नलवाड़ी मेले के कुश्ती पुरस्कार में बढ़ोतरी

  • मुख्यमंत्री का प्रदेश की समृद्ध संस्कृति व परम्पराओं के संरक्षण पर बल

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज बिलासपुर में नलवाड़ी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नलवाड़ी प्रदेश का एक पारम्परिक मेला है, जो प्राचीन समय से छिंज (कुश्ती) मेले के साथ-साथ पशुधन मेले के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कुश्ती की सामान्य श्रेणी प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार राशि को 71 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.1 लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार को 51 हजार से बढ़ाकर 75 हजार,  तृतीय पुरस्कार को बढ़ाकर 31 हजार रुपये तथा चतुर्थ पुरस्कार को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की।

हिम कुमार श्रेणी में प्रथम पुरस्कार राशि को 31 हजार रुपये से 51 हजार तथा द्वितीय पुरस्कार की राशि को 21 हजार से क्रमशः तथा 31 हजार रुपये करने की घोषणा की। इसी तरह तृतीय तथा चतुर्थ पुरस्कार राशि को क्रमशः 21 हजार तथा 15 हजार रुपये किया गया।

उन्होंने कहा कि यह मेला पशुओं की प्रदर्शनी, क्रय तथा विक्रय के लिए भी जाना जाता है। मेले के दौरान किसानों को अपने घरद्वार के निकट उन्नत नस्लों के पशुधन खरीदने का अवसर प्राप्त होते है।

मुख्यमंत्री ने पशुओं की सेवाएं लेने के पश्चात उनको आवारा छोड़ने प्रति नराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह का कृत्य मानव मूल्यों के खिलाफ है जो हमारी संस्कृति में आई गिरावट का दर्शाता है। उन्होंने का कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार को सभी के सहयोग की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से पशुओं को आवारा न छोड़ने का आग्रह किया तथा कहा कि हमें उनकी वृद्धावस्था में सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आवारा पशुओं की देखभाल के लिए ‘गोवंश संवर्द्धन बोर्ड’ को गठन किया है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त बजट होने के बावजूद भी सिर्फ कुछ लोगों के आगे आने से निराशा पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में ‘उत्तम पशु पुरस्कार योजना’ के अन्तर्गत 15 लीटर दूध प्रतिदिन देने वाली गायों तथा भैंसों के मालिकों को 1000 रुपये देने का पुरस्कार का प्रस्ताव रखा है। ‘पंचायत पुरस्कार पशुधन योजना’ के अन्तर्गत पंचायतों को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए 7.80 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी बजट में पेश किया गया। परन्तु इस कुप्रथा को रोकने के लिए लोगों का सहयोग अति आवश्यक है।

उन्होंने बिलासपुर में अखिल भारतीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एम्स) को स्थापित करने में देरी करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को दोषी ठहराया, हालांकि वे क्षेत्र से सम्बन्ध रखते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि देरी के कारणों को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ही अधिक जानते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा भूमि के अवैध अतिक्रमण की घटनाएं सामने आई हैं तथा इस पर अंकुश लगाना आवश्यक है। उन्होंने अपरोक्ष तौर पर दोषियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि अतिक्रमण के मामलों का कानून के प्रावधानों के अनुसार समाधान किया जाएगा। यदि संभव हुआ और अगर दोषी इसे अतिक्रमित स्वयं छोड़ते हैं, तो इस भूमि को अन्य विस्थापित परिवारों को उपलब्ध करवाया जाएगा तथा भविष्य में नए सेक्टरों का सृजन भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघछाल पुल के निर्माण के लिए 16.68 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस पुल पर गेमन कंस्ट्रक्शन कम्पनी द्वारा कार्य आरम्भ कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के लोगों की मांग पूरी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आज वैज्ञानिक व आधुनिक विश्व में तरक्की की ओर अग्रसर है। ऐसे में प्राचीन संस्कृति व रीति-रिवाजों का सरंक्षण करने की आवश्यकता है, जो हमारी विशिष्ट पहचान है। उन्होंने कहा कि इस मेले में अब बदलाव आया है और यह मेला व्यावसायिक मेला बन गया हैं। इस मेले में अब प्रदेश व प्रदेश के बाहर से व्यवसाय के लिए व्यापारी आते हैं।

उन्होंने पारम्परिक छिंज का आनंद लिया तथा इस अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कुश्ती विजेताओं को पुरस्कार वितरित करने के पश्चात सात दिवसीय मेले के समापन की घोषणा की।

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