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निदेशक अर्चना शर्मा ने देश में विज्ञान शोध कार्यों में महिलाओं की कम भागीदारी पर जताई चिंता

निदेशक अर्चना शर्मा ने देश में विज्ञान शोध कार्यों में महिलाओं की कम भागीदारी पर जताई चिंता

  • महिला संबंधी योजनाओं को ग्रामीण परिवेश में प्रचलित करने की आवश्यकता : अर्चना शर्मा
  • प्रदेश की महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महत्व पर की चर्चा
  • महिलाओं के लिए 8 एवं 9 सितम्बर को होटल होलीडे होम में संवेदीकरण कार्यक्रम

 शिमला: हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद, शिमला में विज्ञान प्रौद्योगिकी (lhM)विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागए भारत सरकार के सहयोग से महिलाओं के लिए दो दिवसीय संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन 8 एवं 9 सितम्बर को होटल होलीडे होम में किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उददेश्य डीएसटी के सीड प्रभाग द्वारा प्रेरित एवं समर्थित महिला कार्यक्रमों के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विवरण को समझना है। कुणाल सत्यार्थी, संयुक्त सदस्य सचिव, हिमकोस्ट, शिमला नें अपने स्वागत भाषण में प्रदेश की महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महत्व की चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अर्चना शर्मा, निदेशक, पर्या.वि. एवं प्रौ. विभाग शिमला ने देश में विज्ञान शोध कार्यों में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता व्यक्त की तथा महिलाओं को विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने पर जोर दिया। उन्होने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही महिला संबंधी योजनाओं को ग्रामीण परिवेश में प्रचलित करने की आवश्यकता है ताकि ग्रामीण महिलाएं भी विज्ञान के क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकें।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सीड डिवीजन की स्थापना महिला सशक्तिकरण एवं विकास के लिए की गई है। जिसका उददेश्य समाज के गरीब व वंचित वर्गों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए वैज्ञानिकों एवं क्षेत्रीय स्तर के श्रमिकों को अवसर प्रदान करना है। कार्यशाला में इंदु पुरी समेत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिकों एवं उतर भारत के वशिष्ठ संस्थानों के वैज्ञानिकों, प्राचार्यों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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