प्रदेश में 70 से 90 प्रतिशत उपदान दरों पर उपलब्ध होंगी दवाईयां

प्रदेश में 70 से 90 प्रतिशत उपदान दरों पर उपलब्ध होंगी दवाईयां

  • मुख्यमंत्री व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने किया अमृत फार्मेसी का शुभारम्भ
  • आईजीएमसी में रखी सुपरस्पेस्लिटी ब्लॉक और कैंसर टर्शरी केन्द्र की आधारशिला

शिमला : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज यहां केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर के साथ अमृत के अन्तर्गत सस्ती दवाईयों की दुकान का आईजीएमसी परिसर में लोकार्पण किया। इससे प्रदेश के रोगियों को 70 से 90 प्रतिशत उपदान दरों पर दवाईयां उपलब्ध होंगी, जिससे ऐसे रोगियों को भारी राहत मिलेगी, जो कैंसर, हृदय रोग व अन्य बीमारियों के उपचार के लिए मंहगी दवाईयां खरीदने में असमर्थ हैं। इससे रोगियों को एक ही छत्त के नीचे सभी दवाईयां खरीदने की सुविधा उपलब्ध होगी और उन्हें अन्य दुकानों पर दवाईयां खरीदने के लिए नहीं जाना पड़ेगा।

शिमला से 15 अमृत औषधि केंद्रों का उद्घाटन कर इन्हें लोगों को समर्पित किया गया। इनमें से बारह असम में, दो उत्तर प्रदेश में और एक पंजाब में स्थापित किये गए है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत 2015 में Affordable Medicines and Reasonable Implants for Treatment (अमृत) औषधि केंद्रों को खोलने का निर्णय लिया गया था। जिनका उद्देश्य आम लोगों को सस्ते दामों पर दवाइयाँ उपलब्ध करवाना है।

इन 15 अमृत केंद्रों के साथ ही, आज शिमला के इंदिरा गाँधी मेडिकल कॉलेज में भी एक ऐसा ही केंद्र का उद्घाटन किया गया। अभी देश में चल रहे ऐसे अमृत केंद्रों की संख्या 84 है। आईजीएमसी में खोले गए अमृत केंद्र के साथ इनकी संख्या 100 पहुँच गई है। इन केंद्रों में मुख्यतः हृदय और कैंसर की मँहगी दवाए सस्ते में उपलब्ध करवाई जाएँगी। सरकारी कंपनी HLL को इन केंद्रों को स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। एक अनुमान के अनुसार अस्पताल के खर्च के अलावा लगभक 70 प्रतिशत खर्च दवाओं पर आता है।

इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बताया की भारत में बाजार के दवाब के कारण ज़रूरी दवाओं की निर्माण लागत और बाजार कीमतों में भारी अंतर है। दवाए ऊँचे एमआरपी पर बाज़ार में बेचीं जाती है। जिस वजह से आवशयक दवाए आम लोगों की पहुँच में कठनाई से आती है। सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए सीधे निर्माता से दवाएं खरीदकर, इन्हें सस्ते दामों पर आम लोगों तक पहुँचाने का निर्णय लिया है, जिसके लिए अमृत औषधि केंद्र खोले जा रहे है। इन केंद्रों को केवल राज्यों के मेडिकल कॉलेजो स्थापित किया जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार जगह मुहैया करवाती है। आगे चलकर इन केंद्रों को निज़ी जगहों पर भी विस्तार किया जायेगा। इन वजहों से दवाओं के दामों में भारी कटौती हुई है और इसका लाभ लोगों तक पहुँचाया जा रहा है।

उन्होंने बताया की अमृत केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध करवाने से इनके दामों में 57 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। इन केंद्रों के माध्यम से कैंसर से सम्बंधित 164 दवाए, हृदय की 191 और इसी प्रकार 5200 तरह की दवाए उपलब्ध करवाई जा रही है। इन अमृत केन्द्रों पर सारा कार्य इलेट्रॉनिक तरीके से ऑनलाइन किया जाता है। अब तक इन केन्द्रों पर आए 32 लाख 65 हज़ार प्रिस्क्रिप्शन पर 375 करोड़ रूपए की दवाए वितरित की जा चुकी है, जिसमें 170 करोड़ रूपए की बचत हुई, जिसका लाभ लोगों को दिया गया । अब तक 32 लाख मरीज इसका लाभ उठा चुके है। उन्होंने बताया की सरकार ने स्टेंट के बाद घुटने बदलने में काम आने वाले क्रोमियम-कोबाल्ट और टाइटेनियम के दामों में भी भारी कमी की है।

इसके साथ ही स्वास्थय मंत्री ने आईजीएमसी में एक सुपर स्पेशिलिटी ब्लॉक और कैंसर टर्शरी सेंटर का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने बताया की हमने देश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाए देने के लिए 84 सुपर स्पेशिलिटी ब्लॉक बनाने का निर्णय लिया है। हमारा ध्यान रोग के उपचार से अधिक उसके बचाव पर है। आईजीएमसी के सुपर स्पेशिलिटी ब्लॉक को अपग्रेड करते हुए इसका बजट 213 करोड़ रूपए कर दिया गया है। जिसमें कैमरे से लेस नौ मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और नेफ्रो, न्यूरो और प्लास्टिक सर्जरी के अतिरिक्त वार्ड स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने कहा की इसे दो वर्षों के भीतर बनाकर देने का प्रयास किया जायेगा। इनके लिए पहली किश्त जारी की जा चुकी है।

प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा की स्वास्थ्य सेवाओँ में हिमाचल अन्य राज्यों से बेहतर है। देश की एक-तिहाई दवा का निर्माण यहाँ होता है। हम राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र को और सुदृढ़ करने के प्रयास कर रहे है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट बढ़ाने पर केंद्र का आभार व्यक्त किया।

आईजीएमसी के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में प्रति वर्ष लगभग 5000 नए कैंसर मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें से 50 प्रतिशत आईजीएमसी में पंजीकृत होते हैं। लगभग 100 रोगियों की प्रतिदिन रेडियो थैरेपी होती है। इसके अतिरिक्त, 50 रोगी प्रतिदिन कीमोथैरेपी लेते हैं।

सांसद वीरेन्द्र कश्यप, मुख्य संसदीय सचिव स्वास्थ्य नन्द लाल, विधायक अनिरूद्ध सिंह व सुरेश भारद्धाज, महापौर कुसुम सदरेट, पूर्व मंत्री नरेन्द्र बरागटा, राजीव बिन्दल, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव नवदीप रेनवा, अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक पंकज रॉय, आईजीएमसी के प्रधानाचार्य डा. अशोक शर्मा, आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक रमेश चन्द के अतिरिक्त अन्य चिकित्सक भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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