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“सांगला” किन्नौर की खूबसुरत घाटी

  • उपजाऊ भूमि के लिए लोकप्रिय सांगला
  • पाइन नट के बगीचे, सेब और चेरी के सुंदर पेड़ के लिए प्रसिद्ध सांगला
उपजाऊ भूमि के लिए लोकप्रिय सांगला

उपजाऊ भूमि के लिए लोकप्रिय सांगला

हिमाचल प्रदेश के ज़िला किन्नौर में बसी है सांगला घाटी। सांगला ऊंचे पर्वतों और वनाच्छादित से घिरा शहर है। बस्पा की घाटी में स्थित यह जगह तिब्बती सीमा के निकट स्थित है। इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता अदभुत है जैसे कि यह ग्रेटर हिमालय में बसा है और वन ढलानों और पहाड़ों से छाया हुआ है। 1989 तक बाहरी व्यक्ति भारत सरकार के इज़ाजत के बिना भारत-चाईना/तिब्बत सीमा रेखा के कारण घाटी में प्रवेश नहीं कर सकता था। यहां के लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है तथा सेब यहां की प्रमुख नकदी फसल है। यहां सर्वोतम किस्म के आलू पाए जाते हैं जो कि क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। शीतकाल (दिसम्बर-मई) में भारी हिमपात के दौरान घाटी छ: महीने के लिए बंद रहती है। सांगला घाटी का सफर करछम से शुरु होते हुए छितकुल में खत्म होता है। घाटी सेब के बागों, खुबानी, अखरोट, देवदार के वृक्षों, हिमसरिता के लिए मशहूर है। घाटी के साथ स्थित है हाइडल प्रोजेक्ट जो कि 2009 में पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त कामरु किला, माता देवी मंदिर, नाग मंदिर मुख्य आकर्षण का केंद्र है। छितकुल, रकछम, बतसरी, थेमगरंग, कामरु और सपनी घाटी के मुख्य गांवों में से एक है। यहाँ की जनसंख्या का कुछ भाग पर्यटन पर निर्भर करता है। भारत-तिब्बत सड़क सांगला को करछम राष्ट्रीय राजमार्ग 22 से जोड़ता है। यहां के स्थानीय लोगों की सुनिश्चित संस्कृति है तथा वह किन्नौरी भाषा का प्रयोग करते है।

  • किन्नौर क्षेत्र में सांगला सबसे बड़ा एवं दर्शनीय गांव

    पाइन नट के बगीचे, सेब और चेरी के सुंदर पेड़ के लिए प्रसिद्ध सांगला

    पाइन नट के बगीचे, सेब और चेरी के सुंदर पेड़ के लिए प्रसिद्ध सांगला

सांगला उपजाऊ भूमि के लिए लोकप्रिय है। यह गांव ढलान पर बसा हुआ है जिसके पीछे रालदांग पर्वत की विशाल चोटियां देखी जा सकती हैं। यहां के जंगलों और सदैव बर्फ से आच्छादित पर्वत चोटियों की सुंदरता इसे अन्य स्थानों से अलग बनाती है। बस्पा नदी के बहने के कारण इस स्थान को बस्पा घाटी भी कहा जाता है। यह घाटी किन्नौर जिले की सबसे खूबसूरत घाटियों में एक है। सांगला (2,860 मी.) किन्नौर क्षेत्र में सबसे बड़ा एवं दर्शनीय गांव हैं, जो करछम से 18 कि.मी. दूर है। यहां केसर के खेत, फलोद्यान और ऊपर जाने पर अल्पास के चरागाह हैं। किन्नौर कैलाश चोटी मन मोह लेती है। यहां से काली देवी का किले जैसा मंदिर ‘कमरू फोर्ट‘ भी देखा जा सकता है।

  • रॉक और छम के मिलन से हुआ रकछम का नामकरण
  • साढ़े दस हजार फीट की ऊंचाई पर चीन की सीमा के साथ सटा छितकुल

