पंखुड़ीपात पूरा होने पर पौधों में छिडक़ें जैड-20-एल 100 ग्राम, 200 लिटर पानी में मिलाकर : डा. एस.पी. भारद्वाज

जैड-20-एल 100 ग्राम 200 लिटर पानी में मिलाकर पंखुड़ीपात पूरा होने पर पौधों में छिडक़ें : डा. भारद्वाज

  • बागवान सुरक्षित व आरगेनिक उत्पाद को दें विशेष महत्ता
  • जब तक फूल झड़ने की प्रक्रिया पूरी न हो, न करें किसी भी रसायन का छिडक़ाव
बागवानी विशेषज्ञ डा. एस.पी. भारद्वाज

बागवानी विशेषज्ञ डा. एस.पी. भारद्वाज

यूरोपियन रेड माईट के अण्डे

यूरोपियन रेड माईट के अण्डे

आजकल निचले व मध्यम पहाड़ी क्षेत्रों में सेब बागीचों में फूल खिलने की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और केवल ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में फूल खिलने की प्रक्रिया चल रही है। पहली फलावरिंग में फल सेटिंग अभी तक ठीक दिखाई दे रही है और दूसरी फलावरिंग में कुछ कम और तीसरी फलावरिंग में भी फल उपयुक्त मात्रा में दिखाई दे रहा है। दूसरी फलावरिंग के समय हिमपात व लगातार वर्षा होने के कारण सामान्य तापमान में 10-12 डिग्री सेल्सियस की कमी देखी गई थी और यह 6 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच गया था। अत्याधिक कम तापमान वह भी फूल खिलने के समय, मुख्यत: कम फल बनाता है और इतने कम तापमान में फल सैटिंग नहीं हो पाता। कई स्थानों पर तो पाले का भी विपरीत असर देखने में आया है।

  • छिड़काव शाम के समय ही करें

जब तक फूल झड़ने की प्रक्रिया जिसे पंखुड़ीपात कहते हैं, पूरी न हो जाए किसी भी रसायन का छिड़काव न करें। पंखुड़ीपात पूरा होने पर वोरिक एसिड 200 ग्राम, 200 लिटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें। इस छिड़काव से फल बढ़ने की प्रक्रिया में सहायता होगी और पौधों में बढ़ते तापमान के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकेगा तथा फल गिरने की समस्या में भी कमी आएगी। छिड़काव शाम के समय ही करें इससे पौधों को पर्याप्त लाभ मिल सकेगा। अधिक गर्मी होने के कारण छिड़काव शीघ्र उड़ जाता है और पौधों के पत्तों व अन्य भागों से अवशोषित नहीं हो पाता।

छिड़काव शाम के समय ही करें

छिड़काव शाम के समय ही करें

पिछले वर्ष सेनोविटा जर्मनी के नवीनतम क्वांटम डॉट तकनीक तथा नैनो टैकनोलॉजी पर विकसित फल्यूज़न फल्यूज़न, फल्यूज़न ब्लूम प्लस तथा जेड 20 एल (220 एल) को प्रयोग करके सेब के पौधों, बीमों, पत्तियों तथा फलों में गुणत्मक सुधार देखने को मिला है। यही नहीं, यह सभी आरगेनिक उत्पाद हैं और अतिशीघ्र पौधों में सुधार करके उत्पादन क्षमता तथा गुणवता बढ़ाने में आश्चर्यजनक व सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। विश्व में यह तकनीक केवल 3 वर्ष से ही प्रयोग में लाई जा रही है और अत्यंत नवीनतम है तथा 57 देशों में इस समय प्रयोग की जा रही है। इसके प्रयोग से पत्तों का आकार व गहरा हरा रंग बढ़ता है तथा पिटीयोल (डंडी) भी लंबी होती है। पत्तों का आकार बढ़ने के कारण पौधों की भोजन बनाने की क्षमता बढ़ती है और फलों की गुणवत्ता, जिसमें आकार, वजन, आकर्षक रंग तथा चमक बढ़ती है। पिछले वर्ष के प्रयोग के अनुसार फल के भार में 18-20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है।

  • पंखुड़ीपात पूरा होने पर पौधों में छिडक़ें जैड-20-एल 100 ग्राम 200 लिटर पानी में मिलाकर
पाउडरी मिल्डू

