रोहतांग दर्रे का मुद्दा एनजीटी के साथ उठाया जाएगाः वीरभद्र सिंह

रोहतांग दर्रे का मुद्दा एनजीटी के साथ उठाया जाएगाः वीरभद्र सिंह

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि हालांकि वह निजी तौर पर पलचान-रोहतांग रज्जू मार्ग के पक्ष में नहीं है, लेकिन वह निश्चित तौर से मामला प्राथमिकता के आधार पर राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूलन से उठाएंगे ताकि इसका प्रभावी ढंग से समाधान हो सके। वह आज कुल्लू जिला के बाहंग (मनाली) में एक जनसभा को समबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें समीपवर्ती पंचायतों के प्रतिनिधियों से आपत्तियां प्राप्त हुई हैं और राज्य सरकार एनजीटी के दिशा-निर्देशानुसार इस समस्या का कोई सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि वाहनों की भीड़ को कम करने के राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल के आदेश रोहतांग मार्ग पर ढाबों तथा छोटे व्यावसायों से अपनी आजीविका अर्जित करने वालों के साथ-साथ रोहतांग दर्रे पर सैलानियों को लाने व ले जाने वाले टैक्सी संचालकों के विरूद्ध है जिनकी रोजी रोटी इस व्यवसाय पर निर्भर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम में बदलाव शायद ग्लोबल वार्मिंक के कारण है न कि वाहनों से’। उन्होंने कहा कि लाहौल-स्पिति के द्वार तथा लेह-लद्दाख के लिये सड़क मार्ग इस दर्रे से सदियों से वाहनों की आवाजाही है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं पर्यावरण से जुड़े अनेक कारण है तथा क्षेत्र से भाजपा के नेता निजी स्वार्थ के लिये मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस बात पर सहमत है कि पर्यावरण एक बड़ा मुद्दा है और इस मार्ग पर यातायात कम किया जाना चाहिए, न कि पूरी तरह से बंद। उन्होंने भाजपा नेताओें से मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाए इस सुलझाने के लिये सरकार का सहयोग करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू-मनाली विश्व भर में पर्यटन क्षमता के लिए जाना जाता है और राज्य सरकार पर्यटन क्षमताओं के दोहन के लिए वचनबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हमीरपुर में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए वन स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की आपसी लड़ाई के चलते एम्स का भविष्य अधर में लटका हुआ है, जबकि प्रदेश सरकार द्वारा बिलासपुर में इसके लिए पहले ही आवश्यक भूमि उपलब्ध करवाई जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हुए अभूतपूर्व विकास की चर्चा करते हुए कहा कि आज हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन कर उभरा है तथा राज्य की साक्षरता दर बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय, जो वर्ष 1948 में मात्र 240 रुपये थी, आज बढ़कर 1 लाख 50 हजार रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने पतली कूहल में अग्निशमन केन्द्र तथा नागरिक अस्पताल मनाली को स्तरोन्नत कर 75 बिस्तरों का अस्पताल करने की भी घोषणाएं की। उन्होंने मनाली-अलियू पुल के निर्माण के लिये पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने की भी घोषणा की।

इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण व विभिन्न विभागों की अनेक परियोजनाओं की भी आधारशिलाएं रखी। उन्होंने लगभग 63 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 10 पुलों, 10 सड़कों तथा दो भवनों की आधारशिलाएं रखी, जिनमें 2.62 करोड़ रुपये की लागत से सोलंग नाला से सोलंग गांव तक बनने वाली सड़क भी शिमल है। उन्होंने शनाग नाला पर पुल की आधारशिला तथा ब्रुआ से मझाछ सड़क को पक्का करने तथा जगसुख से भनारा के लिए सड़क की भी आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री ने ब्यास नदी पर नेहरू कुंड पर 6.45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पुल तथा सजला नाला पर एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पुल की भी आधारशिलाएं रखी। उन्होंने 4.7 करोड़ रुपये की लागत से जगतसुख नाला पर बनने वाले पुल, 1.78 करोड़ रुपये की लागत से हरिपुर नाला पर बनने बाले पुल, 1.56 करोड़ रुपये की लागत से पीरनी नाले पर बनने वाले पुल तथा 3.37 करोड़ रुपये की लागत से चक्की नाला पर बनने वाले पुल की भी आधारशिलाएं रखी। उन्होंने शांग नाला (जझाछ) पर 1.11 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल, चौरी बिहाल में 1.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित उप सब्जी मण्डी का भी लोकार्पण किया। उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हरिपुर के दो मंजिला भवन का भी लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने हलान-1 पेयजल आपूर्ति योजना को लोगों को समर्पित किया जो क्षेत्र की लगभग 1500 की आबादी को लाभान्वित करेगी। उन्होंने 94.24 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाली पेयजल योजना सोलंग नाला तथा जगसुख की भी आधारिशला रखी। इस योजना के पूरा होने से लगभग 81500 जनसंख्या लाभान्वित होगी।

पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि उनके सांसद कार्यकाल के दौरान उस समय रोहतांग सुरंग परियोजना के निर्माण की पहल की गई थी। उन्होंने कहा कि कुल्लू हवाई अड्डे के विस्तार के लिये बार बार केन्द्र सरकार से आग्रह किया गया था, जो अन्ततः पूरा हुआ। उन्होंने कहा कि मुख्य पेयजल आपूर्ति योजनाओं के लिए 40 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करवाने, जिसमें 16 करोड़ रुपये की राशि मनाली शहर के लिए तथा 22 करोड़ रुपये की राशि कुल्लू शहर के लिए उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार तत्कालीन यूपीए सरकार की ऋणी है।

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