“किलर ब्लू व्हेल गेम”.... से अभिभावक इस तरह रखें अपने बच्चों को सुरक्षित

“किलर ब्लू व्हेल गेम”…. से अभिभावक इस तरह रखें अपने बच्चों को सुरक्षित

कई बार सोशल मीडिया या वीडियो गेम जैसी चीजें भी जानलेवा साबित हो जाती हैं। इसका ताजा उदाहरण है खतरनाक ‘ब्लू व्हेल गेम’ जिसकी पिछले कई महीनों से न केवल बाहरी देशों में बल्कि भारत में भी चर्चा हो रही है। कथित तौर पर भारत में भी इस गेम को खेलकर सुसाइड करने के कई मामले सामने आए हैं। इसका शिकार ज्यादातर बच्चे या किशोर छात्र-छात्राएं हो रहे हैं, ऐसे में बच्चों के माता-पिता यानी पैरेंट्स को अपने बच्चों के बारे में चिन्ता होने लगी है कि कहीं उनके बच्चे ऐसी किसी गेम के शिकार न हो जाएं। आज हम आपको यही बताने जा रहे हैं कि यह जानलेवा गेम क्या है और इससे अपने बच्चों को कैसे सुरक्षित या दूर रख सकते हैं। ब्लू व्हेल नाम के इस ऑनलाइन खेले जाने वाला गेम  में दरअसल 50 दिन अलग-अलग टास्क खेलने के लिए दिए जाते हैं। हर रोज एक टास्क पूरा होने पर नुकीली चीज से अपने हाथ पर निशान बनाना होता है जोकि 50 दिन के पूरे होने पर एक व्हेल मछली की तरह नजर आता है। इस गेम को खेलने वाले को हर दिन अपने सभी टास्क के फोटो या वीडियो बनाकर आदेश देने वाले व्यक्ति को भेजने होते हैं। जिसके बाद 50वें लेवल यानी अंतिम टास्क में गेम खेलने वाले को सुसाइड करना होता है और तब जाकर यह गेम पूरा होता है। यहां इस गेम की एक शर्त यह भी है कि गेम खेलने वाला जो भी टास्क करने जा रहा है, उसकी जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं देगा।

हाल ही में भारत सरकार ने गूगल, फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्ट्राग्राम, माइक्रोसॉफ्ट और याहू जैसी इंटरनेट कंपनियों को खतरनाक ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज के डाउनलोड लिंक को तुरंत हटाने के लिए कहा था। विशेषज्ञों के अनुसार “ब्लू व्हेल गेम या चैलेंज एक साइकोलॉजिकल गेम है, जो कि सभी बच्चों को प्रभावित नहीं करता है बल्कि वो ऐसे बच्चों को शिकार बनाता है जोक मानसिक तौर पर कमजोर हैं। आपको बता दें कि यह गेम किसी भी द्वारा आसानी से डाउनलोड नहीं किया जा सकता है क्योंकि ये आसानी से उपलब्ध नहीं है और ये सभी को प्रभावित नहीं करता। ये गेम दो प्लेयर के बीच बातचीत की तरह है- एक तरफ आदेश देने वाला और दूसरी तरफ उसका शिकार।”

विशेषज्ञों के अनुसार कोई बच्चा यह गेम खेल रहा है या नहीं यह जानना अधिक कठिन नहीं है। माता-पिता व अभिभावकों की निगरानी से इस बारे में पता लगाया जा सकता है। यदि बच्चा 50 दिन लगातार प्रात: सवा 4 बजे उठ जाए। उसके शरीर में कोई न कोई चोट का निशान बना हो। इस प्रकार के लक्षण इंगित करते हैं कि हो सकता है कि आपका बच्चा ब्लू व्हेल गेम खेल रहा है।

  •  स्मार्टफोन में गेम खेलने के शौकीन बच्चों को ब्लू व्हेल जैसे खतरनाक गेम्स से बचाने के लिए उनके द्वारा की गई गतिविधियों पर नजर रखें।
  • अपने बच्चों को स्मार्टफोन दें तो ध्यान रखें और अगर आपने स्कूल के दौरान फोन इस्तेमाल करने के लिए स्मार्टफोन दिया है तो हर रोज या हर दूसरे दिन चेक करते रहें।
  • अपने बच्चों की इंटरनेट पर हर एक गतिविधि का रिकॉर्ड रखें, आपको उन्हें लिमिटेड सोशल मीडिया वेबसाइट एक्सेस देना चाहिए ताकि वो सिर्फ उसी वेबसाइट पर जाए जो सेफ हो।
  • अपने कंप्यूटर, टैबलेट, लैपटॉप या मोबाइल में फायरवाल, फिल्टर, निगरानी रखने वाले सॉफ्टवेयर, पैरेंटल कंट्रोल जैसे सुरक्षा लगाएं और अपने डिवाइस में एंटी वायरस अपडेट रखें।
  • आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपके बच्चे सोशल मीडिया पर कितने एक्टिव रहते हैं या बच्चे इंटरनेट व मोबाइल पर क्या कर रहे हैं इसकी आपको सामान्य जानकारी होनी चाहिए।
  • आपको अपने बच्चों को गाइड करना चाहिए और सही इंटरनेट के उपयोग करने के बारे में बताना चाहिए और बच्चों को पहले से ही इस तरह के खतरनाक गेम को ना खेलने के लिए सतर्क करना चाहिए।
  • कमजोर दिमाग वाले किशोर छात्र-छात्राएं इस गेम का जल्दी शिकार हो सकते हैं इसलिए उन पर खास नजर रखना चाहिए। ध्यान रखें कि आपका बच्चा अचानक बदल तो नहीं गया।
  • बच्चा अगर चोरी -छुपे डिवाइस में गेम खेल रहा हो या अचानक कुछ दिनों से मोबाइल पर ज्यादा गेम खेलने लगा हो, तो उस पर नजर रखें कही ब्लू व्हेल गेम तो नहीं खेल रहा है। हालांकि ये गेम इंटरनेट पर आसानी से नहीं मिल सकता है।
  • बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक करें ताकि बच्चे इंटरनेट का गलत उपयोग न कर सकें।
  • बच्चों के मोबाइल के मैसेज, कॉल लॉग का ध्यान रखें और यदि अभिभावकों को लगे कि उनका बच्चा ‘‘ब्लू व्हेल गेम’’ खेल रहा है तो फौरन इन्टरनेट को बंद कर दें।
  • बच्चों के शरीर पर कोई चोट या अन्य प्रकार के कटने आदि के निशान हों तो उस पर नजर रखें। जरूरी लगे तो पुलिस को सूचित करें।
  • बच्चों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल व टेबलेट आदि इलेक्ट्रानिक उपकरणों के उपयोग को सीमित कर दें।

यूनिसेफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हमें अपने बच्चों को इंटरनेट से सुरक्षित रखने के लिए खास उपाय अपनाने चाहिए:-

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