नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित

नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित

शिमला: डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा को कृषि के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दो प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

  • पहला अवार्ड इंडियन सोसाइटी ऑफ़ पल्स्स (pulses) रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ईएसपीआरडी) ने आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पल्स्स रिसर्च,कानपुर में हुए कार्यक्रम में दिया। डॉ. शर्मा को भारत में फसल संरक्षण के लिए उत्कृष्ट योगदान के लिए ईएसपीआरडी एक्सलंस अवार्ड 2017 दीया गया।
  • दूसरा पुरस्कार- प्रोफेसर जीएस शुक्ला गोल्ड मेडल,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में पर्यावरण जीव विज्ञान अकादमी द्वारा दिया गया। यह अवार्ड गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्यों में से एक की याद में स्थापित किया गया है।

डॉ. शर्मा एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति के कीटविज्ञानी हैं जो पिछले चार दशकों से कृषि के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इससे पहले वह इंटरनेशनल क्रॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी ऐरीड ट्रोपिक्स (ICRISAT) में काम कर चुके हैं। अमेरिका के विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैंड प्रांत के प्राइमरी इंडस्ट्रीज विभाग में एक विज़िटिंग साइंटिस्ट भी हैं। कीट जैव-पारिस्थितिकी और जनसंख्या गतिशीलता, आर्थिक सीमा, प्राकृतिक पौधे उत्पादों और मेजबान-संयंत्र प्रतिरोध के क्षेत्र में डा शर्मा का उल्लेखनीय अनुसंधान योगदान है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन का कीट और फसलों पर प्रभाव और एकीकृत कीट प्रबंधन पर भी काम किया है।

उनके शोध ने सोरगम, अरहर दाल और चने की कई कीट प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने में मदद की है। यह किस्में कीट के कारण फसल में हो रहे नुकसान को कम करने में कामयाब रही है और इनका उपयोग उन नई किस्मों के विकास में भी किया जा रहा है जिनकी अच्छी उपज और कीड़ों का प्रतिरोध है। डॉ. शर्मा नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रिकल्चरल साइंसेज के फैलो होने के साथ साथ एंटोमोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के लाइफ फेलो भी हैं। वर्ष 2008 से 2016 तक, उन्होंने एंटॉमोलॉजी के अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके कार्यों के लिए उन्हें कई शैक्षिक समितियों जैसे अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर सलाहकार समूह (Consultative Group on International Agricultural Research) द्वारा विज्ञान उत्कृष्टता पुरस्कार और इंटरनेशनल काँग्रेस ऑफ प्लांट प्रोटेक्शन द्वारा अंतरराष्ट्रिय प्लांट प्रोटेक्शन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

इस अवसर पर डॉ. शर्मा ने दोनों पुरस्कारों के लिए संस्थाओं का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि भारत में कृषि वैज्ञानिकों और उनकी शोध टीम समेत, सभी के प्रयासों से भारत में दालों की उत्पादन में वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2016-17 में 22.5 मिलियन टन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है। बीते दशक में खेती के लिए बीमारी और कीट प्रतिरोधी किस्मों के विकसित किए जाने के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अब हिमाचल प्रदेश में चने और चारा के स्रोत के रूप में ज्वार की खेती करने के दायरे का अध्ययन भी कर रहे हैं।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *