नागरिक सभा ने एनजीटी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

नागरिक सभा ने एनजीटी की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

शिमला: भवन निर्माण और इन्हें नियमित करवाने का नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के फैसले से जहां घमासान मचा हुआ है वहीं अब इस निर्णय को लेकर इसके वैज्ञानिक आधार को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया जा रहा है। जिसके चलते एनजीटी के आदेशों को मनमाना फैसला बताते हुए शिमला नागरिक सभा ने संस्था के आदेशों को चुनौती देते हुए कहा है कि एनजीटी कोई ऐसी संस्था नहीं है, जो पर्यावरण और सिल्विक्लचर का अध्ययन करती है। नागरिक सभा ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी बड़ी सभ्यता और साथ में इकोलॉजी के विकास की भी एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें मानव विकास के साथ जंगल, फ़्लोरा-फना का भी संतुलित विकास होना ज़रूरी है। ऐसे में उम्र पूरी कर चुके दरख्तों को काटा जाना और उनकी जगह नए पेड़ों के लगाए जाने की व्यवस्था आदि का प्रावधान होना आवश्यक है। शिमला शहर के लिए एनजीटी की सोच और चिंता के वैज्ञानिक आधार को नकारते हुए नागरिक सभा ने शिमला के लिए बनाए गए मास्टर प्लान और नई स्मार्ट सिटी डेवेलपमेंट प्लान को भी बाधित करने वाला बताते हुए आने वाले निर्माण के लिए अव्यवहारिक बताया है। सभा इस विषय को लेकर आगामी 2 दिसंबर को बड़े स्तर पर मंथन के लिए अधिवेशन करने जा रही है, जिसमें सभी संस्थाओं, राजनीतिक दलों और प्रभावित लोगों को भी आमंत्रित किया गया है।

सभा ने सवाल उठाए हैं कि जो लोग प्रभावित हो रहे हैं उनकी सुनवाई नहीं होना, उनको अपना पक्ष रखे जाने का मौका तक नहीं देना, जैसे प्रावधान नहीं करना एनजीटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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