हिमाचल मंत्रिमण्डल के निर्णय: 3000 दैनिकभोगी जलवाहकों एवं सेवादारों तथा अशंकालीन जलवाहकों की सेवाएं नियमित

हिमाचल मंत्रिमण्डल के निर्णय: 3000 दैनिकभोगी जलवाहक, सेवादार व अशंकालीन जलवाहक नियमित

शिमला: हिमाचल प्रदेश मंत्रिमण्डल की आज यहां आयोजित बैठक में उच्च/प्रारम्भिक शिक्षा विभागों में वर्ष 1996 तथा वर्ष 2001 नीति के अन्तर्गत कार्यरत लगभग 3000 दैनिकभोगी जलवाहकों एवं सेवादारों तथा अशंकालीन जलवाहकों की सेवाएं नियमित करने को मंजूरी प्रदान की गई। इससे राज्य पर 60 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जिन्होंने 31 मार्च, 2016 तथा 30 सितम्बर, 2016 को 14 वर्ष का नियमित सेवाकाल पूरा कर लिया है, उन्हें प्रदेश भर में उपलब्ध रिक्तियों के विरूद्ध सेवादार (चतुर्थ श्रेणी) के पदों पर नियमित किया जाएगा।

  • मंत्रिमण्डल ने विभिन्न श्रेणियों के 54 निजी अधिसंख्या पदों का सृजन कर 64 दैनिकभोगी कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का निर्णय लिया, जिनमें 32 मामलों में शैक्षणिक योग्यता में छूट प्रदान की गई है।
  • मंत्रिमण्डल की बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने की।
  • मंत्रिमण्डल ने सरकारी भूमि पर (लघु एवं सीमांत किसानों के लिए कुछ मामलों में) हिमाचल प्रदेश मालिकाना अधिकार प्रदान करने के लिए योजना-2017 बनाने का निर्णय लिया।
  • हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 28 अगस्त, 2015 को एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें कहा गया है कि हालांकि सरकार सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों पर उपयुक्त वैद्धिक कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही सरकार लघु एवं मझौले किसानों, भूमिहीनों, आवासहीनों, गरीब तथा समाज के पिछड़े वर्गों के कल्याण के प्रति भी संवेदनशील है। समाज के इन वर्गों, जिन्होंने बाध्यता तथा बेबसी के कारण सरकारी भूमि पर कब्जा किया है, की समस्याओं के दृष्टिगत सदन ने उन्हें राहत प्रदान करने के लिए एक उपयुक्त नीति बनाने का प्रस्ताव पास किया।
  • मंत्रिमण्डल ने पतंजलि योगपीठ न्यास हरिद्धार (उत्तराखण्ड) के पट्टे को रद्द करने के निर्णय पर पुनःविचार करने के अनुरोध पर विचार करने का निर्णय लिया, वशर्ते न्यास उच्च न्यायालय में फाईल की गई सीडब्ल्यूपी को वापिस लेता है।
  • बैठक में राज्य की महिलाओं, जिन्होंने हिमाचल से बाहर स्थायी आवास वाले व्यक्ति से शादी की है, को हिमाचली प्रमाण पत्र जारी करने का महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया। यह निर्णय उन्हें आजीवन सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।
  • मंत्रिमण्डल ने चिकित्सा सेवा से जुड़े व्यक्तियों के विरूद्ध हिंसा रोकने तथा राज्य में चिकित्सा सेवा संस्थानों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा कारावास व जुर्माने की सजा और चिकित्सा सेवा संस्थानों में अपराधियों द्वारा सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए क्षतिपूर्ति की अदायगी के प्रावधान सहित इसे संज्ञेय तथा गैर जमानती अपराध बनाने के लिए आगामी विधानसभा सत्र में प्रारूप विधेयक (हिंसा रोकने एवं सम्पत्ति को नुकसान पर अंकुश लगाने संबंधी अधिनियम-2009) प्रस्तुत करने को अपनी मंजूरी प्रदान की।
  • बैठक में विस्थापितों/विस्थापित व्यक्तियों के लिए पुनर्वास योजना के अन्तर्गत कुल्लू जिले की निरमंड तहसील के आवेरी गांव में भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया। वर्ष 1998-99 के दौरान आवेरी गांव में भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से निजी भूमि का अधिग्रहण किया था। भारत सरकार ने कुल भूमि में से 165-16 बीघा भूमि ग्रामीणों के पुनर्वास एवं पुनःस्थापना के अन्तर्गत राज्य सरकार के नाम हस्तांतरित की है।
  • मंत्रिमण्डल ने पंचायत पशुधन पुरस्कार योजना को स्वीकृति प्रदान की। इस योजना के अन्तर्गत प्रत्येक विकास खण्ड में उन दो पंचायतों, जिन्होंने पशुओं का 100 प्रतिशत पंजीकरण तथा टैटू निशान लगाए हैं और पशुओं को आवारा छोड़ने का कोई मामला नहीं है, को 5-5 लाख रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
  • बैठक में ग्राम पंचायत मंत, उपरली बडोल, सकोह, जटेहर, सिद्धपुर, खनियारा, गबलीडारी, सिद्धबाड़ी तथा धर्मशाला नगर निगम के साथ लगते क्षेत्रों को भूमि तथा भवनों पर कर रियायत को मंजूरी प्रदान की गई, क्योंकि ये क्षेत्र नगर निगम के निर्माण के बाद नगर निगम परिधि में शामिल किए गए हैं।
  • मंत्रिमण्डल ने सामाजिक सुरक्षा पैंशन का वितरण मनीआर्डर से आधार लिंकड़ डाकघर बचत खातों के माध्यम से करने को अपनी मंजूरी प्रदान की। सभी सामाजिक सुरक्षा पैंशन खाते 31 मार्च, 2017 तक आधार से जुड़ जाएंगे।
  • महिला-पुरूष लिंग अनुपात के संतुलन को बनाए रखने तथा लड़कियों के समग्र विकास के लिए बेहतर माहौल प्रदान करने तथा ऐसी गतिविधियों को रोकने तथा हतोत्साहित करने, जो लड़कियों/महिलाओं के लिए कानून के विरूद्ध हो अथवा पुरूष-महिला अनुपात को हासिल करने व बनाए रखने में बाधक हो, मंत्रिमण्डल ने पंचायत बालिका गौरव पुरस्कार योजना को स्वीकृति प्रदान की, जिसके अन्तर्गत श्रेष्ठ लिंग अनुपात बनाए रखने के लिए पंचायत को 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
  • बैठक में शिमला जिले के सराहन स्थित श्री भीमा काली मन्दिर के आस-पास की भूमि का अधिग्रहण कला, भाषा एवं संस्कृति विभाग के नाम करने का निर्णय लिया। यह निर्णय मन्दिर का संरक्षण करने तथा इसके सौन्दर्यकरण की संभावना तथा सुरक्षा के दृष्टिगत लिया गया।

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