हिमाचल शिक्षक करेंगे संसद का घेराव

हिमाचल शिक्षक करेंगे संसद का घेराव

नई दिल्ली : नई दिल्ली में हुई अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ की बैठक में संसद घेराव करने का प्रस्ताव पारित हुआ। हिमाचल के शिक्षक शीतकालीन बजट सत्र के दौरान संसद का घेराव करेंगे। महासंघ की बैठक में यह प्रस्ताव पारित हुआ। शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रदेश के शिक्षक शीतकालीन बजट सत्र के दौरान संसद का घेराव करेंगे।

हिमाचल से राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और महासंघ के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने बैठक में भाग लिया। बैठक में सीसीई प्रणाली को समाप्त कर दोबारा से पहली से आठवीं कक्षा तक अंकों के आधार पर पास और फेल का पैटर्न लागू करने की मांग की गई। पुरानी पेंशन स्कीम, नियमित भर्तियां और डीएलएड रद्द करने की चर्चा भी की गई।

अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षक महासंघ के उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने बताया कि बैठक में शिक्षा और शिक्षकों की बेहतरी के लिए कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए। फैसला लिया गया कि केंद्र सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ संसद का घेराव और प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि नियमित पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएं। शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य न लिए जाएं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान को सर्व शिक्षा अभियान में मर्ज न किया जाए। नियमित शिक्षकों को डीएलएड जैसे कोर्स करवाकर मानसिक बोझ और समय बर्बाद न किया जाए। सभी प्रकार की पार्ट टाइम नियुक्तियों को नियमित किया जाए। भविष्य में सभी नियुक्तियां नियमित तौर पर की जाएं। नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले महासंघ को विश्वास में लिया जाए। जीडीपी का छह फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च किया जाए।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मेंयह  प्रस्ताव पारित किया गया कि पूरे देश में एक जैसी शिक्षा व्यवस्था दी जाए। सभी सरकारी स्कूलों में नर्सरी कक्षाएं शुरू की जाएं। शिक्षा के अधिकार को नर्सरी से जमा दो कक्षा तक अनिवार्य किया जाए।

  • इस बैठक में हाल ही में यू.एन. में पेश की गई रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिसमें देश की शिक्षा का कोई उल्लेख नहीं है। इसके साथ ही इसमें पुरानी पैंशन योजना की बहाली, पूरे प्रदेश में एक जैसी शिक्षा व्यवस्था प्रदान करना, शिक्षा के आधार को कक्षा 12 तक लागू करना, प्री प्राइमरी शिक्षा को स्कूलों का हिस्सा बनाना, नियमित पदों पर नियमित नियुक्तियां, समान कार्य समान वेतन पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार वेतनमान देने, शिक्षकों से गैर-शिक्षण कोई भी कार्य न करवाने व आर.एम.एस.ए. को एस.एस.ए. में मर्ज करने का विरोध भी इस बैठक में किया गया।

 

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