सांगला से 14 किलोमीटर आगे रकछम गांव है। समुद्र तल से करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित रकछम का नामकरण रॉक और छम के मिलन से हुआ है। रॉक अर्थात चट्टान या पत्थर और छम यानी पुल। कहते हैं कभी यहां पत्थर का पुल हुआ करता था, जिस वजह से गांव का नाम ही रकछम पड़ गया। रकछम से 12 किलोमीटर दूर किन्नौर जिले का आखिरी गांव है छितकुल। यह गांव लगभग साढ़े दस हजार फीट की ऊंचाई पर चीन की सीमा के साथ सटा है। इसकी आबादी पांच सौ के करीब होगी। यहां करीब साठ-सत्तर घर हैं। एक ओर बस्पा नदी बहती है तो दूसरी ओर दैत्याकार पहाड़ दिखते हैं। साल में चार माह से ज्यादा यह हिमपात के कारण दुनिया से कटा रहता है। उत्तराखण्ड के गंगोत्री

किन्नौर क्षेत्र में सांगला सबसे बड़ा एवं दर्शनीय गांव

किन्नौर क्षेत्र में सांगला सबसे बड़ा एवं दर्शनीय गांव

और चीन के तिब्बत इलाके से सटे इस गांव में आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी, पशु चिकित्सालय, ब्रांच पोस्ट ऑफिस, पुलिस पोस्ट और स्कूल जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं। सांगला के बाद दूसरी खूबसूरत घाटी कल्पा है, लेकिन कल्पा पहुंचने के लिये पहले फिर से करछम लौटना पड़ता है। करछम से करीब 20 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद आता है पियो और यहां से 15 किलोमीटर आगे कल्पा है। दुर्गम चढ़ाई तय करने के बाद जब सैलानी कल्पा पहुंचता है, तो एक शहर सरीखा कस्बा देख उसकी बांछें खिल जाती हैं। यही कल्पा किन्नौर घाटी का मुख्यालय है और यहां सभी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। कहते हैं कि यहां मूसलाधार बरसात नहीं होती बल्कि हल्की-हल्की सी फुहारें पड़ती हैं। यहां के झरनों की छटा निराली है। ये गुनगुनाते झरने यहां सैलानी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं, वही यहां के खेतों और बागों को सींचते भी हैं।

  • पाइन नट के बगीचे, सेब और चेरी के सुंदर पेड़ के लिए प्रसिद्ध सांगला

भारत-चीन सीमा पर अपनी स्थिति की वजह से 1989 तक इस स्थान के दौरे के लिये, यात्रियों को भारत सरकार से एक विशेष अनुमति लेनी पड़ती थी। हालांकि बाद में इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये इस नियम को समाप्त कर दिया गया। यह जगह अपने पाइन नट के बगीचे और सेब और चेरी के सुंदर पेड़ के लिए प्रसिद्ध है।

  • छितकुल, करछम और बटसेरी सांगला के लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण

        छितकुल, करछम और बटसेरी सांगला के लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण

    छितकुल, करछम और बटसेरी सांगला के लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण

छितकुल, करछम और बटसेरी जैसे गांव सांगला के लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण हैं। कामरू किला भी जो अब एक हिंदू देवी कामाक्षी को समर्पित मंदिर में बदल गया है, यहां का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यह मंदिर बीते युग की कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करता है। यात्री मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित देवी की एक बड़ी छवि को देख सकते हैं। एक हिंदू देवी छितकुल माथी, लोकप्रिय रूप में माता देवी के रूप में जाना जाता है, को समर्पित मंदिर सांगला का एक और लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। प्रत्येक वर्ष एक बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवता को अपनी प्रार्थना की पेशकश के लिये इस मंदिर की यात्रा करते हैं।