पाउडरी मिल्डू

इसके साथ-साथ, रैड माईट, सैजोस स्केल तथा वूली एफिड के आक्रमण में भी कमी देखी गई है। पौधों की पत्तियां लंबे समय तक पौधों पर बनी रहती हैं और नंवबर अंत से दिसंबर में ही झड़ती है, इस कारण अगले वर्ष के लिए बीमे सशक्त व मजबूत होकर अच्छा फूल देने में सक्षम होते हैं। इन उत्पादों के प्रयोग से फलों में रसटिंग भी बहुत कम होती है। इनके लगातार प्रयोग से पौधों की प्रतिरोधक शक्ति का विकास होता है और पौधे में नई ऊर्जा व शक्ति का संचार दिखाई देता है। इनके प्रयोग से पौधों पर किसी प्रकार का बुरा प्रभाव नहीं होता है। जिन बागवान भाईयों ने इनका प्रयोग अभी नहीं किया है वे पंखुड़ी पात पर फल्यूज़न फल्युज़न 7 मि.लि को घोलकर इसमें जैड-20-एल (जेड-20-एल) 100 ग्राम घोल कर 200 लिटर पानी में डालें तथा पौधों पर मिस्ट रूप में बारीक से बारीक फुहार बनाकर शाम के समय, 3 बजे के पश्चात छिडक़ें। इनके अवशोषण में 4-6 घंटे का समय लगता है और परिणाम 10 दिन में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। ऐसे बागवान जिन्होंने इससे पहले फल्यूज़न ब्लूम प्लस 7 मि.लि. का प्रयोग गुलाबी कली अवस्था में किया है वे केवल जैड-20 एल 100 ग्राम 200 लिटर पानी में मिलाकर पंखुड़ीपात पूरा होने पर पौधों पर छिडक़ें। इनके छिडक़ाव से पत्तियों तथा फलों की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार होगा और उत्पादकता में नये कीर्तिमान स्थापित होंगे।

  • किसी प्रकार के कीट नाशकों व फफूंद नाशकों के प्रयोग करने से बचें
  • अधिक या अनावश्यक कीटनाशक व फफूंदनाशक पौधे के कीट, माईट व रोग को कम समय तक ही रख पाते हैं नियंत्रित

गर्मी बढ़ने के कारण हवा में आर्द्रता कम हो जाता है और इसके कारण पाउडरी मिल्डयु, चूर्ण फफूंद रोग पनपता है और वह भी विशेषकर गाला ठाप गोल्डन डिलिशियस, रैड

रेड मायट के आक्रमण के पतियों पर लक्षण

रेड मायट के आक्रमण के पतियों पर लक्षण

गोल्ड इत्यादि किस्मों में अधिक होता है। रॉयल तथा रैड में भी प्रकोप दिखाई देता है परंतु तुलना में कुछ कम। बागीचों में रैड माईट के अंडों से मार्च से जून तक शिशु माईट निकलते रहते हैं। अंडों वे चाहे माईट के हों या फिर किसी अन्य कीड़ों के जिनमें खूंडियां भी शामिल हैं को नियंत्रण करने के लिए आरबोफाईन या मैक आल सीजन एचएमओ 2 लीटर प्रति 198 लीटर पानी में मिलाकर, शाम के समय, पौधों पर बारीक फुहार बना कर छिडक़ने से इनका सफल नियंत्रण होता है। इसी छिडक़ाव से पाउडरी मिल्डयू का भी उतना नियंत्रण होता है जितना फूफंद नाशक, स्कोर, टापसिन एम या वैविस्टिन के प्रयोग करने पर मिलता है।

एचएमओ (1 %) के प्रयोग से फलों में छेद करने वाली सुंडियो का भी नियंत्रण हो जाता है। एचएमओ पर्यावरण को सुरक्षित रखता है और मित्र कीड़ों को सुरक्षा प्रदान करता है। अत: इसका प्रयोग करें। पत्तियों पर भी विशिष्ट चमक होने पर भोजन बनाने की शक्ति अधिक हो जाती है और फल की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक है। किसी प्रकार के कीट नाशकों व फफूंद नाशकों के प्रयोग करने से बचें। अधिक या अनावश्यक कीटनाशक व फफूंदनाशक पौधे के कीट, माईट व रोग को कम समय तक ही नियंत्रण में रख पाते हैं। इसलिए सुरक्षित व आरगेनिक उत्पाद को विशेष महत्ता दें जिससे फल स्वादिष्ट व लंबे समय तक रखा जा सके।

 

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