हिमाचल: प्रदेश कांग्रेस कृषि कानून के विरोध में 10 अक्टूबर को करेगी राज्यस्तरीय धरना प्रदर्शन 

लोगों को गुमराह करने की भाजपा की नीति जन विरोधी एवं क्षेत्र विरोधी : कांग्रेस

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह द्वारा धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी बनाने की घोषणा तथा इसके उपरांत राज्य मंत्रिमण्डल द्वारा इसे स्वीकृति प्रदान कर इसकी अधिसूचना जारी होने से भाजपा नेता बुरी तरह बौखला गए हैं तथा नेता प्रतिपक्ष सहित आए दिन समाचार पत्रों में बेबुनियाद बयान दे रहे हैं। अन्य पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष चन्द्र कुमार चौधरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया , हिमाचल प्रदेश योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष गंगू राम मुसाफिर व 20 सूत्रीय कार्यक्रम कार्यान्वय समिति के अध्यक्ष राम लाल ठाकुर तथा राज्य द्वारा शिमला से जारी प्रेस वक्तव्य के माध्यम से कही।

ऊन्होने कहा कि धर्मशाला को प्रदेश की दूसरी राजधानी घोषित करने का प्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के निचले क्षेत्रों के लोगों को उनके घरद्वार पर प्रशासन उपलब्ध करवाना तथा राज्य को भावनात्मक रूप से एक करना है।

उन्होंने कहा कि धर्मशाला को राज्य की दूसरी राजधानी बनाने के पीछे मुख्यमंत्री की केवल यही मंशा रही है कि चम्बा, कांगड़ा, ऊना व हमीरपुर जिलों के सुदूरवर्ती क्षेत्रों के लोगों को अपने शासकीय व प्रशासकीय कार्यों के लिये शिमला न आना पड़े। यही नहीं, कांगड़ा जिला धार्मिक व साहसिक पर्यटन के लिये प्रसिद्ध है, और यहां पर्यटन की अपार संभावनाओं के चलते इसका समुचित दोहन करना भी राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है ताकि प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र से जुड़े व्यावसायों से राज्य की आर्थिकी और मजबूत हो। राज्य सरकार का उद्देश्य धर्मशाला को शीतकालीन राजधानी के तौर पर विकसित करना रहा है जिससे समीपवर्ती जिलों सहित प्रदेश के सर्वाधिक आबादी वाले कांगड़ा जिला के लोगों को निजी व प्रशासनिक कार्यों को करवाने में सहूलियत होगी और क्षेत्र के लोगों की आर्थिकी में गुणात्मक वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को उनके घर-द्वार के समीप स्वच्छ, त्वरित, पारदर्शी तथा भ्रष्टाचारमुक्त शासन सुनिश्चित बनाने के कांग्रेस सरकार के संकल्प को पूरा करने के लिये पिछले चार वर्षों के दौरान प्रदेश के विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, उप-तहसीलों, तहसीलों, लोक निर्माण व सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभागों के उपमण्डल स्तर के कार्यालय खोले गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित बनाने के लिये इस अवधि में अनेक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अलावा 45 नये कालेज व 1000 से अधिक नई पाठशालाएं खोली अथवा स्तरोन्त की गई।

पठानिया, चन्द्र कुमार, मुसाफिर व ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिमला से कोई भी कार्यालय धर्मशाला स्थानांतरित नहीं किया जाएगा और न ही यहां से स्टॉफ का वहां तबादला किया जाएगा, बल्कि इसके लिये अलग से अधोसंरचना विकसित की जाएगी। धर्मशाला में मिनी सचिवालय को सामान्य प्रशासन विभाग के तहत लाया गया है ताकि सरकार के मंत्रिगण व उच्च अधिकारी वहां बैठ कर प्रशासन चला सकें। इस बारे क्षेत्र के लोगों को गुमराह करने की भाजपा की नीति जन विरोधी एवं क्षेत्र विरोधी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने धर्मशाला में विधानसभा बनाने तथा शीतकालीन विधानसभा सत्र बुलाने में कांग्रेस सरकार के निर्णय का भी पुरजोर विरोध किया था और लोगों को गुमराह करने की भरपूर कोशिश की गई थी, लेकिन धर्मशाला में विधानसभा सत्र के दौरान कांगड़ा तथा साथ लगते जिलों के लोगों द्वारा अपने निजी व सार्वजनिक कार्य करवाने की बहुत बड़ी सुविधा उपलब्ध हुई है, जिसके लिये इन क्षेत्रों के लोगों को पहले शिमला आना पड़ता था।

युवाओं को स्वावलंबी, आत्मनिर्भर बनाने के लिये उन्हें स्वरोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। राज्य के युवाओं के कौशल उन्नयन के लिये 1140 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है और आने वाले वर्षों में 60000 युवाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें स्वावलंबी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पढ़े लिखे नौजवानों के लिये बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करने के अपने वायदे को कांग्रेस सरकार ने पूरा किया है और राज्य के डेढ़ लाख युवाओं को यह भत्ता इसी वर्ष प्रदान किया जाएगा जो एक ऐतिहासिक कदम है और राज्य के लोगों का इसके लिये भरपूर समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा नेताओं को यह भी अखर रहा है और ये नेता युवाओं को स्वावलंबन के बजाए उनमें नशे जैसी बुराईयों के होने की बात करते हैं।

प्रदेश में माफिया राज के आरोप पर उन्होंने कहा कि भाजपा नेता अनावश्यक तौर पर इस मामले को हवा दे रहे हैं ताकि वे राजनीतिक लाभ ले सकें। लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश में इस तरह की कोई स्थिति नहीं है। प्रदेश में नशे के व्यापार से सम्बन्धी आरोप पूर्णतः निराधार हैं और राज्य सरकार नशाखोरी पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठा रही है। इसके लिए सरकारी स्तर पर विशेष प्रावधान किए गए हैं तथा पुलिस और ड्रग्स विभाग द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किए जा रहे हैं। इसके अलावा सरकारी विभागों और गैर सरकारी संस्थानों के सहयोग से प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

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