‘हि.प्र. लोक वित्तीय प्रबन्धन एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ का शुभारम्भ

‘हि.प्र. लोक वित्तीय प्रबन्धन एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ का शुभारम्भ

शिमला: मुख्य सचिव वी.सी. फारका ने प्रदेश के सभी आहरण एवं वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को आगामी चार वर्षों के दौरान ऑनलाईन सुविधाएं उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि शत-प्रतिशत कैशलेस लेन-देन सुनिश्चित बनाया जा सके। उन्होंने आहरण एवं वितरण अधिकारियों की संख्या कम करने पर भी बल दिया जो वर्तमान में प्रदेश में 4400 से अधिक है।

मुख्य सचिव ने यह जानकारी आज यहां विश्व बैंक वित्त पोषित ‘हिमाचल प्रदेश लोक वित्तीय प्रबन्धन एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ का शुभारम्भ करने के उपरान्त दी। कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व बैंक द्वारा 36 मिलियन डॉलर की सहायता की जाएगी, जबकि 20 प्रतिशत राशि प्रदेश सरकार वहन करेगी। इस प्रकार यह परियोजना 45 मिलियन अमेरिकन डॉलर की होगी और इसे वर्ष 2017 से 2022 के दौरान कार्यान्वित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश इस परियोजना को प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य है। प्रदेश के विश्व बैंक के साथ बेहतर समन्वय व पूर्व में हासिल बेहतर मानकों के चलते यह संभव हुआ है। उन्होंने विश्व बैंक दल का इस परियोजना को स्वीकृत करने के लिए आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि परियोजना के अन्तर्गत राज्य को वांछित धनराशि प्राप्त करने के लिये लक्ष्यों को हासिल करना होगा तथा लोक वित्त प्रबन्धन के लिए धन राशि के बेहतर प्रबन्धन की आवश्यकता, उपयुक्त ऑडिट और समुचित उपयोग की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में ई-प्रापण प्रणाली लागू की जाएगी, जो पहले ही सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य व लोक निर्माण विभाग में आरम्भ की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या है तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग प्रदेश भर में हिमस्वां को स्तरोन्नत करने व इसके प्रसार के लिए प्रयासरत है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) डा. श्रीकांत बाल्दी ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि परियोजना को विश्व बैंक की तकनीकी सलाह के अनुरूप कार्यान्वित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सभी डीडीओ को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना से लोक वित्त के सही प्रकार से प्रबन्धन में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लोक वित्तीय नियम बनाए गए हैं और अब इस कार्यक्रम को सही प्रकार से कार्यान्वित करने के लिये संबद्ध विभागों को और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी कोषागारों को पहले ही ऑनलाईन किया जा चुका है।

हिमाचल प्रदेश के प्रधान महालेखाकार कुलवन्त सिंह ने प्रस्तुति के दौरान जानकारी दी वर्तमान में डाटा मैनुअल व इलैक्टॉनिक दोनों तरह से प्राप्त किया जा रहा है। इस परियोजना के लागू होने से समस्त कार्य पेपरलैस हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 1946 के बाद के पैंशन का पूरा रिकॉर्ड डिजिटाईजड कर लिया गया है और आगामी पांच वर्षों में सभी प्रकार के बाउचर व रिकार्ड डिजिटाईजड कर दिए जाएंगे।

विश्व बैंक टीम लीडर तरूण माथुर ने विभिन्न परियोजनाओं, कार्यक्रमों व नीतियों के कार्यान्वयन में बेहतर मानक प्राप्त करने के लिए राज्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश नेएनआईसी व सूचना प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्वास जताया है और बेहतर कार्य किया है।

  • सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग, आबकारी एवं कराधान, एनआईसी, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा लोक निर्माण विभागों ने इस अवसर पर अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। मुख्य सचिव वित्त डी.डी. शर्मा ने कार्यवाही का संचालन किया तथा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण कपूर, प्रधान सचिव जगदीश शर्मा, एनआईसी के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक अजय चाहल ने भी इस अवसर पर अपने विचार प्रकट किये। आबकारी एवं कराधान विभाग, कोषागार एवं लेखा विभाग, एनआईसी, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग व सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारी व अन्य हितधारक भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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