कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की सराहना : अनुराग ठाकुर

प्रदेश में माफिया का आतंक, वन कर्मी ही सुरक्षित नहीं तो वन कैसे होंगे सुरक्षित : अनुराग

शिमला: प्रदेश में वन माफिया  का आतंक हो चुका है। पहले जहाँ प्रदेश में अवैध खनन  कटान आदि माफिया सक्रिय थे। अब वयापक स्तर पर वन माफिया सरकार की शरण मे काम कर रहा है। सरकार के चेहते माफियों को चला रहे और सरकार मौन बैठी है।

इसका पता करसोग में एक ईमानदार और साहसी कर्मचारी को मौत से पता चलता है। मगर प्रदेश सरकार वन माफिया हमेशा मौन रही है। कांग्रेस सरकार नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके साथ ही इस मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। यह बयान  बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन एवम हमीरपुर लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर  ने  प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम में दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि के जंगल सुरक्षित नहीं है। वन माफिया कितने सक्रिय है यह करसोग मामले से साफ जाहिर हो गया है। किस तरह बेहरमी से फारेस्ट गार्ड होशियार की हत्या हुई है। ये बेहद ही सोचनीय है। जब वन कर्मी ही सुरक्षित नहीं है तो वन सुरक्षित कैसे हो पाएंगे। प्रदेश भर में वन माफिया जाल बिछाए हुए है,लेकिन पिछले चार सालों में एक वन माफिया का सरगना प्रशासन ने नही पकड़ा। वन विभाग के कर्मचारी मिलकर माफिया चला रहे है। इससे ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है। वनों की सुरक्षा निहथो कभी नहीं हो सकती। यह कोई पहला मामला नहीं है । पहले भी कई मामले ऐसे हो चुके मगर सरकार ने फील्ड कर्मचारियों को कोई सुविधा नहीं दी।

सरकार कोई ऐसी योजना भी नहीं बना पाई है, जिससे वन माफिया पर लगाम लगे। करसोग मामले की जांच निष्पक्ष ओर तुरन्त होनी चाहिए। इस मामले से प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली सवालो के घेरे में आ गयी है। वन मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्हें मंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। शिमला कुल्लू चबा मंडी आदि में सबसे ज्यादा वन माफिया सक्रिय है। पड़ोसी राज्यो में वन संपदा को अवैध रूप से बेचा जा रहा है। लेकिन सरकार इस बात को स्वीकार ही नहीं करती है। हर मोर्चे पर सरकार विफल हो रही है। सासंद ने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावो के भाजपा सरकार बनाएगी ओर वन माफिया पर रोक लगायेगी।

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