मात्र उस तरह से अध्यापन करना जैसा कि पाठ्यपुस्तक में लिखा है पर्याप्त नहीं : डॉ. कौल

मात्र उस तरह से अध्यापन करना जैसा कि पाठ्यपुस्तक में लिखा है पर्याप्त नहीं : डॉ. कौल

  • परियोजना आधारित और अवधारणा आधारित दोनों शिक्षण को अपनाया जाना चाहिए
  • विज्ञान शिक्षकों के लिए अभिनव अनुसंधान परियोजना और वैज्ञानिक रिपोर्टिंग के निर्माण पर कार्यशाला आयोजित

शिमला: विज्ञान शिक्षकों के लिए एक दिवसीय अभिविन्यास (orientation) कार्यशाला का आयोजन प्राथमिक शिक्षा निदेशालय लालपानी शिमला में किया गया। यह कार्यशाला सोलन और सिरमौर जिले के विज्ञान शिक्षकों के लिए आयोजित की गई। यह कार्यशाला लर्निंग लिंक फाउंडेशन (एलएलएफ) और स्टेट काउंसिल फॉर साइंस, टेक्नोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (एससीएसटीई), शिमला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।

यह कार्यशाला विज्ञान शिक्षकों के लिए राज्य में पहली बार विशेष रूप से आयोजित की गयी। इस कार्यशाला द्वारा शिक्षक नए नवाचार ( Innovative) विज्ञान परियोजनाओं और वैज्ञानिक रिपोर्ट लेखन के विकास में छात्रों के मार्गदर्शन करने में सक्षम होंगे। शिक्षक विज्ञान में अनुसंधान और नवाचार (आईआरआईएस) के लिए भी छात्रों का मार्गदर्शन करेंगे। यह छात्रों को वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की संभावनाओं का पता लगाने के लिए छात्रों को एक अनूठा मंच प्रदान करता है। इसके अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण और खोजी शिक्षा को बढ़ावा देना तथा  नए विचारों का पता लगाना जो हमारे चारों ओर दुनिया को बदल सकते हैं।

इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. मोनिका कौल ने कहा कि मात्र उस तरह से अध्यापन करना जैसा कि पाठ्यपुस्तक में लिखा है पर्याप्त नहीं है। अध्यापकों को उस परिप्रेक्ष्य को कक्षाओं में लाना पड़ेगा जो कि आजकल उनमें मौजूद नहीं है। शिक्षण में एक समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है, जिसमें दोनों परियोजना आधारित और अवधारणा आधारित शिक्षण को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को नवाचार करने के लिए उन्हें अपने संबंधित क्षेत्रों के प्रश्नों और परियोजनाओं को पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि उनको वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करने में मदद मिलेगी।

दूसरे सत्र में लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन नई दिल्ली की डा. उषा भास्कर  ने प्रतिभागियों को छात्रों और अध्यापकों की परस्पर प्रश्नोत्तर पर आधारित शिक्षा पद्धति’ को समझाया। इस कार्यशाला में विभिन्न विद्यालयों से आये 60-70 प्रतिभागियों, डाईट और विज्ञान पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी शुभ्रा बैनर्जी, और एससीएसटीई शशि धर शर्मा भी कार्यशाला में विशेषज्ञों के रूप में उपस्थित थे और उन्होंने भी योग्य मार्गदर्शन प्रदान किए।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *