जैव प्रौद्योगिकी पर एक दिवसीय कार्यशाला, 60 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

जैव प्रौद्योगिकी पर एक दिवसीय कार्यशाला, 60 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

  • विभिन्न विश्वविद्यालयों, विभागों और अनुसंधान संस्थानों के 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया
  • कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रयास करना
  •  : ताकि प्रदेश की अपार जैव सम्पदा का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग सुनिश्चित कर विकास को और गति प्रदान की जा सके

शिमला: हिमाचल प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषकर जैव संसाधनों पर आधारित उद्योगों की अपार सम्भावनाएं हैं और इसके माध्यम से गा्रमीण क्षेत्रों में आजिविका अर्जन को भी बढावा मिलेगा यह बात अतिरिक्त मुख्य सचिव तरूण कपूर ने पर्यावरण, विज्ञान व प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा जैव प्रोद्यौगिकी विषय पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि राज्य की जैव प्रोद्यौगिकी नीति से बायो बिजनेस और बायो टैक्नाॅलीजी के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण विभाग तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता के साथ कार्य किया जा रहा हैं और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

उन्होंने विषय विशेषज्ञों से आग्रह किया कि प्रदेश में जैव प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में और अधिक कार्य सुनिश्चित करने के लिए वह अपने प्रस्ताव व शोधकार्य भी सरकार को प्रस्तुत करे ताकि इस दिशा में और अधिक सकारात्मक प्रयास  किए जा सके। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी प्रदेश के औषधीय पौधों, दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणी, प्रदुषण रहित स्वच्छ वातावरण को सहजने में अत्यंत सहायक है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के किसानों, बागवानों को जागरूक करने के लिए सम्बन्धित विषय विशेषज्ञों व विभाग से भरपूर सहयोग देने की अपील की। डा.तिलक राज शर्मा, ई.डी एनएबीआई, मोहाली ने प्रदेश में बायो प्रोैद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में हितधारकों को इकटठे होकर कार्य करना चाहिए ताकि जैव प्रौेद्योगिकी को वाणिज्य स्तर पर प्रोत्साहित किया जा सके।  निदेशक पर्यावरण, विज्ञान व प्रौद्योगिकी अर्चना शर्मा ने कहा कि अनुसंधान क्षेत्र में कार्यरत सभी संस्थानों को विभाग द्वारा हर सम्भव मदद प्रदान की जाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश, तरूण कपूर ने ‘बायोटैक्नालिजी इन हिमाचल प्रदेश’ पुस्तक का विमोचन भी किया।

इस कार्यशाला में विभिन्न विश्वविद्यालयों, विभागों और अनुसंधान संस्थानों के 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए प्रयास करना है ताकि प्रदेश की अपार जैव सम्पदा का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग सुनिश्चित कर विकास को और गति प्रदान की जा सके।

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