रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाकर अनुराग ने दिखाया दम: प्रो. धूमल

झूठे वायदों के सहारे सरकार बनाने की मंशा पूरी नहीं होगी, क्योंकि काठ की हांडी बार-2 नहीं चढ़ती : प्रो. धूमल

शिमला: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों को मिल रही केन्द्रीय आर्थिक सहायता को प्रदेश सरकार उपयोग में लाने में असफल साबित हो रही है जिससे यह धन या तो बिना उपयोग के विभागीय खातों में पड़ा है या फिर वापिस हो रहा है। सरकार की इस लापरवाही से भविष्य में प्रदेश को मिलने वाली धनराशि में कटौती होगी जिससे निश्चितरूप से प्रदेश व जनता को बड़ा नुकसान होगा।

प्रो. धूमल ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में अकेले केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग ही 1500 करोड़ रू. से अधिक धन का प्रावधान प्रदेश के लिए कर चुका है। इसके बावजूद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के लचर हालात किसी से छुपे नहीं है। प्रदेशभर में डॉक्टरों सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं, परन्तु केन्द्रीय धन का सदुपयोग करने की या तो प्रदेश सरकार की मंशा नहीं है या फिर अपनी नाकाबलियत को अपना हथियार बनाने में ही प्रदेश सरकार खुश है।

प्रो. धूमल ने कहा कि औषधी विनियामक ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा 30 करोड़ रू. जारी करना एक सराहनीय कदम है जिससे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। पर इस धन का समुचित उपयोग प्रदेश सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि इससे पूर्व भी प्रदेश सरकार मैडिकल कॉलेज शिमला, टांडा व जोनल अस्पताल मण्डी सहित अन्य स्थानो पर मंजूर की गई कई योजनाओं की डी.पी.आर. बनाने में भी असफल सिद्ध हुई है। प्रो. धूमल ने कहा कि लगभग यही हालात ग्रामीण विकास व पंचायतीराज मंत्रालय के भी हैं। हाल में ही लगभग 100 करोड़ रू. की धनराशि मनरेगा के तहत प्रदेश सरकार को मिली है, परन्तु विभाग के ढुलमुल रवैये के चलते समय पर असैसमैंट व कम्पलीशन रिपोर्ट न भेजे जाने से यह पैसा जनता को नहीं मिल पा रहा है। इसी के साथ मनरेगा के तहत कार्यरत लोगों की दिहाड़ी पड़ोसी राज्य हरियाणा, पंजाब व चण्डीगढ़ में 250 रू. के आसपास है, पर हिमाचल में अभी तक यह राशि 170 रू. है। जबकि अपने घोषणा पत्र में कांग्रेस ने वायदा किया था कि प्रदेश में कार्यरत दिहाड़ीदारों को 200 रू. दिहाड़ी सुनिश्चित की जाएगी।

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत देशभर में 80 हजार करोड़ रू. का प्रावधान किया गया है, परन्तु प्रदेश में इस योजना को सही ढंग से कार्यान्वित न करके प्रदेश के किसान इस योजना का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। अगर सरकार इस योजना के प्रति गंभीर दृष्टिकोण अपनाए तो प्रदेश के हर खेत को आसानी से सिंचित किया जा सकेगा जिससे किसान भी सुरक्षित होगा और किसानी भी। परन्तु प्रदेश सरकार धरातल पर काम करने के बजाए कोरी घोषणाओं के माध्यम से जनता को गुमराह करने में लगी हुई है, परन्तु यह भूल रही है कि झूठे वायदों के सहारे सरकार बनाने की मंशा पूरी नहीं होगी, क्योंकि काठ की हांडी बार-2 नहीं चढ़ती।

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