपर्क में आने पर इसे सड़ा देगा। बागवानों में यह धारणा भी है कि चूने के प्रयोग करने से बाग़ीचे की पीएच/pH वेल्यू बेहतर हो जाएगी। पीएच/pH वेल्यू में इतनी जल्दी सुधार नहीं होता क्योंकि पौधे की जड़ें सामान्यतः भूमि की ऊपरी सतह से लगभग तीन से चार फ़ुट नीचे होती है और वहां तक पीएच/pH का सुधार करना इतने कम समय में संभव नहीं होता। इसलिए चुने का प्रयोग यदि करना ही है तो इसे पौधे के तने से कम से कम 100-125 cm  दूर एक घेरे के रूप में 90 cm चौड़े घेरे में, जिसमें चूना डेढ़ से दो किलो प्रति पौधे की दर से डाला जा सकता है, प्रयोग करें और इसे तुरंत मिट्टी से ढक दें।

  • बाग़ीचे में प्रत्येक पौधे का निरीक्षण बारीकी से करें

बाग़ीचे में प्रत्येक पौधे का बारीकी से निरीक्षण करें और यह देखें कि पौधे की छाल का रंग सामान्य है या नहीं छाल का सामान्य रंग न होने की स्थिति का विश्लेषण करें और कारण

सैंजोसे स्केल का प्रकोप

सैंजोसे स्केल का प्रकोप

जानने का प्रयत्न करें। पौधे की छाल के रंग में परिवर्तन या तो केंकर के रोग के कारण होता है या फिर सैन होज़े स्केल या रेड माइट के अंडों की उपस्थिति के कारण भी दिखाई देता है। ये सभी कीट अत्यंत छोटे आकार के होते हैं इसलिए इन्हें देखने के लिए किसी लोन्स का प्रयोग करें जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह कीड़े इन पौधों पर विद्यमान् है या नहीं। जिन पौधों पर ऐसे कीड़े दिखाई दें उन्हें चिन्हित कर लें और उचित समय आने पर इन कीड़ों की रोकथाम की व्यवस्था की जा सकती है।

  • एक किलो ज़िंक सल्फेट 200 लीटर पानी में घोलकर करें छिड़काव

आजकल ज़िंक या जस्ता तत्वों की कमी प्रदेश के अधिकतर बाग़ीचों में सामान्यत: देखी गई है, का प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए एक किलो ज़िंक सल्फेट 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। वैज्ञानिक सलाह लेकर ही अपने बाग़ीचों की समस्याओं का समाधान करें। इससे न केवल पौधों के स्वास्थ्य में सुधार होगा अपितु अवांछित खर्चों में भी कमी आएगी। फलस्वरूप पौधों का सामान्य जीवन उत्पादकता को बढ़ाने तथा गुणवत्तायुक्त फल पैदा करने व आय को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

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