विधानसभा मानसूनसत्र: सदन में वापस लौटा विपक्ष, हिम केयर व आयुष्मान योजनाओं पर चर्चा

5 अप्रैल को कसुम्पटी के 1000 किसान करेंगे विधानसभा का घेराव

  • ज़मीन, भवन नियमितिकरण, दूध के दाम बढ़ाने सहित जंगली जानवर और मनरेगा रहेंगे मुख्य मुद्दे

  शिमला: हिमाचल किसान सभा की 5 अप्रैल को होने वाली रैली में प्रदेश से हज़ारों किसान हिस्सा लेंगे जिनमें मशोबरा खण्ड और कसुम्पटी से 1000 किसान हिस्सा शिमला आएंगे। इस बात का फैसला किसान सभा की कसुम्पटी इकाई की बैठक में लिया गया। वरिष्ठ किसान मोलक राम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई बैठक में राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर और जिलाध्यक्ष सत्यवान पुंडीर ने विशेष तौर पर भाग लिया। किसानों ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 5 अप्रैल को सरकार को घेरने का मन बनाया है।

रैली में ग्रामीणों की भूमि नियमित करने, दूध का सरकारी रेट बढ़ाने, जंगली जानवर और आवारा-नकारा पशुओं से निजात, मनरेगा में साल में 200 दिन का काम और 300 रुपये की न्यूनतम दिहाड़ी की मांग मुख्य रुप से होगी।

हिमाचल किसान सभा विशेष तौर पर शिमला नगर निगम के तहत आने वाले मर्ज्ड एरिया और टीसीपी के दायरे में आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में भवन नियमितिकरण का मुद्दा रैली में उठाएगी। किसान सभा की ओर से राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने मर्ज्ड एरिया से आए लोगों को आष्वासन दिया कि किसान सभा उनके भवनों को नियमित करवाने के लिए सरकार के साथ संघर्ष करेगी और राहत मिलने से पहले पीछे नहीं हटेगी। डॉ. तंवर ने अफसोस ज़ाहिर किया कि किसानों की लम्बी मांग के बावजूद सरकार अभी तक भी किसानों की ज़मीन से बेदखली को नहीं रोक रही। लेकिन किसान सभा छोटे किसानों की भूमि को नियमित करने के लिए अपना आन्दोलन जारी रखेगी।

  • भूमिहीन के मकान गिराने का नोटिस

बैठक में सतलाई पंचायत के कटेयां-मझार गांव से आए दया राम पुत्र किरपा राम ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनके पास ज़मीन का छोटा सा भी टुकड़ा नहीं है उसके बावजूद उनको वन विभाग की ओर से मकान तोड़ने का नोटिस आ गया है। उन्होंने किसान सभा से उनका घर बचाने की गुहार लगाई।

किसान सभा के जिलाध्यक्ष सत्यवान ने कहा कि किसान अपनी आजीविका के लिए कृषि-बागवानी के साथ पषुपालन भी करते हैं लेकिन दूध के सरकारी रेट इतने कम हैं कि उससे पषु के घास का खर्च तक पूरा नहीं हो पाता। किसान सभा दूध के रेट 30 रुपये करने की मांग कर रही है लेकिन सरकार ने बजट में मात्र 1 रुपया बढ़ाकर पषुपालकों के साथ मज़ाक किया है। वहीं जंगली जानवरों और आवारा-नकारा पशुओं की समस्या से सरकार किसानों को निजात नहीं दिला पाई है। और उल्टा वानर वाटिका खोलने का राग अलाप रही है जो बेतुकि बात है। क्योंकि इससे समस्या का समाधान नही हो सकता।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *