126 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में बंद, 57.8 फीसदी हुआ मतदान

126 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में बंद, 57.8 फीसदी हुआ मतदान

  • कल होगा सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला
  • कम मतदान होने से दिग्गजों की बढ़ीं उलझनें, तेज बारिश और ओलावृष्टि भी रहा मुख्य कारण

शिमला : शिमला नगर निगम चुनावों को लेकर जहां काफी दिनों से 34 वार्डों में माहौल मेले जैसे था वहीं चर्चाओं का माहौल भी काफी गर्माया रहा। भाजपा, कांग्रेस और माकपा के दिग्गज नेताओं ने नगर निगम चुनावों को लेकर कमान अपने हाथों में ली हुई थी। अपने पार्टी प्रत्याशियों के लिए सभी नेताओं ने खूब प्रचार किया। वैसे भी इन चुनावों में तीनों पार्टियों के दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है। क्योंकि इन्हीं चुनावों से आने वाले विधानसभा चुनावों में भी असर देखने को मिलेगा। लेकिन इस बार कम मतदान होने से दिग्गजों की उलझन काफी बढ़ा दी है।

नगर निगम शिमला के 34 वार्डों के लिए मतदान आज सुबह 9 बजे से शुरू हुआ और शाम 4 बजे संपन्न हो गया। इस बार मतदान पहले की अपेक्षा कम रहा। इस बार जहां 57.8 फीसदी के करीब मतदान हुआ लेकिन साल 2012 में 65 फीसदी मतदान हुआ था। तो वहीं साल 2007 में नगर निगम चुनाव में 56 फीसदी मतदान हुआ था।

इस बार कम मतदान की मुख्य वजह दोपहर बाद तेज बारिश रही, तो वहीं कहीं न कहीं कुछ मतदाताओं का इस बार ज्यादा रूझान मतदान की ओर नहीं रहा। साथ ही काफी लोग बिना पहचान पत्र के मतदान करने पहुंचे, जहां बिना पहचान पत्र के उन्हें मतदान नहीं करने दिया गया। मतदान करने वाले कई लोगों के नाम मतदाता सूचियों से ही गायब पाए गए। कई मतदाता मतदान केंद्रों में पहुंचकर सूचियां खंगालते रहे लेकिन नाम नहीं मिला। इन सब वजहों के चलते इस बार मतदान में कहीं न कहीं काफी गिरावट आई। दोपहर बाद तेज बारिश होने से भी काफी लोग मतदान करने ही नहीं पहुंचे।  सुबह के समय मतदान की रफ्तार भी धीमी रही। हालांकि दोपहर के समय जैसे ही मतदाताओं की रफ्तार में तेजी आनी शुरू हुई तो अचानक तेज बारिश और ओलावृष्टि होने के कारण मतदान के लिए बाहर लगाए पोलिंग बूथों को छोड़ कर मतदाता और कर्मचारी भाग गए।

निगम के 34 वार्डों के लिए 126 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम मशीन में आज बंद हो गया। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि बाजी किसके हाथ लगती है। कल मतगणना के साथ सभी प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। परिणाम आने तक सभी प्रत्याशियों और दिग्गज नेताओं की धुकधुकी बढ़ना भी जायज है। लेकिन उस सबसे ज्यादा दिक्कत तो ये है कि इस बार चुनावी रणनीति खुद नेताओं के लिए भी एक पहेली बन गयी है।

 

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *