कानून की दृष्टि में सभी समान :अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी

  • मध्यस्तता प्रणाली से सुलझायें पारिवारिक झगडे- अमित मंडयाल
  • वरिष्ठ नागरिक जिनकी वार्षिक आय दो लाख रूपये तक हो, मुफ्त कानूनी सहायता कर सकते हैं प्राप्त
  • छोटे-मोटे पारिवारिक तथा सामाजिक झगड़ों को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए
  • समाज के पिछड़े, कमजोर, गरीब वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का प्रावधान
  • प्रत्येक महिला, नाबालिग बच्चे, औद्योगिक कामगार, अनुसूचित जाति व जनजाति से सम्बन्ध रखने वाले नागरिक और आपदाग्रस्त क्षेत्र के निवासी मुफ्त कानूनी सहायता के हकदार
कानून की दृष्टि में सभी समान : अमित मंडयाल

कानून की दृष्टि में सभी समान : अमित मंडयाल

शिमला: कानून की दृष्टि में सभी समान हैं । समाज के पिछड़े, कमजोर, गरीब वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अदालती कार्यवाही करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने का प्रावधान है। यह बात अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, अमित मण्डयाल ने शिमला जिला के बसंतपुर खंड की गा्रम पंचायत डुम्मी में आयोजित एक दिवसीय विधिक साक्षरता शिविर की अध्यक्षता करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला, नाबालिग बच्चे, औद्योगिक कामगार, अनुसूचित जाति व जनजाति से सम्बन्ध रखने वाले नागरिक, आपदाग्रस्त क्षेत्र के निवासी, मुफ्त कानूनी सहायता के हकदार हैं। मंडयाल ने बताया कि आम नागरिक जिनकी वार्षिक आय एक लाख रूपये से कम हो तथा वरिष्ठ नागरिक जिनकी वार्षिक आय दो लाख रूपये तक हो, भी मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए सादे कागज पर जिला व उपमंडल स्तर पर स्थापित विधिक साक्षरता प्राधिकरण कार्यालय में प्रार्थनापत्र दे सकते हैं। प्रार्थी को अपने प्रार्थना पत्र के साथ उम्र, आय व जाति का प्रमाणपत्र संलग्न करना होगा।

मण्डयाल ने कहा कि छोटे-मोटे पारिवारिक तथा सामाजिक झगड़ों को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए ताकि परिवार व समाज में आपसी प्रेम व मेल-जोल की भावना बनी रहे। उन्होंने कहा कि शीघ्र व सस्ता न्याय प्राप्त करने के लिए लोगों को आपसी मामले लोक अदालतों तथा मध्यस्तता प्रणाली के माध्यम से सुलझाने की पहल करनी चाहिए। मामले का निपटारा दोनों पक्षों की रजामंदी से ही किया जाता है तथा मामला न सुलझने की स्थिति में कार्यवाही को गोपनीय रखा जाता है ताकि मामले पर कोई प्रभाव न पडे़। उन्होंने बताया कि लोगों की सुविधा के लिए जिला न्यायालयों में फ्रंटऑफिस स्थापित किए गए हैं, जहां पर अधिवक्ता के माध्यम से लोगों को मुफ्त कानून सम्बन्धी सलाह दी जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायत स्तर पर भी लोगों को कानूनी जानकारी देने के लिए जिला विधिक साक्षरता प्राधिकरण द्वारा लिगल वॉलंटियर नियुक्त किए गए हैं।

जिला बार संघ के प्रधान वीरेन्द्र शर्मा ने मोटर वाहन अधिनियम तथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बारे विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि वाहनों की बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण निर्धारित अवधि से पूर्व करवाना सुनिश्चित करें तथा बाजार से सामान क्रय करने पर बिल अवश्य लें। यह प्रक्रिया उपभोक्ता व सरकार दोनों के हित में हैं।  अधिवक्ता एम.एस.कंवर ने आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों, शिक्षा का अधिकार, बाल-मजदूरी अधिनियम तथा वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा अधिनियम बारे विस्तृत जानकारी दी तथा लोगों को बच्चों में बढ रहे मोबाईल के प्रयोग व सोशल मीडिया के कुप्रभावों के प्रति सजग रहने के लिए भी जागरूक किया।

अधिवक्ता रीता ठाकुर ने महिलाओं के अधिकार व दायित्वों बारे विस्तृत जानकारी दी तथा घरेलू हिंसा और बच्चों व वृद्ध माता-पिता के भरण पोषण अधिनियम बारे जागरूक किया। प्रधान, गा्रम पंचायत डुम्मी मनोहर सिंह कश्यप ने स्वागत करते हुए कहा कि स्थानीय लोगों को इस शिविर के आयोजन से अपने अधिकारों व दायित्वों की जानकारी प्राप्त हुई है तथा इस प्रकार के शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होते हैं।

इस अवसर पर गा्रम पंचायत डुम्मी के उप प्रधान रमेश शर्मा, बी.डी.सी. सदस्या तारावती, पंचायत सदस्य झलकु देवी व अमिता ठाकुर, पूर्व प्रधान हेमचंद शर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी तथा पंचायत के लगभग 150 लोग उपस्थित थे।

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