"श्री महाशिवरात्रि" व्रत महिमा : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

“श्री महाशिवरात्रि” व्रत महिमा : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने के बाद विधि-विधान से उद्यापन कर देना चाहिए : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने के बाद विधि-विधान से उद्यापन कर देना चाहिए : आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा

फाल्गुन अर्थात फरवरी मास में मनाया जाने वाला त्यौहार शिवरात्रि पूरे हिमाचल में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मन्दिरों में भी शिव पूजन को बहुत महत्व दिया जाता है। यह त्यौहार फाल्गुन के कृष्णपक्ष के उतरार्द्ध में चौदहवें दिन मनाया जाता है। कुछ लोग इस दिन निर्जला व्रत रखते हैं। फाल्‍गुन के महीने की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था। जिससे चतुर्दर्शी के दिन महाशिवरात्रि मनाई जाती है। यह पर्व हर साल फाल्गुन माह में 13वीं रात या 14वें दिन मनाया जाता है। इस रात भगवान शिव तांडव नृत्‍य करते हैं। जिससे लोग इस पर्व पर पूरी रात जागकर भगवान शिव की पूजा-अराधना कर भजन आदि गाते हैं। आचार्य महिंदर कृष्ण शर्मा महाशिवरात्री व्रत का महात्म्य, व्रत विधि, शिव अभिषेक विधि व पूजन करने के विधि-विधान के विषय में विस्तारपूर्वक बता रहे हैं।

शिवरात्री व्रत की महिमा: इस व्रत के विषय में यह मान्यता है कि इस व्रत को जो जन करता है उसे सभी भोगों की प्राप्ति के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत सभी पापों का क्षय करने वाला है व इस व्रत को लगातार 14 वर्षों तक करने के बाद विधि-विधान के अनुसार इसका उद्यापन कर देना चाहिए।

व्रत का संकल्प: व्रत का संकल्प सम्वत, नाम, मास, पक्ष, तिथि-नक्षत्र, अपने नाम व गोत्रादि का उच्चारण करते हुए करना चाहिए महाशिवरात्री के व्रत का संकल्प करने के लिये हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि सामग्री लेकर शिवलिंग पर छोड़ दी जाती हैं

महाशिवरात्री व्रत की सामग्री : उपवास की पूजन सामग्री में जिन वस्तुओं को प्रयोग किया जाता हैं, उसमें पंचामृ्त (गंगाजल, दुध, दही, घी, शहद), सुगंधित फूल, शुद्ध वस्त्र, बिल्व पत्र, धूप, दीप, नैवेध, चंदन का लेप, ऋतुफल आदि।

महाशिवरात्री व्रत की विधि : महाशिवरात्री व्रत को रखने वाले जन को उपवास के पूरे दिन भगवान भोले नाथ का ही ध्यान करना चाहिए। प्रात: स्नान करने के बाद भस्म का तिलक कर रुद्राक्ष की माला धारण की जाती है। इसके ईशान कोण दिशा की ओर मुख कर शिव का पूजन धूप, पुष्पादि व अन्य पूजन सामग्री से पूजन करना चाहिए। इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है, प्रत्येक पहर की पूजा में “ॐ नम: शिवाय” व ” शिवाय नम:” का जाप करते रहना चाहिए। अगर शिव मंदिर में यह जाप करना संभव न हो तो घर की पूर्व दिशा में किसी शान्त स्थान पर जाकर इस मंत्र का जाप किया जा सकता है। चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुन्य प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त उपवास की अवधि में रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते हैं।

शिव अभिषेक विधि: महाशिव रात्रि के दिन शिव अभिषेक करने के लिये सबसे पहले एक मिट्टी का बर्तन लेकर उसमें पानी भरकर, पानी में बेलपत्र, आक धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग को अर्पित करेंउसके उपरांत व्रत के दिन शिवपुराण का पाठ सुनना चाहिए मन में असात्विक विचारों को आने से रोकना चाहिए शिवरात्रि के अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन करके व्रत समाप्त करें।

पूजन करने का विधि-विधान : महाशिवरात्री के दिन शिवभक्त का जमावड़ा शिव मंदिरों में विशेष रुप से देखने को मिलता है भगवान भोले नाथ अत्यधिक प्रसन्न होते हैं, जब उनका पूजन बेल-पत्र आदि चढ़ाते हुए किया जाता है व्रत करने और पूजन के साथ रात्रि जागरण भी किया जाये तो यह व्रत ओर अधिक शुभ फल देता है इस दिन भगवान शिव की शादी हुई थी इसलिये रात्रि में शिव की बारात निकाली जाती है सभी वर्गों के लोग इस व्रत को कर पुण्य प्राप्त करते हैं

Pages: 1 2 3

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *