पूर्व मेयर-डिप्टी मेयर की मेहनत लाई रंग

गिरी पेयजल योजना को बनाने में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार, जांच में बरती कोताही तो जाएंगे हाईकोर्ट : माकपा

शिमला: मार्क्सवादी पार्टी गिरी पेयजल योजना में हुई अनियामिततायों को लेकर एफआईआर दर्ज करने पर हिमाचल सतर्कता विभाग के कदम का स्वागत करती है। यह बात आज शिमला के पूर्व मेयर संजय चौहान और पूर्व डिप्टी मेयर टिकेन्द्र पंवर ने प्रेसवार्ता के दौरान कही।

चौहान और पंवर ने कहा कि इस परियोजना की क्षमता 20 एमएलडी यानि 2 करोड़ लिटर प्रतिदिन की है और इससे केवल मात्र 8 एमएलडी पानी ही आ रहा था। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को अपने अधीन लेने के बाद नगर निगम ने केवल 4 करोड़ रुपए लगाए और इससे पानी अब पूरी क्षमता से आ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आईपीएच के पास यह परियोजना थी तो इसकी कैसी रिपेयर की गई और इतनी भारी राशि खर्च करने पर सरकार और विभाग के उच्च पदों पर बैठे अफसरों ने सवाल क्यों नहीं उठाए।

संजय चौहान और टिकेंद्र पंवर ने कहा कि इस योजना का कार्य हिमाचल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया था। सीपीईएम के महापौर और उप महापौर के कार्यकाल में गत जुलाई 2016 में इस योजना को नगर निगम के सुपुर्द किया गया।  परंतु जब हमने मार्च 2016 में उपरोक्त योजनाओं का दौरा किया तो बड़े पैमाने पर ये सारी अनियमितताएं, जिसमें योजना में उपयोग की गई घटिया और अमानक सामग्री (पाइप्स) और विभाग व ठेकेदार के मध्य मिलीभगत का मामला सामने आया। इसी को देखते हुए इस मामले पर एफआईआर दर्ज की गयी। उन्होंने कहा कि इसमें प्रदेश की दोनों राजनैतिक पार्टी कांग्रेस और भाजपा के कुछ नेताओं की भी मिलीभगत है। इसका सीधा सा कारण है कि जब इस योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा था तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और योजना को चलने के वक़्त हिमाचल में भाजपा की सरकार रही। उन्होंने कहा कि योजना के दौरे के दौरान इस बात की पुष्टि हो चुकी थी कि योजना को बनाने में बहुत बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ। हिमाचल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाई गई अब तक की ये सबसे खराब परियोजना साबित हुई है।

दौरे के दौरान स्थानीय लोगों और वर्कर्स से बातचीत में ये सामने आ चुका था कि योजना के चालू होने के शुरूआती दिनों में ही घटिया पाइप्स ब्लास्ट हो चुकी थी और तब से ठेकेदार और विभाग का ये गठबंधन इसी को बार-बार मुरम्मत कर भारी भरकम बिल बनाता रहा। लेकिन सरकार इसमें बचाव करने की मुद्रा में आई और ये इसलिए हुआ क्यों की इसमें कहीं न कहीं दोनों ही दोषी थे। इसमें ठेकेदार और सरकार में बैठे कुछ लोगों की मिलीभगत साफ जाहिर हो रही है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के ख़राब प्रबंधन से शिमला शहर और इसके निवासियों को करीब 75 करोड़ का नुक्सान हुआ जबकि मात्र 4 करोड़ से इसे ठीक कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कोई अकेला मामला नहीं है ऐसा पूरे प्रदेश स्तर पर हैआज राज्य में 35 सौ से अधिक स्कीमें लिफ्ट वाली हैं और इसमें भी मेंटेनेंस के नाम पर भारी भ्रष्टाचार हो रहा है और अब माकपा इस मामले को हर स्तर पर उठाएगी और इसकी असलियत सामने लाएगी। माकपा ने उम्मीद जताई है कि शिमला इस बार स्मार्ट सिटी में जरूर शामिल होगा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार को समझौते से नहीं कठोरता से निपटाया जाना चाहिएगिरी नदी पेयजल योजना की जांच में अगर किसी प्रकार की कोताही बरती गई और या इसकी जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई तो माकपा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

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