सभी ग्रहों के मूलभुत उपाय व ज्योतिष विज्ञान : कालयोगी आचार्य महिन्दर कृष्ण शर्मा

ग्रहों के मुलभूत उपाय व ज्योतिष विज्ञान : कालयोगी आचार्य महिन्दर कृष्ण शर्मा

  • गृह से सम्बंधित रोगों के लिए रत्न-उपरत्न, जड़ी बूटियां व दान उपाय
 गृह से सम्बंधित रोगों के लिए रत्न-उपरत्न, जड़ी बूटियां व दान उपाय

गृह से सम्बंधित रोगों के लिए रत्न-उपरत्न, जड़ी बूटियां व दान उपाय

चिकित्सा ज्योतिष में हर ग्रह शरीर के किसी ना किसी अंग से संबंधित होता है। कुंडली में जब संबंधित ग्रह की दशा होती है और गोचर भी प्रतिकूल चल रहा होता है तब उस ग्रह से संबंधित शारीरिक समस्याओं से व्यक्ति को होकर गुजरना पड़ सकता है। मनुष्य के मन, मस्तिष्क और शरीर पर मौसम, ग्रह और नक्षत्रों का प्रभाव लगातार रहता है। ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति के शरीर का संचालन भी ग्रहों के अनुसार होता है। आइए ग्रह और उनसे संबंधित होने वाले रोगों के बारे व सभी ग्रहों के मुलभूत उपायों के बारे में आपको कालयोगी आचार्य महिन्दर कृष्ण शर्मा विस्तार पूर्वक जानकारी दे रहे हैं।

सूर्य गृह से सम्बंधित :- रोग : सिरदर्द, ज्वर, नैत्रविकार, मधुमेय, पित्त रोग, हैजा, हिचकी आदि।

रत्न उपरत्न : माणिक्य, लालड़ी, तामडा, महसूरी।

जड़ी बूटियां : बेलपत्र की जड़।

दान : गेंहू, लाल और पीले मिले हुए रंग के वस्त्र, लाल फल लाल मिठाई, सोने के कण, गाय, गुड़ और तांबा।

चन्द्रमा से सम्बंधित :- रोग : तिल्ली, पांडू, यकृत, कफ, उदार सम्बन्धी विकार, मनोविकार।

रत्न उपरत्न : मोती, निमरू, चंद्रमणि, सफ़ेद पुखराज, ओपल।

जड़ी बूटियां: खिन्नी की जड़।

दान : चावल, श्वेत वस्त्र, कपूर, चांदी, शुद्ध, सफ़ेद चन्दन, वंश फल, श्वेत पुष्प, चीनी, वृषभ, दधि, मोती आदि।

मंगल से सम्बंधित :- रोग : पित्त, वायु, कर्ण रोग, गुणगा, विशुचिका, खुजली, रक्त सम्बन्धी बीमारियां, प्रदर, राज, अंडकोष रोग, बवासीर आदि।

रत्न- उपरत्न : मूंगा, विद्रुम।

जड़ी बूटियां : अनंत मूल की जड़।

दान : लाल मक्का , लाल मसूर , लाल वस्त्र , लाल फल , लाल पुष्प।

बुध से सम्बंधित :- रोग : खांसी, ह्रदय रोग, वातरोग, कोढ़, मन्दाग्नि, श्वास रोग, दम, गूंगापन।

रत्न-उपरत्न : पन्ना, संग पन्ना, मरगज तथा ओनिक्स।

जड़ी बूटियां : विधारा की जड़।

दान : हरी मुंग, हरे वस्त्र, हरे फल, हरी मिठाई, कांसा पीतल, हाथी दांत, स्वर्ण कपूर, शस्त्र, षटरस भोजन, घृत आदि।

वृहस्पति से सम्बंधित :-  रोग: कुष्ठ रोग, फोड़ा, गुल्म रोग, प्लीहा, गुप्त स्थानों के रोग।

जड़ी बूटियां : नारंगी या केले की जड़।

दान : चने की दल, पीले वस्त्र, सोना, हल्दी, घी, पीले वस्त्र, अश्व, पुस्तक, मधु, लवण, शर्करा, भूमि छत्र आदि।

शुक्र से सम्बंधित :- रोग : प्रमेह, मंद बुद्धि, वीर्य विकार, नपुंसकता, वीर्य का इन्द्रिय सम्बन्धी रोग।

रत्न-उपरत्न : हिरा, करगी, सिग्मा।

जड़ी बूटियां : सरपोखा की जड़।

दान : चावल, चांदी, घी, सफ़ेद वस्त्र, चन्दन, दही, गंध द्रव्य, चीनी, गाय, जरकन, सफ़ेद पुष्प आदि।

