स्वंतत्रता सेनानियों की सम्मान राशि में बढ़ोतरी

स्वतंत्रता सेनानी की ‘सम्मान राशि’ में वृद्धि, विधवाओं और अविवाहित पुत्रियों की पेंशन 15 हजार रुपये, पुत्रियों तथा पौत्रियों के विवाह की अनुदान राशि बढ़ाकर 31 हजार रुपये

  • स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं, अविवाहित पुत्रियों की पेंशन तथा विवाह अनुदान के साथ-साथ अंतिम संस्कार की सहायता राशि में भी वृद्धि

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने आज यहां कांगड़ा ज़िला के ज्वालामुखी में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता सेनानी सम्मेलन के अवसर पर संबोधित करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों की ‘सम्मान राशि’ को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं और अविवाहित पुत्रियों की पेंशन को 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों की अंतिम संस्कार राशि को 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं की अंतिम संस्कार राशि को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने पुत्रियों तथा पौत्रियों के विवाह की अनुदान राशि को 21 हजार रुपये से बढ़ाकर 31 हजार रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी कल्याण बोर्ड में स्वतंत्रता सेनानियों के वार्डों से दो सदस्यों को नामित तथा राजस्व दस्तावेजों में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को स्थाई रूप से दर्ज करने की भी घोषणा की।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरी में बैकलॉग को शीघ्रातिशीघ्र समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने छः महीनों के भीतर स्वतंत्रता सेनानियों के घर तक जाने वाली सड़कों के लंबित पड़े निर्माण कार्य को पूर्ण करने तथा सरकारी नौकरी में वर्तमान दो प्रतिशत आरक्षण में स्वतंत्रता सेनानियों की विवाहित पुत्रियों तथा पौत्रियों को लाने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता को वास्तविकता का रूप दिया है, जिसके लिए हम उनका सम्मान करते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा गुलामी स्वीकार न करना तथा एक संगठित तथा स्वतंत्र राष्ट्र की दूरदर्शिता की बदौलत आज हम यहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से ही ब्रिटिश राज से भारत को स्वतंत्रता दिलाने में सफलता हासिल हुई है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अज्ञात तथा गुमनाम नायकों को हम आज यहां नम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से स्वतंत्र भारत का विकास हुआ है तथा आज इस अवसर पर हमारे बीच बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों की उपस्थिति से हम धन्य हैं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि हमारी स्वतंत्रता बड़े संघर्ष के बाद प्राप्त हुई है तथा भारत के सच्चे नागरिक होने के नाते हमें निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर अपनी परम्पराओं, रीति-रिवाजों, भाषा तथा स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को संरक्षित कर युवा पीढ़ी को सौंपना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में यह साबित हुआ है कि अहिंसा सर्वश्रेष्ठ हथियार है तथा इसकी बदौलत ही हमें स्वतंत्रता संग्राम में जन आंदोलन करने की शक्ति मिली। इसके पश्चात्, प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री ज्वाहर लाल नेहरू ने भारत को प्रत्येक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विकास की शपथ ग्रहण की तथा आज भारत विश्व की महाशक्ति के रूप में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग से भारत आज एक मजबूत राष्ट्र बन पाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के आंदोलनों से ही स्वतंत्रता प्राप्त हुई है तथा हमें यह कभी भी नहीं भुलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के सैनिकों ने युद्ध तथा विभिन्न लड़ाईयों में उदाहरणीय वीरता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि हमें कांगड़ा के दाध के प्रथम परमवीर चक्र से सम्मानित मेजर सोमनाथ शर्मा पर गर्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश स्वतंत्रता सेनानी सम्मान योजना के अंतर्गत स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने की योजना लागू की है। इसके तहत 60 जीवित स्वतंत्रता सेनानियों, 601 स्वतंत्रता सेनानियों की विधवाओं तथा अविवाहित पुत्रियों को सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। राज्य में 661 स्वतंत्रता सेनानी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वतंत्रता सेनानियों तथा उनकी विधवाओं को मुफ्त् चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रही है और इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के बजट आवंटन में विशेष सुविधा प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त एचआरटीसी बसों में मुफ्त् यात्रा तथा सरकारी नौकरी में स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को 2 प्रतिशत आरक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

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