‘हिमालयन पर्यटन सर्किट’ के लिए 100 करोड़ की परियोजना स्वीकृत

‘हिमालयन पर्यटन सर्किट’ के लिए 100 करोड़ की परियोजना स्वीकृत

  • रज्जू मार्गों के निर्माण के उपरांत हिमाचल धार्मिक व साहसिक पर्यटन के लिए वैश्विक स्तर पर पसंदीदा पर्यटक गंतव्य : सीएम
  • सैलानियों के लिए एकीकृत टाउनशिप की तरह का शहर भी किया जाएगा विकसित: दिनेश मल्होत्रा
  • राज्य के विभिन्न भागों में 25 सड़क-किनारे की सुविधाओं में से 17 विकसित, शेष का निर्माण कार्य प्रगति पर : फारका

 शिमला: ‘हिमालयन पर्यटन सर्किट’ के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे राज्य में पर्यटन से जुड़ी 14 परियोजनाओं को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह जानकारी हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड की आज यहां 9वीं बैठक में दी गई। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बैठक की अध्यक्षता की।

सर्किट के अन्तर्गत चिन्हित की गई परियोजनाओं में क्यारीघाट में सैलानियों को सभी प्रकार की सुविधाओं से युक्त 25 करोड़ रुपये की लागत का सम्मेलन केन्द्र,  संजौली-ढली वाईपास के समीप 7 करोड़ रुपये के हेलिपोर्ट का निर्माण कार्य, डल झील के सौंदर्यीकरण सहित कांगड़ा ‘विलेज हार्ट’ प्रत्येक के लिए चार करोड़ रुपये, तीन करोड़ रुपये की लागत से मनाली में अन्तर्राष्ट्रीय मापदण्डों पर ‘निःशुल्क क्लाईबिंग-स्टेंडिंग वॉल तथा सौरव कालिया वन विहार के लिए 3 करोड़ रुपये का प्रावधान व शिमला के सुन्नी में जलक्रीड़ा सुविधाओं को विकसित करना शामिल है।

शिमला के एक पहाड़ी पठार पर बनने वाले हेलिपोर्ट में इंडोर व आउटडोर निर्गमन के अलावा निजी हेलिकाप्टरों के उतरने की सुविधा भी होगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि रज्जू मार्गों के निर्माण के उपरांत हिमाचल प्रदेश धार्मिक तथा साहसिक पर्यटन के लिए वैश्विक स्तर का पसंदीदा पर्यटक गंतव्य होगा। उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन में नए आयाम जोड़े गए हैं, जो आने वाले समय में न केवल पर्यटन उद्योग की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करेंगे, बल्कि राज्य के लिए रोजगार व राजस्व सृजन के साधन भी होंगे।

बैठक में अवगत करवाया गया कि ‘बिल्ट-ऑपरेट-ट्रांसफर’ (बीओटी) आधार पर चार रज्जू मार्ग परियोजनाओं के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन परियोजनाओं में 150 करोड़ रुपये की धर्मशाला-मैकेलोड़गंज, 289 करोड़ रुपये की आदी-हिमानी-चामुंडा, 340 करोड़ रुपये की पलचान-रोहतांग तथा लगभग 94 करोड़ रुपये की भुंतर-बिजली-महादेव शामिल हैं, जो राज्य में साहसिक तथा धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करेगी।

मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि किन्नौर जिला को जोड़ते हुए सराहन से बशाल-कंडा रज्जू मार्ग परियोजना, भरमौर से भरमाणी माता, बिलासपुर में टोबा से श्री नैनादेवी जी तथा हमीरपुर में शाहतलाई से दियोटसिद्ध रज्जू मार्ग परियोजनाएं निविदा प्रक्रिया की अवस्था में है।

मुख्यमंत्री ने मण्डी के महामृत्युंजय मंदिर परिसर से होर्डिंग्स व पोस्टरों को हटाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पूर्व में अतिक्रमण को हटाया गया था और अब बड़े-बड़े पोस्टरों व होर्डिग्स से मंदिर परिसर घिरा हुआ है, जिन्हें तुरंत हटाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने बेंटनी कैसल के पुनरूद्वार व नवीनीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुराने भवन को राज्य के सभी जिलों का इतिहास व संस्कृति को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से संग्रहालय के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन सर्किट पर निर्मित 20 मिनट की फिल्म का भी शुभारम्भ किया, जिसमें साहसिक पर्यटन के साथ-साथ बौद्ध तथा धार्मिक सर्किट्स को भी दर्शाया गया है।

मुख्यमंत्री ने विश्राम गृह नैनादेवी से मंदिर तक सड़क के निर्माण की संभावना का पता लगाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री को पतली कूहल तथा मनाली के बीच पतली कूहल में बनने वाले सम्मेलन केन्द की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस केन्न्द्र में नौ छेद (होल) गोल्फ कोर्स के अलावा एम्फीथियेटर, फूड कोर्टस, बाजार इत्यादि सुविधाएं होंगी।

हि.प्र. पर्यटन विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक दिनेश मल्होत्रा ने कहा कि सैलानियों के लिए एकीकृत टाउनशिप की तरह का शहर भी विकसित किया जाएगा। उन्होंने विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं पर प्रस्तुतियां भी दी, जिनमें मण्डी में पुराने विक्टोरिया पुल में रोशनी की सुविधा, रिज़ स्थित चर्च का नवीनीकरण, रामपुर के प्राचीन मंदिरों का नवीनीकरण तथा विभिन्न निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं का सौंदर्यीकरण एवं भूदृश्य निर्माण शामिल हैं।

मुख्य सचिव वी.सी. फारका ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अनुरूप चम्बा के भलेई माता मंदिर में लिफ्ट के लिए 40 लाख रुपये की राशि, किन्नौर जिला के कल्पा में नारायण-नागिन मंदिर के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये, स्पीलो में पार्किंग के लिए 48 लाख रुपये तथा शिमला जिला के सरपाड़ा में नाऊ-नाग झील के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 25 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि पार्किंग, मंदिरों के सौंदर्यीकरण तथा सार्वजनिक स्थलों, पार्कों इत्यादि अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं के विकास के लिए 14 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न भागों में 25 सड़क-किनारे की सुविधाओं में से 17 को विकसित किया जा चुका है, और शेष का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

बैठक में गैर सरकारी सदस्यों से भी सुझाव आए। उन्होंने पर्यटन विभाग द्वारा हाल ही में राष्ट्रीय तथा उच्च मार्गों पर सैलानियों के लिए सुविधाओं के सृजन की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की।

शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, मुख्य संसदीय सचिव मनसा राम, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा, डॉ. श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव ओंकार शर्मा व अनुराधा ठाकुर सहित सरकारी व गैर सरकारी सदस्य भी बैठक में उपस्थित थे।

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