एनजीटी के फैसले से शिमला में कोई रहने की स्थिति में नहीं होगा : उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति

एनजीटी के फैसले से शिमला में कोई रहने की स्थिति में नहीं होगा : उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति

शिमला: शिमला उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति द्वारा आज बैठक आयोजित की गई। जिसमें शिमला के साथ लगते उपनगरों में बने भवनों के भवन मालिक और यहां प्लाट खरीदकर भवन बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने वाले लोगों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में मांग की गई कि एनजीटी को यह कड़ा फैसला वापस लेते हुए इसे रिव्यू करे। क्योंकि इस फैसले से शिमला में कोई रहने की स्थिति में नहीं होगा और आने वाले दिनों में यहां केवल पेड़ ही मिलेंगे और कुछ वर्षों बाद शिमला फिर भूतिया शहर बनकर रह जाएगा। बैठक में कहा गया कि इस फैसले के खिलाफ शिमला जन संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जाए।

शिमला उपनगरीय जनकल्याण समन्वय समिति के सचिव गोविंद चतरांटा ने कहा कि आज यह बैठक उपनगरीय समिति की है और यह समिति भवनों के नियमितिकरण को लेकर अपनी लड़ाई वर्षों से लड़ रही है। उन्होंने कहा कि एनजीटी का फैसला व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग वन टाइम सैटलमेंट की है और इसे लेकर वे लड़ाई लड़ रहे हैं और आगे भी लड़ेंगे।

वहीं शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एनजीटी का आदेश ऐसा है, जिससे हर वर्ग परेशान है और भवन मालिक, भू मालिक परेशान है और इसके लिए सभी को मिलकर लड़ाई लड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि इस मामले पर लड़ाई लड़ने के लिए सभी को एकजुट होना होगा और इसके लिए एक समन्वय समिति का गठन किया गया है।

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