अपनी गरिमा का अस्तित्व गंवाती देवभूमि हिमाचल

अपनी गरिमा का अस्तित्व गंवाती देवभूमि हिमाचल

  • कोई बचा ले आकर उसे, उसके आंसू पुकारते रहे होंगे—–
  • चार आरोपी गिरफ्तार, इनमें से तीन आरोपी हलैला गांव के

 “मासूम खुद को बचाने की खातिर छटपटाती रही होगी, दरिंदों की हैवानियत उसे अपना शिकार बनाती रही होगी।।

कोई बचा ले आकर उसे, उसके आंसू पुकारते रहे होंगे। लूटी अस्मत से मासूम जिदंगी की भीख हैवानों से मांगती रही होगी।।”

चौतरफा दबाव में घिरी सरकार ने किया मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन

चौतरफा दबाव में घिरी सरकार ने किया मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन

हिमाचल को शांतिप्रिय, अपनेपन, स्नेहशीलता, संस्कारों की गरिमा को कायम रखने वाला प्रदेश से जाना जाता है। लेकिन आज प्रदेश की ये गरिमा अपने अस्तित्व को खोती नजर आ रही है। आए दिन दिल को दहला देने वाली ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जिन्होंने सबको झकझोर कर रख दिया है। अपने घर में बेटियां, बहुएं सुरक्षित नहीं। ईमानदारी से काम करने वाले आदमी की ईमानदारी मौत बनकर उसकी ईमानदारी का ईनाम दे रही है। लोग सडक़ों पर उतरते हैं, प्रदर्शन होता है, सोशल साईट्स में बढ़ा-चढ़ाकर घटनाओं पर अपने-अपने विचार लोग रखते हैं। राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करती हैं। प्रशासन अपने आपको सजगता से कार्य करने का दावा करता है फिर क्या—फिर दूसरी घटना का इंतजार—फिर सब वही तमाशा। हाल ही में हुई शिमला के कोटखाई में मासूम छात्रा से दरिंदगी और हत्या के मामले ने प्रदेश के कानून व्यवस्था पर कई सवालिया निशान खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि घटना के चार घंटे बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और अन्य लोग पहले से ही वहां पहुंच चुके थे। घटनास्थल पर देर से आना पुलिस के लिए अब तक मुश्किल का सबब बना हुआ है क्योंकि इस घटना के 5 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं।

  • वो बड़े-बड़े दरख्त और सुनसान जंगल मासूम की मौत का गुनाहगार कहीं न कहीं खुद को भी महसूस कर रहे होंगे

अपराधी अभी तक पुलिस की पहुंच से इतनी दूर हैं कि उनका कोई सुराग तक नहीं लग पा रहा। गुडिय़ा की चीखें, दर्द, छटपटाहट, आंसू सब उसके साथ ही जंगल में दफन हो गए। वो बड़े-बड़े दरख्त और सुनसान जंगल जो उसके दर्द के गवाह हैं आज बेबसी से उस मासूम की मौत का गुनाहगार खुद को भी कहीं न कहीं महसूस कर रहे होंगे। क्योंकि वो उस वक्त के गवाह हैं जो उस घड़ी उस बच्ची के साथ हुई। लेकिन अफसोस वो ऐसेे गवाह हैं जो बोल नहीं सकते।

चुनावों के समय सप्ताह भर पहले अगर ऐसी घटना घटती तो मेरे ख्याल से बड़े-बड़े राजनीतिक दल के नेताओं की पीडि़त परिवार के घर पर कतार लग जाती। लेकिन दुख की बात तो यह है कि घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी सहानुभूति तो सभी जता रहे हैं परन्तु राजनीति दल का कोई भी बड़ा नेता पीडि़त परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। भाजपा के नेता नरेंद्र बरागटा के अलावा किसी ने भी पीडि़त परिवार से मिलने की ज़हमत नहीं उठाई।

