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सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए हमेशा आशावादी बनें : आईएएस अधिकारी संदीप कुमार

  • जो चलेगा उसके पांव में धूल लगेगी ही, लेकिन यह भी सच है कि चलकर ही मंजिल हासिल होगी : आईएएस अधिकारी संदीप कुमार
  • बेहतर की चाह में बेहतर करता रहा और आगे बढ़ता रहा
आईएएस अधिकारी संदीप कुमार से हमारी हिम शिमला लाइव की संपादक मीना कौंडल से मुलाकात

आईएएस अधिकारी संदीप कुमार से हमारी हिम शिमला लाइव की संपादक मीना कौंडल से मुलाकात

मंजिल पाने के लिए हौंसला, कड़ी मेहनत तो चाहिए ही, लेकिन साथ ही सबसे बेहतर करने की अपने आपमें एक जिद होनी चाहिए। तभी आप सफलता के मुकाम तक पहुंच सकते हैं। जहां पहुंचने के आप सपने देखते हैं वहां पहुंचने के लिए जुनून हो तो आपको कोई पीछे नहीं हटा सकता। जी हां, ऐसी ही एक शख्सियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने न सिर्फ अपनी मेहनत से केवल अपनी मंजिल पाई बल्कि आम लोगों की वाहवाही भी बटोरी और अपने विभाग में हर बार बेहतर और अलग करके दिखाया। हम बात कर रहे हैं नगर नियोजन विभाग (Town & country Planning) के निदेशक आईएएस अधिकारी संदीप कुमार की। पेश है आईएएस अधिकारी संदीप कुमार से हमारी हिम शिमला लाइव की संपादक मीना कौंडल से मुलाकात की एक खास रिपोर्ट: –

प्रश्न : सर आप सबसे पहले यह बताएं कि आपकी प्रारंभिक शिक्षा कहां से हुई?

उत्तर : मैं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला से हूं और हमीरपुर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नादौन से मैंने अपनी शिक्षा की शुरूआत की।

प्रश्र : आपके शुरू पढ़ाई से आईएएस का सफर कैसा रहा ?

उत्तर : मेरा लक्ष्य हमेशा औरों से अलग रहा। हालांकि मैंने स्कूल टाईम में सोचा नहीं था कि मैं जीवन में क्या करूंगा, क्या बनूंगा। लेकिन मैं स्कूल, कॉलेज में हमेशा यही करने की कोशिश करता था कि मैं औरों से बेहतर करूं। बेहतर करते-करते मेरे अंदर इतना विश्वास आ गया कि मैं किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता हूं। अपने स्कूल के दोस्तों, कॉलेज के छात्रों से बेहतर करना है, ऐसा करने का बस एक जुनून रहा और बेहतर करने के इसी जुनून के चलते में आगे बढ़ता गया और पढ़ाई से लेकर आईएएस तक, अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ सफल होता रहा

प्रश्र : सर आप सरकारी क्षेत्र में कब आए?

उत्तर : मेरी उम्र उस वक्त 25 साल की थी। 1998 में मुझे सरकारी नौकरी मिली। मैंने बतौर एसडीएम जुब्बल में ज्वाइन किया। उसके उपरांत एडीसी चंबा, एसडीएम पांगी, रोहडू, बैजनाथ और पावंटा साहिब में रहा। इसके अलावा 1998-2000 में एडीएम कांगड़ा व मैनेजिंग डायरेक्टर कांगड़ा रहा। एसडीएम कांगड़ा के बाद फिर 2014 में मैं शिमला आया।

Inauguration of HPTCP web portal

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प्रश्र : बतौर टीसीपी निदेशक आपके काम को काफी ज्यादा लोगों ने सराहा। आपके द्वारा विभाग में काफी कुछ नई तकनीक से जोड़कर लोगों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। उसके बारे में विस्तार से बताएं?

उत्तर : लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए हम और हमारा विभाग हमेशा प्रयासरत है। हमारी कोशिश है कि लोगों को आईटी के माध्यम से आसान और बेहतर सुविधा दें मोबाइल एप्पस व वैबपोर्टल के माध्यम से लोग भी अपडेट हैं तथा जानकारी भी ले रहे हैं, जो काम हम कर रहे हैं वो साफ दिखाई देता है। साफतौर से पारदर्शिता दर्शाई जा रही है। हम 24 घंटे लोगों के लिए तत्पर हैं। प्रिंट मीडिया, इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से हम लोगों तक जुडऩे का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। नगर नियोजन के महत्व और जानकारी आम आदमी तक पहुंचाना और बताना बहुत आवश्यक है। आईटी, प्रिंट व इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से हम विज्ञापन द्वारा प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं। सरकार द्वारा मापदंड लोगों की भलाई के लिए ही बनाए गए हैं।

प्रश्र : आपके राज्य शहरी एवं नगर नियोजन विभाग द्वारा डिजिटल सेवाओं में विस्तार कर गत वर्षों में काफी बदलाव किए गए हैं? इसके बारे में बताएं?

उत्तर : जैसे मैंने पहले भी कहा कि हमारा विभाग लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप अपनी सेवाओं को आसान करने के लिए प्रयासरत है। हमारा प्रयास रहा कि ऑनलाईन सेवाएं शुरू होने से समय व धन की बचत हो और लोगों को अपने कार्यों के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। साथ ही हमने अंग्रेज़ी के साथ राज्य शहरी एवं नगर नियोजन विभाग की वैबसाईट को आम लोगों की सुविधा के लिए हिन्दी में भी उपलब्ध करवाया गया। विभाग की प्रत्येक सूचना हिन्दी तथा अंग्रेजी भाषाओं में प्रदान की जा रही है। वहीं अब कोई भी व्यक्ति निजी तौर पर अथवा वास्तुकार के माध्यम से ऑनलाईन पोर्टल से इन सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकता है।

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