नाबार्ड की ओर से हिमाचल प्रदेश के सहाकारी बैंकों को 550 करोड रूपये की वित्तीय सहायता

वर्ष 2016-17 के दौरान नाबार्ड ने की प्रदेश में 2345 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान

 दीपक कुमार मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड

दीपक कुमार मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड

शिमला: वर्ष 2016-17 के दौरान  राज्य के कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास हेतु नाबार्ड ने 2345 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जो कि अब तक की सर्वाधिक सहायता है एवं पिछले वर्ष की तुलना में 655 करोड़ अधिक है  दीपक कुमार, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने जानकारी देते हुए बताया कि:

  • राज्य के किसानों द्वारा कृषि संबंधी आस्तियों के सृजन एवं फ़सल ऋण प्रदान करने हेतु ग्रामीण बैंकों को 1825 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई सुविधाएं तथा सड़क एवं पुल निर्माण हेतु 500 करोड़ की वित्तीय सहायता राज्य सरकार को प्रदान की गई।
  • 100 करोड़ की लागत से ऊना जिले में बनने वाले मेगा फ़ूड पार्क के लिए 20 करोड़ की राशि “क्रेमिका फ़ूड पार्क” को प्रदान की गई। इस परियोजना से राज्य में सब्जी एवं फ़ल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा एवं कृषि उत्पादक संघों को लाभ पहुंचेगा।
  • नाबार्ड के पहल पर बने 57 कृषि उत्पादक संघों (FPO) को बीज, खाद एवं कीट नाशकों के लाइसेंस प्रदान करने हेतु राज्य सरकार द्वारा नीतिगत निर्णय लिया गया है।
  • ग्रामीण क्षेत्र में कैशलेस लेन-देन के संबंध में जागरूकता पैदा करने हेतु 1470 वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
  • डिजिटल भारत की तरफ बढ़ने हेतु सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों को रुपे-किसान कार्ड जारी करने के लिए ₹ 29.24 लाख की सहायता प्रदान की गई।
  • बैंकों एवं गैर सरकारी संगठनो को 11.23 करोड़ का अनुदान जारी किया गया ताकि वे डिजिटल वित्तीय साक्षरता कैम्प, वित्तीय साक्षरता केन्द्र, रुपे-केसीसी, माइक्रो एटीएम, बैंक सखी कार्यक्रम एवं वी-सैट के माध्यम से ग्रामीण बैंकों का संयोगिकरण कर सकें।
  • राज्य के सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों द्वारा 1, 26,034 केसीसी जारी किए गए। इसके अलावा 71,309 एटीएम सक्षम रुपे-केसीसी जारी किए गए।
  • मण्डी जिले में नाबार्ड द्वारा प्रारम्भ किए गए “ई-शक्ति” कार्यक्रम के अंतर्गत 4327 स्वयं-सहायता समूहों को वेब-पोर्टल पर लाया गया है ताकि वे डिजिटल मंच पर आएं।
  • राज्य के 392 गांवों में “जल अभियान” प्रारम्भ किए गया, जिससे जल-संरक्ष्ण, जल-संचयन एवं जल उपयोग दक्षता के संबंध में जागरूकता पैदा की जा सके।
  • नाबार्ड ने 27,750 परिवारों को शामिल करते हुए 3265 एसएचजी एवं 3300 सदस्यों को शामिल करते हुए 533 जेएलजी गठन करने में सहायता की। इसके अलावा विभिन्न बैंकों से एसएचजी को 26 करोड़ का एवं जेएलजी को  6.1 करोड़ का बैंक ऋण प्राप्त करने में सहायता की गई।
  • जन-जातीय लोगों की सहायता हेतु राज्य के सबसे पिछड़े एवं दूरवर्ती ब्लॉक पांगी में 144.65 लाख की सहायता राशी वाली एक परियोजना मंजूर की गई जिससे 293 परिवारों को लाभ मिलेगा। ऐसी परियोजनाएं राज्य के पांच जिलों, यथा: किन्नोर, ऊना, चम्बा, बिलासपुर एवं लाहौल-स्पीती में 1725 परिवारों के लाभ के लिए नाबार्ड द्वारा चलाई जा रही हैं।
  • दीपक कुमार ने आशा व्यक्त की है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों एवं कृषि के विकास हेतु नाबार्ड द्वारा प्रदान की जा रही सहायता से न केवल राज्य की जीडीपी में वृद्धि होगी बल्कि कृषि क्षेत्र में पूंजी निर्माण में भी बढ़ोतरी होगी।

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