नौणी विवि में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों की बैठक आयोजित, उत्तराखंड में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए करेंगे विचार-विमर्श

नौणी विवि में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों की बैठक आयोजित, उत्तराखंड में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए करेंगे विचार-विमर्श

  • उत्तराखंड और हिमाचल, दोनों ही राज्यों में एक समान तलरूप और समान जलवायु परिस्थितियां
  • दोनों राज्यों में गैर-मौसमी सब्जी और उच्च गुणवत्ता वाले अदरक, हल्दी और लहसुन की उत्पादन की अधिक संभावना
  • डॉ. एचसी शर्मा ने कृषि को युवाओं के बीच एक सम्मानजनक व्यवसाय बनाने के लिए शिक्षा में सुधार पर दिया जोर
  • प्रतिभागियों ने सेब, फल, सब्जियों और फूलों के खेती पर चार तकनीकी व्याख्यानों में लिया भाग
नौणी विवि में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों की बैठक आयोजित

नौणी विवि में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधकों की बैठक आयोजित

शिमला : राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जिला विकास प्रबंधकों की तीसरी द्विमासिक बैठक आज डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में आयोजित की गई। इस बैठक का आयोजन नाबार्ड के देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय ने विश्वविद्यालय के साथ मिलकर किया।

नाबार्ड के देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के पंद्रह जिला विकास प्रबंधकों ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से अपने राज्य में बागवानी की संभावनाओं पर सुझाव लिए और चर्चा की। नाबार्ड की इस बैठक का उद्देश्य अपने अधिकारियों को बागवानी क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और पार अवसरों को उजागर करना था ताकि वे किसानों के लिए इनसे जुड़ी योजनाओं को बढ़ावा दे सकें। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश, दोनों ही राज्यों में एक समान तलरूप और समान जलवायु परिस्थितियां हैं। जहां हिमाचल इस क्षेत्र में काफी सफल रहा है वहीं उत्तराखंड अभी बागवानी में अपनी क्षमता का सही उपयोग करने में नाकाम रहा है। नौणी विवि के उप-कुलपति डॉ. एच.सी. शर्मा, निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. विजय विजय ठाकुर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक डीएन मगर और किशन सिंह के अलावा संयुक्त निदेशक (ट्रेनिंग) डॉ. राजेश भल्ला और संयुक्त निदेशक (कम्युनिकेशन) डॉ. राज कुमार ठाकुर ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

इस अवसर पर डी॰एन मगर ने दोनों राज्यों में ग्रामीण प्रवास का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 978 गांव बिलकुल खाली है और राज्य में करीब 1.14 लाख हेक्टेयर भूमि बंजर हो गई है। हिमाचल में बागवानी के कारण ऐसा नहीं हुआ है। इस बैठक के दौरान यह भी महसूस किया गया कि ‘क्रेडिट (credit) और एक्सटेंशन (extension)’ के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है।

डॉ. एचसी शर्मा ने कृषि को युवाओं के बीच एक सम्मानजनक व्यवसाय बनाने के लिए शिक्षा में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में गैर-मौसमी सब्जी और उच्च गुणवत्ता वाले अदरक, हल्दी और लहसुन की  उत्पादन की संभावना बहुत है। पहले तकनीकी सत्र में डॉ वी.एस. ठाकुर ने राज्य में सेब की खेती के बारे में बताया और इसके उत्पादन से संबंधित समस्याओं को साझा किया। बैठक में भाग ले रहे प्रतिभागियों ने सेब, फल, सब्जियों और फूलों के खेती पर चार तकनीकी व्याख्यानों में भाग लिया। प्रतिनिधियों ने हाइ-टेक फूलों की खेती, औषधीय और सुगंधित पौधों के खेतों का भी दौरा किया। दूसरे दिन यह अधिकारी चम्बाघाट स्थित मशरूम रिसर्च निदेशालय और कृषि विज्ञान केंद्र, कंडाघाट का दौरा करेंगे।

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