  • पूरा क्षेत्र सुंदर पाइन के पेड़ों और ओक जंगलों के बीच स्थित

सांगला से बह रही बस्पा नदी भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में माना जाता है क्योंकि यह मछली पकड़ने, ट्रैकिंग और डेरा डालने जैसी गतिविधियों का आनंद उठाने की एक आदर्श जगह है। पूरा क्षेत्र सुंदर पाइन के पेड़ों और ओक जंगलों के बीच स्थित है और ग्लेशियर नदियां और जंगलों की उपस्थिति इस जगह की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। खरीदारी में रुचि रखने वाले यात्री बटसेरी गांव से, जो सांगला से लगभग 8 किमी की दूरी पर स्थित है, हस्तनिर्मित शॉल और किन्नौरी टोपियां खरीद सकते हैं।

  • बटसेरी गांव ही एक ऐसी जगह, जहां उगता है प्रसिद्ध फल चिलगोजा

बटसेरी गांव काफी लोकप्रिय है क्योंकि यह एक ही जगह है जहां प्रसिद्ध फल, चिलगोजा या पाइन नट उगता है। सांगला के पास स्थित कुछ अन्य लोकप्रिय स्थान सपनी, कांडा और ट्राउट फार्म हैं। क्षेत्र की प्राचीन लकड़ी वास्तुकला, जो मध्यकालीन युग की कला को दर्शाती है, भी पर्यटकों की एक बड़ी संख्या को आकर्षित करती है।

  • लोकप्रिय आकर्षण लकड़ी पर नक्काशी का तिब्बती केंद्र

    पूरा क्षेत्र सुंदर पाइन के पेड़ों और ओक जंगलों के बीच स्थित

    पूरा क्षेत्र सुंदर पाइन के पेड़ों और ओक जंगलों के बीच स्थित

सांगला का एक अन्य लोकप्रिय आकर्षण लकड़ी पर नक्काशी का तिब्बती केंद्र है जहां सुंदर हाथ के नक्काशीदार आइटम उपलब्ध हैं। ये इस क्षेत्र के मूल निवासी की कला का प्रतिनिधित्व करते हैं। सांगला के लिए निकटतम हवाई बेस शिमला में जुबरहट्टी हवाई अड्डा, जो लगभग 238 किमी. की दूरी पर स्थित है।

  • कैसे पहुंचे सांगला

सांगला तक पहुँचने के लिए यात्रियों को हवाई अड्डे के बाहर से एक उचित लागत पर किराये की टैक्सियां और कैब उपलब्ध हैं। ऐसे व्यक्ति जो रेल से यात्रा करना चाहते हैं, कालका रेलवे स्टेशन तक शिमला से सीधे जुड़ा छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन है, अपने टिकट बुक कर सकते हैं। सांगला के लिये शिमला का रेलवे स्टेशन निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो प्रमुख भारतीय शहरों के साथ जुड़ा हुआ है। सांगला के लिए निजी एवं राज्य स्वामित्व की बसें चंडीगढ़ से आसानी से उपलब्ध हैं। सांगला की जलवायु सर्दियों को छोड़कर साल भर सुखद रहती है।

  • मानसून और गर्मियां यहां आने के लिए आदर्श मानी जाती हैं

गर्मियों के दौरान तापमान 8 डिग्री सेल्सियस और 30 डिग्री सेल्सियस के बीच सुखद रहता है। मानसून में सांगला के क्षेत्र में कम वर्षा होती है। इस क्षेत्र में सर्दियां अत्यंत ठंडी होती हैं, इसलिए इस समय के दौरान इस जगह का दौरा नहीं करने की सिफारिश की जाती है। इस दौरान इस जगह का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस और -10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। मानसून और गर्मियों को इस खूबसूरत मंजिल पर आने के लिए आदर्श माना जाता है।

 

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One Response

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  1. SUNIL Mittal
    Jun 07, 2017 - 06:46 PM

    Just a beautiful place, and just a color of beauty.

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