“मन की बात” में प्रधानमंत्री मोदी ने हमीरपुर के भोरंज किसानों की सराहना

“मन की बात” में प्रधानमंत्री मोदी ने दिया अगले पांच साल का एजेंडा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में रविवार को देश को संबोधित करते हुए 2017 से 2022 तक का एजेंडा दिया। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा, “भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ पर गंदगी, गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद, संप्रदायवाद को छोड़ने का संकल्प लें।

इसके अलावा पीएम मोदी ने देश के कई इलाकों में आए भीषण बाढ़ पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश में जब यह प्राकृतिक आपदा आती है तो कई एजेंसियां और स्वयंसेवी संगठन इस संकट को दूर करने में अपना योगदान देते हैं। मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि बाढ़ के दौरान सरकारी एंजेसियां, भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, अर्ध-सैन्य बल सहित हर कोई आपदा पीड़ितों की मदद में जी-जान से जुट जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ से किसान सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए उनकी सरकार किसानों को और फसलों को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई के लिए बीमा के माध्यम से किसानों को जल्द मुआवजा दिलाने का प्रयास कर रही है। पीएम मोदी ने कहा, हालांकि, टेकनॉलिजी के बेहतर होने की वजह से अब मौसम की अधिक सटीकता के साथ भविष्यवाणी की जा सकती है।

उन्होंने कहा मनुष्य का मन ही ऐसा है कि वर्षाकाल मन के लिये बड़ा लुभावना काल होता है। पशु, पक्षी, पौधे, प्रकृति – हर कोई वर्षा के आगमन पर प्रफुल्लित हो जाते हैं। लेकिन कभी-कभी वर्षा जब विकराल रूप लेती है, तब पता चलता है कि पानी की विनाश करने की भी कितनी बड़ी ताक़त होती है। प्रकृति हमें जीवन देती है, हमें पालती है, लेकिन कभी-कभी बाढ़, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदायें, उसका भीषण स्वरूप, बहुत विनाश कर देता है। बदलते हुए मौसम-चक्र और पर्यावरण में जो बदलाव आ रहा है, उसका बड़ा ही negative impact भी हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से भारत के कुछ हिस्सों में विशेषकर असम, North-East, गुजरात, राजस्थान, बंगाल के कुछ हिस्से, अति-वर्षा के कारण प्राकृतिक आपदा झेलनी पड़ी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पूरी monitoring हो रही है। व्यापक स्तर पर राहत कार्य किए जा रहे हैं। जहाँ हो सके, वहाँ मंत्रिपरिषद के मेरे साथी भी पहुँच रहे हैं। राज्य सरकारें भी अपने-अपने तरीक़े से बाढ़ पीड़ितों को मदद करने के लिए भरसक प्रयास कर रही हैं। सामाजिक संगठन भी, सांस्कृतिक संगठन भी, सेवा-भाव से काम करने वाले नागरिक भी, ऐसी परिस्थिति में लोगों को मदद पहुँचाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। भारत सरकार की तरफ़ से, सेना के जवान हों, वायु सेना के लोग हों, NDRF के लोग हों, paramilitary forces हों, हर कोई ऐसे समय आपदा पीड़ितों की सेवा करने में जी-जान से जुड़ जाते हैं। बाढ़ से जन-जीवन काफी अस्त-व्यस्त हो जाता है। फसलों, पशुधन, infrastructure, roads, electricity, communication links सब कुछ प्रभावित हो जाता है। खास कर के हमारे किसान भाइयों को, फ़सलों को, खेतों को जो नुकसान होता है, तो इन दिनों तो हमने insurance कंपनियों को और विशेष करके crop insurance कंपनियों को भी proactive होने के लिये योजना बनाई है, ताकि किसानों के claim settlement तुरंत हो सकें। और बाढ़ की परिस्थिति को निपटने के लिये 24×7 control room helpline number 1078 लगातार काम कर रहा है। लोग अपनी कठिनाइयाँ बताते भी हैं। वर्षा ऋतु के पूर्व अधिकतम स्थानों पर mock drill करके पूरे सरकारी तंत्र को तैयार किया गया। NDRF की टीमें लगाई गईं। स्थान-स्थान पर आपदा-मित्र बनाना और आपदा-मित्र के do’s & don’ts की training करना, volunteers तय करना, एक जन-संगठन खड़ा कर-करके ऐसी परिस्थिति में काम करना। इन दिनों मौसम का जो पूर्वानुमान मिलता है, अब technology इतनी आगे बढ़ी है, space science का भी बहुत बड़ा role रहा है, उसके कारण क़रीब-क़रीब अनुमान सही निकलते हैं। धीरे-धीरे हम लोग भी स्वभाव बनाएँ कि मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अपने कार्यकलापों की भी रचना कर सकते हैं, तो उससे हम नुकसान से बच सकते हैं।

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