शूलिनी विवि में बौद्धिक संपदा अधिकार और भौगोलिक संकेतक पर कार्यशाला आयोजित

शूलिनी विवि में बौद्धिक संपदा अधिकार और भौगोलिक संकेतक पर कार्यशाला आयोजित

  • छात्रों में आईपीआर जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता : विशेषज्ञ
  • कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों और शिक्षाविदों के बीच आई.पी.आर. और जी.आई. के बारे में जागरुकता लाना
  • संयुक्त सदस्य सचिव कुणाल सत्यर्थी विशेष रूप से मुख्य अतिथि रहे
  • निदेशक डॉ. बंसल ने छात्रों और वैज्ञानिकों को आईपीआर के महत्व पर डाला प्रकाश, शूलिनी के अन्वेषकों को किया सम्मानित
छात्रों में आईपीआर जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता : विशेष

छात्रों में आईपीआर जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता : विशेष

शिमला : ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था धन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और बौद्धिक संपदा (आईपी) कानूनी रूप से इस ज्ञान की सुरक्षा के लिए एक विधि है। यह विचार विशेषज्ञों द्वारा शूलिनी विश्वविद्यालय में आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार (आई.पी. आर) और भौगोलिक संकेतक (जी.आई) पर आधारित एक कार्यशाला के दौरान द्वारा व्यक्त किए गए।

इस कार्यशाला का आयोजन शूलिनी विश्वविद्यालय के अप्लाइड साइन्स और बायोटेकनोलोजी संकाय, आइपीआर सेल और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण राज्य परिषद (एस.सी.एटी.ई.) द्वारा स्युंक्त रूप से करवाया गया। इस कार्यक्रम में 225 से अधिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों और शिक्षाविदों के बीच आई.पी.आर. और जी.आई. के बारे में जागरुकता लाना है।

इस अवसर पर एससीएसटीई के संयुक्त सदस्य सचिव कुणाल सत्यर्थी विशेष रूप से मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पेटेंट सूचना केंद्र (एच॰पी॰पी॰आई॰सी) और एससीएसटीई की भूमिका के बारे में दर्शकों को बताया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान की रक्षा के लिए सरकार द्वारा ग्राम पंचायत स्तर पर जैव विविधता बोर्ड बनाने के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने युवाओं में आईपीआर जागरुकता पैदा करने और पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और जीआई के बारे में वैज्ञानिक स्वभाव को प्रज्वलित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

अन्य प्रमुख वक्ताओं में एससीएसटीई के डॉ. अर्चना ठाकुर और अंकुश ने पूर्व कला खोज और ट्रेडमार्क की भूमिका और महत्व के बारे में बताया, जबकि एम॰ए॰यू बड्डी के डॉ नंदन ने कॉपीराइट के महत्व पर बात की। कॉर्पोरेट आईपी कंसल्टेंट्स, चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. परीक्षित बंसल ने छात्रों और वैज्ञानिकों को आईपीआर के महत्व पर प्रकाश डाला और शूलिनी के अन्वेषकों को सम्मानित किया।

  • वर्ष 2015 में स्थापित हुआ था शूलिनी विश्वविद्यालय का पेटेंट सेल

आईपीआर सेल के समन्वयक प्रोफेसर कमल देव ने कार्यशाला के बारे में जानकारी देते हुए उन अत्याधुनिक अनुसंधान क्षेत्रों पर प्रकाश डाला जिसमें शूलिनी विश्वविद्यालय ने 37 भारतीय और तीन अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट दायर किए है।

शूलिनी विश्वविद्यालय का पेटेंट सेल वर्ष 2015 में स्थापित हुआ था। दो वर्षों से भी कम समय में इस सेल ने दवा विकास, प्रभावी निदान और चिकित्सा विज्ञान, जल और प्रवाह उपचार, औद्योगिक एंजाइम, फाइटोमेडीसिन इत्यादि में अनुसंधान कर पैटंट दायर किए हैं। इसी के कारण शूलिनी को डीएसटी प्रायोजित आईपीआर सेल भी स्वीकृत हुआ है। यह सेल एच॰पी॰पी॰आई॰सी और एससीएसटीई के सहयोग में काम करता है।

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