प्रदेश सरकार की 3 साल कारगुजारी निराशाजनक और बिना विकास की : कौल सिंह

हिमाचल वर्ष 2022 तक होगा टीबी मुक्तः स्वास्थ्य मंत्री

शिमला : क्षयरोग नियंत्रण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है तथा वर्ष 2025 तक राष्ट्र को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य से पूर्व प्रदेश में यह लक्ष्य वर्ष 2021-22 तक प्राप्त कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने यह बात आज यहां टीबी एवं फेफड़ों के रोग की रोकथाम पर अन्तरराष्ट्रीय संघ द्वारा ‘प्रशिक्षक बैच के प्रशिक्षण’ पर आयोजित टी.बी. एवं तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कही।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोगों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है और राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं योजनाएं राष्ट्रीय मानदण्डों के अनरूप कार्यान्वित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य मानक राष्ट्रीय दर से कहीं बेहतर है तथा प्रदेश अब वैश्विक मानकों को प्राप्त करने की पूरी कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2.3 की राष्ट्रीय जन्म दर के मुकाबले प्रदेश में कुल जन्म दर 1.7 है, जबकि  37 की राष्ट्रीय नवजात शिशु मृत्यु दर के मुकाबले प्रदेश में यह दर 28 है। देश में पांच वर्ष की आयु से कम के शिशु की मृत्यु दर 43 है, जबकि प्रदेश में यह दर केवल 33 है।

ठाकुर ने कहा कि चिकित्सा जगत में रोगों का पता लगाने तथा चिकित्सा के क्षेत्र में अनेक प्रगतियों के बावजूद टीबी विश्व भर में सबसे अधिक घातक व जानलेवा बीमारी है, जिससे हरवर्ष लगभग 14 लाख लोगों की जानें जाती हैं, जिसमें से 4.8 लाख केवल भारत में ही जान गंवाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष टीबी के 15 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं तथा लगभग 8 हजार से 9 हजार टीबी रोगी निजी चिकित्सा क्षेत्र में इलाज करवा रहे हैं और यह संख्या भी बहुत अधिक है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में आरएनटीसीपी कार्यक्रम के तहत टीबी के मामलों का पता लगाने की दर तथा सफल चिकित्सा दर क्रमशः 77 प्रतिशत तथा 90 प्रतिशत है, जबकि देश में यह दर क्रमशः 70 प्रतिशत तथा 85 प्रतिशत है। उन्होंने कहा हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री क्षय रोग निवारण योजना के अन्तर्गत 2 करोड़ रुपये स्वीकृत करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य ने 26 जनवरी, 2017 को टीबी रोगियों के लिए एफडीसी एवं प्रतिदिन खुराक आरम्भ करने में भी प्रथम स्थान हासिल किया, जिसमें 7 हजार से भी ज्यादा रोगियों को प्रतिदिन खुराक प्रदान की जा रही है, ताकि एमडीआर-टीबी रोगियों को पौष्टिक आहार प्रदान किया जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी से मृत्यु में लगभग 38 प्रतिशत मामले तम्बाकू से जुड़े हैं तथा टीबी के मामले धूम्रपान न करने वाले रोगियों के मुकाबले धूम्रपान करने वाले रोगियों में 3 गुणा ज्यादा पाये जाते हैं। राज्य सरकार ने प्रभावी तम्बाकू नियंत्रण के लिए अनेक नए कदम उठाए हैं तथा राज्य में इनको लागू करने के लिए सुदृढ़ प्रणाली मौजूद है, जिसके फलस्वरूप प्रदेश ने वर्ष 2013 में धूम्रपान मुक्त प्रदेश का दर्जा भी हासिल किया। संगोष्ठी में हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा तथा चण्डीगढ़ से आए प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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