शनि से सम्बंधित :- रोग : उन्माद, वाट रोग, भगंदर, गठिया, स्नायु रोग, टीबी, केंसर, अल्सर।

रत्न-उपरत्न : नीलम, नीलिमा, जमुनिया, नीला कटहल।

जड़ी-बूटियां : बिच्छु बूटी की जड़ या शमी की जड़।

दान : काले चने, काले कपड़े, जामुन फल, काला उड़द, काली गाय, गोमेद, काले जूते, तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, उड़द, कुलथी, काले पुष्प, कस्तूरी सुवर्ण।

राहु से सम्बंधित :- रोग : अनिंद्रा, उदर रोग, मस्तिष्क रोग, पागलपन।

जड़ी-बूटियां : सफ़ेद चन्दन।

रत्न-उपरत्न : गोमेद, तुरसा, साफा।

दान : अभ्रक, लौह, तिल, नीला वस्त्र, छाग, ताम्रपत्र, सप्त धान्य, उड़द, कम्बल, जोऊ, तलवार।

केतु से सम्बंधित :- रोग : चर्म रोग, मस्तिष्क तथा उदर सम्बन्धी रोग, जटिल रोग, अतिसार, दुर्घटना, शल्य क्रिया आदि।

रत्न-उपरत्न : वैदूर्य, लहसुनिया, गोदंती संगी।

जड़ी बूटियां : असगंध की जड़।

दान : कस्तूरी तिल , छाग , कला वस्त्र , ध्वज , सप्त धान्य , उड़द , कम्बल।

रोग की हालत में ग्रह का प्रकोप अर्थात ग्रह की महादशा, अन्तर्दशा लगी हुई समझनी चाहिए। यदि कोई ग्रह उच्च राशि का है तो उसे मजबूत किया जाता है। मंत्र जाप, रत्न ,एवं जड़ी बूटियां धारण करनी चाहिए। इससे रोग हल्का होगा और ठीक होने लगेगा। रत्न-उपरत्न सम्बंधित ग्रह के वार व नक्षत्र में धारण करने चाहिए। यदि कोई ग्रह नीच का है तो उसका दान संकल्प करके ब्राह्मण या जरूरतमंद को श्रद्धापूर्वक देना चाहिए।  

  • सूर्यादि नवग्रह जनित पीड़ा एवं निदान

 सूर्य ग्रह पीड़ित होने पर परेशानियां : पिता से मनमुटाव, सरकारी कार्यों में परेशानी/ सरकारी नौकरी में परेशानी, सिरदर्द, नेत्र रोग, ह्रदयरोग, चर्मरोग, अस्थि रोग, रक्तचाप आदि।

उपाय : आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें, सुबह-सवेरे सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं। लाल पुष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल, माणिक रत्न धारण करें।

चन्द्रमा ग्रह पीड़ित होने पर परेशानियां : माता से संबधों में मनमुटाव, मानसिक परेशानियां, नींद का ना आना, कफ, सर्दी, जुकाम आदि रोग मासिक धर्म संबंधी रोग, पित्ताशय में पथरी, निमोनिया, रक्त विकार आदि।

उपाय : माता का सम्मान करें, चांदी, चावल और दूध का दान करे, पूर्णिमा में चन्द्र को अर्क दें व चांदनी रात में घूमे, मोती रत्न धारण करें।

मंगल ग्रह पीड़ित होने पर परेशानियां : क्रोध की अधिकता, भाइयों से संबंध में मनमुटाव, समय-समय पर छोटी मोटी दुर्घटनाएं, रक्त विकार, फोड़ा फुंसी, बवासीर, चेचक आदि रोगों का प्रकोप।

उपाय : भाई का सम्मान करें,  हनुमान चालीसा पढ़ें, लाल मसूर की दाल बहते पानी में बहाये,  मूंगा रत्न धारण करे।

बुध ग्रह पीड़ित होने पर परेशानियां : विद्या/ बुद्धि सम्बन्धी परेशानी, गले के रोग, नाक के रोग, उन्माद की स्थिति, मती भ्रम, व्यवसाय में हानि, विचारों में द्वन्द / अस्थिरता।

उपाय : बेटी, बुआ, मौसी, बहन का सम्मान करें, सुराख़ वाला तांबे का पैसा बहते पानी में बहाये, माँ दुर्गा /गणेश जी की आराधना करें व पन्ना रत्न धारण करें।

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