आरसीईपी में शामिल न होने का मोदी सरकार का फ़ैसला देश के किसानों, नौजवानों और एमएसएमई के हक़ में : अनुराग ठाकुर

अनुराग ने मुख्यमंत्री को हेल्थ फंड का समुचित उपयोग न करने पर लिखी पाती

  • भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में ये बताया है कि हिमाचल प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ और जन्म की संख्या लगतार घट रही है

शिमला:  हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को सीएजी के रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ मिशन मार्च 2016 के अनुसार बच्चों के स्वास्थ और उनकी जन्मसंख्या में आ रही कमी के मद्देनजर एक पत्र लिखा है। इस पत्र में अनुराग ठाकुर ने लिखा है कि सीएजी के रिपोर्ट राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ मिशन मार्च 2016 के अनुसार बच्चों के स्वास्थ और उनकी जन्मसंख्या में आ रही कमी के लिए राज्य स्वास्थ विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही इसका मुख्य कारण है।

हिमाचल प्रदेश को 538 कामों के लिए 139.81 करोड़ रुपए मिले थे जिस से ना तो काम पूरा हुआ और ना ही पैसे वापस आए। जिनमें से 48 काम जिनकी लागत 18.25 करोड़ थी वो अभी तक लंबित हैं, और 22 काम जिनकी लागत 12.47 करोड़ है वो पिछले 3 सालों से रुके हुए हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने फंड के 19 करोड़ रुपए रोके हुए हैं। हिमाचल प्रदेश में कोई भी मोबाइल मेडिकल यूनिट नहीं है साथ ही कई पब्लिक हेल्थ सेंटर बिना डॉक्टर के काम कर रहे हैं। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के मुताबिक कई पब्लिक हेल्थ सेंटर में जरूरत से ज्यादा डॉक्टर हैं। ग्रामीण स्वास्थ संखियकी मंत्रालय के अनुसार स्वास्थ एवं परिवार कल्याण के अंतर्गत 305 फिजिशियन सर्जन और शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी है। प्राथमिक स्वास्थ केंद्रो में  ब्लॉक एक्सटेंशन एजुकेटर के 87 पद खाली हैं।

इसके अलवा और कई जरूरी उपकरण डॉक्टर और प्रशिक्षित लोगों की कमी की वजह से खराब हो रहे हैं। आशा किट की अनउपलब्धता और दवाकिट के बदलाव में देरी भी पाई गई है। साथ ही फॉलिक एसिड गोली की भी कमी है। जिस समय पूरा देश डिजिटलाइजेशन और पारदर्शिता की ओर आगे बढ़ रहा है  हिमाचल प्रदेश में कम्प्यूटराइजेशन और रिकॉर्ड को डिजिटल करने की सुविधा भी नहीं है। हिमाचल प्रदेश में ये जरूरी है क्योंकि 1000 जीवित बच्चों में 35 भ्रूण हत्या के केस सामने आते हैं।क्या 21वीं सदी में ये मौतें जायज हैं। हिमाचल प्रदेश में टीबी के 85591 सम्भावित केस प्रति 1 लाख के 34 प्रतिशत हैं। सूचना और जन संचार विभाग ने वेबसाइट पर लिखा है कि हिमाचल मे 4196 लोग मधुमेह के रोगी हैं जिनमें 50 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से है।

इस सिचुएशन में और बंह की रिपोर्ट देखने के बाद मैं आपसे निवेदन करता हूं कि स्वास्थ्य संबंधी विभागों में कमियों को दूर करें और राज्य को स्वस्थ्य और खुश बनाए। आखिर में उन्होने कहा कि मेरा केवल एक ही डर है कि मुख्यमंत्री राज्य और लोगों के विकास को लेकर ज्यादा सजग नहीं हैए लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि इस ओर ध्यान दिया जाएगा।

 

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