  • गांव के बच्चे पढ़ाई के लिए जान का जोखिम, आबरू को दाव पर रखकर पहुंचते हैं स्कूल

यूं तो शहरों में हर मोड़ पर स्कूलों की भरमार है प्राईवेट और सरकारी अनगिनत। लेकिन गांव की तरफ जाएं तो दूर-दूर गुडिय़ा जैसे बच्चों को 3-4 घंटे के बाद स्कूल में शिक्षा प्राप्त होती है। पढ़ाई के लिए जान का जोखिम, आबरू को दाव पर रखकर बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। जंगल के जंगली जानवरों से ज्यादा तो आदमी का खतरा बच्चों पर बढ़ गया है। राजनीतिक पार्टियां अपनी रोटियां सेकने के लिए हमेशा आगे रहती हैं लेकिन ऐसे कामों पर ध्यान देने के बजाए एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त रहते हैं। हो सकता है अब मीडिया में ऐसी खबरों के चलते प्रदेश के नेता जागे।

आरोपी का सुराग न मिलने से लोगों में भारी आक्रोश

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  • मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने दरिंदों की सूचना देने पर की 1-1 लाख रूपए ईनाम देने की घोषणा

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने घटना के पांचवें दिन दरिंदों की सूचना देने पर 1 लाख रूपए ईनाम देने की घोषणा की तथा घटना के चार दिन बाद पीडि़त परिवार को 5 लाख के मुआवजे की भी घोषणा की है। वहीं प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने कहा कि छात्रा के साथ दरिंदगी करने वालों का सुराग देने वालों को वह अपनी ओर से एक लाख रूपए का नकद ईनाम देंगे। उधर रतनाड़ी पंचायत के प्रधान ज्ञान ठाकुर ने कहा कि गुडिय़ा के हत्यारों की सूचना देने वाले को दस हजार रूपए ईनाम दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि घटना ने झकझोर दिया है। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। राजनीतिक नेता राजनीतिक रोटियां सेंकने की बजाए बेहतर है इस वक्त पीडि़त परिवार के साथ सब एक साथ खड़े हों और प्रदेश में फिर इस तरह की कोई घटना न हो। इसके लिए राजनीतिक दल पूरे प्रदेश की जनता को साथ लेकर अपनी अहम भूमिका निभाएं। ताकि लोगों को भी एहसास हो कि वाकये ही प्रदेश के राजनीतिक दल प्रदेश हित के खोखले दावे लेकर ही जनता के बीच नहीं आते बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए भी काम करते हैं।

प्रशासन अपने स्तर पर काम कर रहा है, राजनीतिक पार्टियां अपना-अपना बखान कर रही हैं, जनता सडक़ों पर उतर आई, सोशल साईटस पर प्रतिक्रियाएं दे रहे लोग

मासूम बच्ची की दरिंदों ने दुराचार के बाद निर्मम हत्या कर दी। बच्ची की तड़प, खुद को बचाने की कोशिश में छटपटाहट जंगल में ही दफन हो गई। स्कूल से घर आते वक्त उस बच्ची को क्या मालूम था कि वो आज के बाद कभी स्कूल नहीं जाएगी। उसे क्या पता था कि जिंदगी में ऐसी मौत आएगी कि जो भी सुनेगा उसके रौंगटे खड़े हो जाएंगे। इसमें दोष किसका है? हमारी कार्यप्रणाली का या उस मासूम का जो जानती भी नहीं थी और अब कभी भी जान नहीं पाएगी, उसके साथ ये सब क्यों हुआ? खैर प्रशासन अपने स्तर पर काम कर रहा है, राजनीतिक पार्टियां अपना-अपना बखान कर रही हैं, जनता सडक़ों पर उतर आई। सोशल साईटस पर लोग घटना पर अपनी प्रतिक्रियाएं लगातार दे रहे हैं। —और मां-बाप, भाई-बहन के आंसू व दर्द का क्या? बेटी, बहन तो अब उनकी कभी वापस नहीं आएगी। लेकिन उसका इस तरह से जाना भी उसके परिवार वालों को चैन से जीने नहीं देगा।

