भारत की जासूसी चीन की शह पर !

चीन ने किया दावे का खंडन

एजेंसी

सिंगापुर/बीजिंग। चीन सरकार की कथित शह पर एक समूह एक दशक से अधिक समय से भारत में सरकारी कम्प्यूटर नेटवर्क तक पहुंच बनाकर उसकी जासूसी कर रहा था। चीन ने हालांकि इस दावे का खंडन किया है। एक साइबर सुरक्षा प्रदाता समूह ‘फायर आई’ ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि सिंगापुर स्थित ‘एपीटी 30’ नामक समूह ने संभवत: गोपनीय सरकारी नेटवर्को और अन्य नेटवर्को तक स्टेंडर्ड इंटरनेट कनेक्शन के जरिए पहुंच बनायी और उनकी टैपिंग की। इस समूह को लंबे समय से सक्रिय खतरा समूहों में से एक माना गया है। फायर आई द्वारा एपीटी 30 से उत्पन्न खतरों की पहचान करने के अलावा भारतीय शोधकर्ताओं ने भी एपीटी 3० की गतिविधियों को संदिग्ध पाया था। फायर आई के भारतीय ग्राहकों में भारतीय अंतरिक्ष और रक्षा कंपनी तथा एक भारतीय दूरसंचार कंपनी शामिल है।

साइबर सुरक्षा समूह ने दावा किया है, इस प्रकार का ठोस, योजनाबद्ध प्रयास जिसमें समूह ने क्षेत्रीय लक्ष्य और मिशन निर्धारित किए, इससे हमें यकीन होता है कि यह गतिविधि राज्य प्रायोजित है…. इसके पीछे सर्वाधिक संभावना चीनी सरकार का हाथ होने की है। फायर आई ने दावा किया है कि एपीटी 30 ने आसियान सदस्यों या आसियान देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाले देशों को विशिष्ट अभियानों के जरिए जनवरी 2०13 और अप्रैल 2०13 में निशाना बनाया, जिसमें 12 से 2० दिसंबर 2०12 के बीच आसियान-भारत शिखर बैठक भी शामिल थी। हालांकि चीन ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि वह सभी प्रकार के हैकर हमलों को कड़ाई से प्रतिबंधित करता है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने बीजिंग में कहा, मैं कहना चाहूंगा कि चीनी सरकार कड़ाई से सभी प्रकार के हैकर हमलों पर प्रतिबंध लगाती है।

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