बारिश के चलते खनन पर लगी रोक, नदी-नालों के किनारे न करें खनन

वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा दे रही हिमाचल सरकार

शिमला: प्रदेश सरकार राज्य में वैज्ञानिक खनन पर अंकुश लगाने के प्रति वचनबद्ध है तथा इसके लिए नियमित निरीक्षण एवं समुचित वैधानिक प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा खनिज नीति में संशोधन किया गया है तथा लोक निर्माण, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य तथा राजस्व जैसे विभागों की सम्पति को हुई क्षति के लिए उन्हें प्राथमिक दर्ज करवाने के लिए प्राधिकृत किया गया है।

इसके अतिरिक्त प्रदेश में विभिन्न स्थानों में लघु खनिज के खनन हेतु नए लघु खनिज अधिनियम अधिसूचित किए गए हैं तथा उसका उल्लंघन करने वालों के लिए 50 हजार रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गत वर्ष प्रदेश में अवैध खनन के लगभग 8500 मामले पकड़े गए और उल्लंघन करने वालों से 4.50 करोड़ रूपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया जबकि वर्ष 2015-16 में 9303 मामले पकड़े गए थे जिनसे 4.01 करोड़ रूपये का जुर्माना वसूला गया।

प्रदेश में अवैध खनन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा राजस्व, लोक निर्माण, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, उद्योग विभाग तथा खण्ड विकास अधिकारी एवं क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को अवैध खनन गतिविधियों का संज्ञान लेने के लिए प्राधिकृत किया गया है। सम्बन्धित उप-मण्डल अधिकारी की अध्यक्षता में उप-मण्डल स्तर पर उड़न दस्तों का गठन किया गया है जिसमें पुलिस उप-अधीक्षक एवं सहायक वन अरण्यपाल को सदस्य बनाया गया है।

जवाबदेही सुनिश्चित बनाने एवं अवैध खनन पर नकेल कसने के लिए उद्योग विभाग ने एक प्रणाली विकसित की है जिसके अन्तर्गत विभाग के प्रत्येक अधिकारी /कर्मचारी को नियमित रूप से क्रशर का निरीक्षण करना होगा और उसके द्वारा की गई कार्यवाही के सम्बन्ध में अपने वरिष्ठ अधिकारी को सूचित करना होगा।

प्रदेश के सभी उपायुक्तों को नियमित रूप से मासिक बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं तथा उन्हें लोक निर्माण, राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों की एक समिति गठित करने को कहा गया है क्योंकि अवैध खनन के अधिकांश मामले वन भूमि/सरकारी भूमि से गुजरते हैं और यहां से निकाले गए खनिजों को लोक निर्माण विभाग की सड़कों के किनारे इकट्ठा किया जाता है । उपायुक्त खनन स्थल का औचक निरीक्षण कर यह भी सुनिश्चित करेंगे कि कोई खनन का मालिक अवैध रूप डीजल जैनरेटर सैट का उपयोग न कर रहा हो।

रेत, पत्थर तथा बजरी जैसी भवन निर्माण सामग्री की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए लघु खनिज स्थलों की पारदर्शी तरीके से नीलामी की जा रही है। प्रदेश सरकार के इस प्रयास से न केवल राज्य कोष में वृद्धि हुई है बल्कि प्रदेश में अवैध खनन पर भी अंकुश लगा है।

प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण एवं खनिज की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के लिए राज्य सरकार ने सड़क, सुरंग एवं जल विद्युत परियोजनाओं जैसी विकासात्मक गतिविधियों से निकले कच्चे माल की स्टोन क्रशर इकाईयों द्वारा उपयोग करने की अनुमति दी गई है। इससे न केवल प्रदेश में अवैध खनन पर अंकुश लगेगा बल्कि बाजार में लघु खनिजों की बढ़ती मांग को भी पूरा किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार के इन प्रयासों की सुखद परिणाम आ रहे हैं। इससे राज्य में विकासात्मक कार्यों एवं आम लोगों द्वारा निर्माण कार्यो के लिए पर्याप्त मात्रा में निर्माण सामग्री भी उपलब्ध हो रही है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिल रहा है।

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