  • सुरक्षा की दृष्टि से सबसे सुरक्षित समझा जाता था हिमाचल

प्रदेश में आए दिन वारदातें बढ़ रही हैं। सुरक्षा की दृष्टि से हिमाचल को सबसे सुरक्षित समझा जाता था लेकिन कुछ समय से ऐसी घटनाएं प्रदेश में हो रही हैं कि प्रशासन की कार्यप्रणाली के साथ-साथ हमारे आसपास के लोगों पर भी हमारा विश्वास डगमगाने लगा है। कुछ समय पहले चार साल के मासूम बच्चे युग की मौत ने सबको हिला दिया था। फिर मंडी के फॉरेस्ट गॉर्ड होशियार सिंह की मौत का मामला, फिर टुटू के समीप महिला की मौत की घटना और अब मासूम गुडिय़ा की दरिंदों दवारा दुराचार के बाद निर्मम हत्या ने तो झकझोर कर ही रख दिया। मासूम लौटकर आ नहीं सकती। लेकिन उसे न्याय मिलना चाहिए। प्रदेश की जनता को एकजुट होकर उस बच्ची को न्याय दिलाना होगा। सडक़ों पर 2 दिन, 4 दिन उतर कर न्याय नहीं मिल सकता। इस लड़ाई को तब तक जारी रखना होगा जब तक अपराधियों को पकडक़र उन्हें फांसी पर लटकाया नहीं जाता। राजनीतिक दलों को अपनी राजनीति से हटकर इस बेटी को न्याय दिलाने के लिए कानून को मजबूत और सख्त नियमों के साथ और कड़ा बनाना होगा।

  • अपराधों को जड़ से खत्म करने की मुहिम
जनता के भारी आक्रोश के चलते मुख्यमंत्री ने गुड़िया मर्डर केस मामले को सीबीआई को सौंपने का लिया निर्णय

जनता के भारी आक्रोश के चलते मुख्यमंत्री ने गुड़िया मर्डर केस मामले को सीबीआई को सौंपने का लिया निर्णय

प्रशासन को कोशिश के आधार पर नहीं बल्कि अपनी कार्यवाही के आधार पर जल्द से जल्द दरिदों को जनता के सामने ला खड़ा करना होगा। सोशल साइट्स, वॉटस एप्प, फेसबुक पर सबके विचारों के साथ हमें एक साथ मिलकर अपनी राय देने के बजाए इन अपराधों को जड़ से खत्म करने की मुहिम छेडऩी चाहिए। यह खाली एक के प्रयास से नहीं बल्कि हम सबके प्रयास से संभव है। सरकार, प्रशासन, राजनीतिक दल और आम आदमी जब एकजुट होकर ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम और एक साथ मिलकर चलेंगे तो ही ऐसी घटनाएं खत्म हो पाएंगी। अन्यथा तो ये वो आग है जो बढ़ती ही जाएगी और एक दिन क्या तेरा, क्या मेरा एक दिन सबका घर जलाएगी।

“प्रदेश के मासूस बच्चे दरिंदगी का शिकार हो रहे हैं।

बहु, बेटियों की इज्जत तार-तार हो रही है।।

ईमानदारी से काम करना मौत से बदतर हो गया है।

ये मेरा प्रदेश क्या से क्या हो गया है।।”

 

  • मुख्यमंत्री के डीजीपी को आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश
  • नड्डा ने कही केस को सीबीआई को सौंपने की बात

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कोटखाई के बहुचर्चित मर्डर केस में डीजीपी सोमेश गोयल को आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जघन्य अपराध के आरोपियों के साथ किसी भी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। तो वहीं केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस केस को सीबीआई को सौंपने की बात कही। वहीं सामाजिक संगठन मदद सेवा ट्रस्ट के बैनर तले को राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मिले। मुलाकात के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए और उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हाल में जितने भी मामले हुए हैं उनमें किसी भी मामले को पुलिस सही ढंग से नहीं खोल सकी है। ऐसे में मामले की जांच उच्च स्तरीय एजेंसी से कराई जाए। राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि मामले में मुख्यमंत्री से वार्ता कर वह जरूरी कार्रवाई के लिए कहेंगे।

जनता के भारी आक्रोश के चलते मुख्यमंत्री ने गुड़िया मर्डर केस मामले को सीबीआई को सौंपने का लिया निर्णय।

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One Response

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  1. सुरेन्द्र मोहन शर्मा
    Jul 13, 2017 - 06:26 PM

    आज के दौर में पत्रकारिता पूरी तरह राजनीति की गिरफ्त में है….
    आप इससे बचे रहेंगे तो मिशन को शिखर पर ले जाने में सफल होंगे…
    लेकिन शिखर पर बने रहने के लिए अहम से दूरी बनाए रखना…
    ………..भविष्य के लिए शुभकामनाएं…..

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