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पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं का निवारण तीन माह के भीतरः कौल सिंह

शिमला: पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास व राहत संबंधी समस्याओं का समाधान अगामी तीन महीने की समय सीमा के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा। यह निर्णय पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित राहत एवं पुनर्वास समन्वय समिति की बैठक में लिया गया।

गत देर सायं पीटरहॉफ में हुई इस बैठक में मंत्रीमंडलीय समिति राजस्थान सरकार के पांच मंत्रियों के अतिरिक्त प्रदेश सरकार की ओर से स्वास्थ्य परिवार कल्याण, राजस्व एवं विधि मंत्री कौल सिंह ठाकुर व कृषि एवं ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने संयुक्त रूप से विस्थापितों की राहत एवं पुनर्वास समस्या के स्थाई हल के लिए तीन महीने के भीतर समस्त प्रक्रियाएं पूर्ण कर स्थाई निष्कर्ष निकालने का समय निर्धारित किया।

कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि पौंग बांध के तहत कुल 75268 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 339 गांवों के 20722 परिवार प्रभावित हुए थे। उन्होंने बताया कि अभी तक 12048 एकड़ भूमि विस्थापितों को आबंटित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि आबंटित भूमि विस्थापितों को वहां सिंचाई, बिजली व सड़क संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिसके लिए राजस्थान सरकार जल्द निर्णय लेकर समस्याओं का निवारण करें।

उन्होंने बताया कि भू आबंटी को वर्षों तक आबंटित भूमि को बदलने के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार द्वारा भूमि आबंटित करने से पहले रिकॉर्ड व मौके की स्थिति का मुआयना किया जाए, ताकि विस्थापितों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।

उन्होंने भूमि कब्जा लेने के लिए विस्थापितों द्वारा चलान फार्म प्रक्रिया को सरल बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित तहसील कार्यालय में ही आबंटी द्वारा किश्तें जमा करवाने का प्रावधान अथवा निजी किसी बैंक अथवा ऑनलाईन किश्त जमा करवाने की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए, ताकि विस्थापितों को आसानी हो सके। उन्होंने बताया कि मंत्रीमंडलीय समिति राजस्थान सरकार इस संबंध में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से भी भेंट करेगी।

कृषि एवं ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया ने कहा कि विस्थापितों ने अपनी भूमि राष्ट्रीय हित के लिए दी है। ऐसे में दोनों सरकारों का दायित्व बनता है कि उनकी समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए कार्य करे। उन्होंने राजस्थान सरकार से इस संबंध में उदारपूर्ण रवैया अपनाने का आग्रह किया, ताकि बचे हुए प्रभावित परिवारों को तुरंत मुआवजा व पुनर्वास तथा राहत प्रदान की जा सके।

अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व तरूण श्रीधर ने कहा कि अधिकारित स्तर पर बातचीत कर राहत व पुनर्वास की प्रक्रिया के सभी बिंदुओं पर जल्द चर्चा कर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय में इस संबंध में लंबित पड़े मामलों के लिए दोनों सरकारें संयुक्त रूप से शपथ पत्र दायर करेगी। गृह एवं न्याय मंत्री राजस्थान सरकार गुलाब चंद कटारिया ने अपने उदबोधन में बताया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया ने इस मुद्दे को प्रमुखता प्रदान करते हुए जल्द सुलझाने का निर्देश दिया है।

उन्होंने बताया कि हर महीने के पहले सोमवार के दिन इस समस्या को सुलझाने के लिए अधिकारी विस्थापितों के क्षेत्र में उपस्थित रहेंगे, ताकि विस्थापितों के विभिन्न दस्तावेजों की जांच के पश्चात कार्यवाही तुरंत अमल में लाई जा सके। उन्होंने कहा कि सूची के हिसाब से वंचित रह गए विस्थापितों की समस्याओं को तीन महीने के भीतर सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार लंबे समय से चले आ रहे इस मामले के जल्द निपटारे के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि बैठक इस मामले को निपटाने के लिए ऐतिहासिक बैठक साबित होगी।

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