अपने कमजोर प्रबन्धन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विकास के मापदण्डों पर पिछड़ी प्रदेश की कांग्रेस सरकार : प्रो.धूमल

  • गैर उत्पादक व्ययों के लिए कर्ज उठाकर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के लिए प्रो. धूमल ने की प्रदेश सरकार की निंदा
  • कांग्रेस सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में फिजूलखर्ची को रोकने और संसाधन जुटाने के लिए नहीं किए कोई गंभीर प्रयास

शिमला: नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताई है। पिछले कल हिमाचल प्रदेश विधान सभा में प्रस्तुत की गई सी.ए.जी. की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए गैर उत्पादक व्ययों के लिए कर्ज उठाकर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के लिए प्रदेश सरकार की निंदा की है।

उन्होनें कहा कि वर्ष 2017-18 की मुख्यमंत्री की बजट भाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होनें प्रदेश सरकार को वित्तीय कुप्रबन्धन के लिए सचेत किया था जिसकी भारत के सी.ए.जी. द्वारा अब पुष्टि की गई है।

राज्य पर 31 मार्च, 2017 तक कुल अनुमानित कर्ज 45,213.30 करोड़ रू. है, जो राज्य के जी.एस.डी.पी. का 38.3 प्रतिशत है। 2013 से 2017 वीरभद्र सिंह सरकार के चार वर्षों में 13,555 करोड़ रू. का कर्ज गैर उत्पादित कार्यों के लिए कर्ज उठाया गया है। सी.ए.जी. की रिपोर्ट के अनुसार राज्य ने पूंजी व्यय को कम प्राथमिकता दी है और वीरभद्र सिंह के दावे कि सरकार विकास कार्यों के लिए कर्ज ले रही है, को झुठलाया है।

धूमल ने आगे कहा कि सरकार ने बड़ी संख्या में कांग्रेस के हारे हुए नेताओं व कार्यकर्ताओं को घाटे में चल रहे सरकारी बोर्डों/निगमों के चेयरमैन/वाईस चेयरमैन के पदों पर नियुक्ति दी है जिनका कार्य केवल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बयानबाजी करना है।

धूमल ने आगे कहा कि सी.ए.जी. ने सरकार के लगभग सभी विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रतिकुल टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी वसुलियों की उगाही में इच्छाशक्ति की कमी है। राज्य की कांग्रेस सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में फिजूलखर्ची को रोकने और संसाधन जुटाने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए, बल्कि सरकार ने अपने चहेते टायर्ड व रिटायर्ड अधिकारियों/कर्मचारियों के सेवाकाल में वृद्धि करने या पुर्नरोजगार प्रदान करने को बढ़ावा दिया है।

रिसोर्स मोबेलाईजेशन कमेटी यदि कोई है भी तो उसकी रिपोर्ट कभी प्रकाश में नहीं आई है। यद्यपि केन्द्र की वर्तमान एन.डी.ए. सरकार सभी सरकारी विभागों को उदारता से सहायता प्रदान कर रही है और 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत 40,625 करोड़ रू. रेवन्यू डेफिसिएट ग्रांट प्रदेश को दे रही है। फिर भी प्रदेश की कांग्रेस सरकार अपने कमजोर प्रबन्धन के कारण राष्ट्रीय स्तर पर विकास के मापदण्डों पर पिछड़ गई है।

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