हिमाचल : कांग्रेस ने सोलन नगर निगम चुनाव में प्रचार के लिए गठित की चार सदस्‍यीय कैंपेनिंग कमेटी

सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए पूर्व नियोजित था भाजपा विधायकों का उत्पाती व्यवहार : कांग्रेस

शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्रियों और कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों ने विधानसभा सदन में आज उद्ण्ड व्यवहार और अभद्र भाषा के इस्तेमाल के लिए भाजपा विधायकों की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की सर्वाच्च परम्पराओं व मर्यादाओं को ठेस पहुंचाई है। मंत्रियों कौल सिंह ठाकुर, मुकेश अग्निहोत्री और सुधीर शर्मा, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी सचिव आशा कुमारी व राज्य वित्तायोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार ने कहा कि सदन की कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए भाजपा विधायकों का उत्पाती व्यवहार पूर्व नियोजित था।

उन्होंने कहा कि चुनाव की दहलीज पर भाजपा इस प्रकार अफरा-तफरी का माहौल पैदा करती है ताकि राज्य के महत्व से जुड़े मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके। चर्चाओं में बने रहने और ऐसे मामले जिनकी जांच चल रही हो उन्हें लेकर शोर शराबा करना भाजपा विधायकों की पुरानी आदत है। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए कानून एवं व्यवस्था को दरकिनार कर भाजपा अशांति फैलाने में विश्वास रखती है यहां तक भाजपा कार्यकर्त्ताओं की कार्यशैली भी संदेहस्पद है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि उनमें से कुछ कार्यकर्त्ताओं को भाड़े पर लाया गया है ताकि विभिन्न मुद्दों को अनावश्यक तौर पर उछाल कर माहौल खराब किया जा सके, जो अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।

भाजपा नेता इस पूरी तैयारी के साथ आए हैं कि सदन की पूरी कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने न दिया जा सके। भाजपा अभद्र भाषा के प्रयोग और अनुचित व्यवहार के माध्यम से दुष्प्रचार करती है ताकि चुनाव समाप्त होने तक मीडिया की सुर्खियों में अपना दबदबा बना सके। उन्होंने कहा कि चुनाव सम्पन्न होने तक भाजपा की यह ड्रामेबाजी जारी रहेगी। प्रदेश के लोगों का सच्चा हितैषी होने का दिखावा करने के बजाय अगर उनके पास राज्य के विकास के लिए कोई सकारात्मक सोच व दिशा है उसे सामने रखना चाहिए।

मंत्रियों और कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि भाजपा नेताओं को हाल ही में विभिन्न दुर्घटनाओं और आपदाओं में अपनी जान गवांने वालों के परिजनों के प्रति कोई संवेदना नहीं है और न ही वे यह चर्चा करना चाहते हैं कि प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान की जाए। यह मुख्यमंत्री ही हैं जिन्होंने कोटखाई के गुड़िया मामले में सीबीआई जांच के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। अब जबकि सीबीआई मामले की जांच कर रही है, भाजपा के कुछ ऐसे नेता, जिनकी अपनी ही पार्टी में कोई मान्यता नहीं है, केन्द्रीय जांच एजेंसी पर भी संदेह प्रकट कर रहे हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आग्रह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीबीआई को यहां भेजा है। लेकिन यह हैरानी की बात है कि वे न तो अपने नेता पर विश्वास रखते हैं और न ही उन्हें सीबीआई की कार्यप्रणाली पर भरोसा है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक शांतिप्रिय राज्य है जिसे गुजरात नहीं बनने दिया जाएगा। भाजपा ने हिमाचल की स्वच्छ राजनीति के वातावरण को इतना प्रदूषित किया है जैसा प्रदेश के इतिहास में कभी नहीं देखा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को अपने केन्द्रीय नेतृत्व की विफलताओं के बारे में चर्चा करनी चाहिए। आज देशभर में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें बहुत अधिक बढ़ गई हैं। इसी तरह घरेलू गैस सिलेंडरों, दालों व सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं। ऐसे हालात में आम आदमी का जीवन दूभर हो गया है, लेकिन प्रदेश भाजपा के नेता केन्द्र सरकार की विफलताओं से ध्यान बांटने के लिए विधानसभा में हो-हल्ला कर रहे हैं। इससे स्वयं स्पष्ट हो जाता है कि वे लोगों के कितने हितैषी हैं।

उन्होंने का कि जीएसटी लागू होने के बाद से ही उपभोक्ताओं व छोटे व्यापारियों के बीच भ्रम की स्थिति है। जीएसटी के अन्तर्गत दोहरी कर प्रणाली थोपी गई है। खरीद पर केन्द्रीय जीएसीटी और राज्य जीएसटी लगाए जाने से आम जनता भौचक्की है। वास्तव में भाजपा ने जिन अच्छे दिनों की आस जगाई थी उसकी वास्तविकता सामने आ गई है और गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक बदहाली का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रियों और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा को लोगों की भावनाओं व उनके कल्याण से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें केवल चुनाव में जीत के लिए सभी मर्यादाएं लांघ कर अपना उल्लू सीधा करना आता है।

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