भारतीय अर्थव्यवस्था पर "काले धन" का प्रभाव

भारतीय अर्थव्यवस्था पर “काले धन” का प्रभाव

अधिवक्ता - रोहन सिंह चौहान

अधिवक्ता – रोहन सिंह चौहान

यह एक चौंकाने वाला तथ्य है लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था में दो प्रकार की अर्थव्यवस्थाओं का अस्तित्व है। इस दूसरी अर्थव्यवस्था को हम समांतर अर्थव्यवस्था (पैरेलल इकॉनमी) के नाम से जानते हैं। दो अर्थव्यवस्थाएं होना किसी भी देश के अस्तित्व के लिए हानिकारक है। एक अर्थव्यवस्था वैध तभी कहलाती है जब-जब उसके लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा केंद्रीय, राज्य सरकार या किसी अन्य अधिकृत संस्था के अधीन हो अथवा अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार के लेन-देन का रिकॉर्ड हो। अगर लेन-देन का रिकॉर्ड किसी भी लेखा पुस्तक में नहीं है तो इसे काली अर्थव्यवस्था (ब्लैक इकॉनमी) कहते हैं। काली अर्थव्यवस्था में किये गए लेन-देन का रिकॉर्ड सरकार के पास नहीं होता और इस लेन-देन से कमाए गए धन को काला धन कहते हैं।

  • काले धन और काली सम्पति होने में अंतर है। काला धन व्यक्ति द्वारा गैर कानूनी ढंग से प्राप्त धन है जबकि काली सम्पति वह निवेश है जो व्यक्ति कीमती रत्नों में, भूमि, ईमारत इत्यादि में गैर कानूनी ढंग से करता है।
  • अवैध तरीकों से अर्जित किया गया धन काला धन (ब्लैक मनी) कहलाता है। काला धन वह भी है जिस पर कर नहीं दिया गया हो।

आतंरिक काला धन

  • करेंसी का संग्रह करके
  • सोना,चाँदी आदि बहुमूल्य धातुओं का संग्रह करके
  • अचल संपत्ति के रूप में
  • काला धन रोकने के उपाय
  • करेंसी का विमुद्रीकरण करके
  • सोने, चाँदी आदि के आभूषणों में हॉलमार्क चिन्ह की अनिवार्यता कर
  • बेनामी या अवैध ढंग से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करके

बाह्य काला धन

  • विदेश के बैंकों में जमा धन
  • विदेश में अचल सम्पति या उद्योग में निवेश करके या शेयर के रूप में

काले धन के कारण

  • टैक्स चोरी करना काले धन का एक मुख्य कारण माना जाता हैI हालाँकि कई अन्य कारण हैं जिनके कारण काला धन अर्थव्यवस्था में अंतर है।

कर प्रणाली में कमी

  • उच्च व्यक्तिगत आयकर दरें नागरिकों को कर से बचने की तरफ ले जाते हैं जिसके कारण काले धन में बढ़ोतरी होती है। हालाँकि सरकार द्वारा आयकर दरों के कम करने पर भी उच्च आय वर्ग के लोग आयकर का बड़ा भुगतान करने से कतराते हैं।

मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन)

  • मुद्रास्फीति के कारण समान्तर अर्थव्यवस्थाओं का जन्म होता है ताकि आय को छिपाया जा सके ओर कर से बचा जा सके। हालाँकि मुद्रास्फीति काले धन का कारण और परिणाम दोनों ही है।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर "काले धन" का प्रभाव

भारतीय अर्थव्यवस्था पर “काले धन” का प्रभाव

अभाव

  • दोषपूर्ण सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अभाव के कारण भी काला धन पैदा होता है। जब कभी भी आवश्यक वस्तुएं दुर्लभ हो जाती हैं तो लोगों को उनके लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है जिसके कारण काला धन उत्पन्न होता है। उदाहरण के लिए रसोई गैस, चीनी, रिफाइंड तेल इत्यादि की कमी से गैर कानूनी ढंग से लें तो इससे काले धन में वृद्धि होती है ।

कृषि आय :

  • कृषि आय को आयकर के दायरे से बाहर रखा गया है। बहुत बार अन्य स्त्रोतों से कमाए गए काले धन को कानूनी दिखाने के लिए उसे कृषि आय अकाउंट में दिखा दिया जाता है।

लाईसैंस, कोटा इत्यादि : आयत कोटा, निर्यात कोटा, लाईसैंस,परमिट आदि से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के गैर कानूनी रास्ते निकाले जाते हैं जिनके कारण काले धन में वृद्धि होती है।

कुछ गतिविधियों का निषेध : गतिविधियाँ जैसे अवैध शराब का उत्पादन, तस्करी, जुआ, बिना उचित लाईसैंस के पैसे उधार देना आदि कानून के द्वारा प्रतिबंधित हैं। इन गतिविधियों से उत्पन्न पैसे का कोई रिकॉर्ड नहीं होता और ये पैसा काले धन में जुड़ जाता है

  • भारतीय अर्थव्यवस्था पर काले धन का प्रभाव

सरकार को राजस्व की हानि : काले धन के अर्थव्यवस्था में प्रचलन के कारण सरकार को क्षति उठानी पड़ती है।  जिसकी कमी होने के कारण सरकार को टैक्स इत्यादि प्राप्त नहीं हो पाते जिसके कारण आर्थिक विकास में बाधा आती है।

समाज में आय और संपत्ति की असमानता : काला धन समाज में अन्याय और भ्रम फैलाता है। इसी के कारण अमीर और अमीर तथा गरीब और गरीब होता जाता है। मुद्रास्फीति होने के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सामान्य वस्तु के लिए अधिक दाम देने पड़ते हैं। सरकार को जब जन उपयोगी सेवाओं के लिए पर्याप्त कर नहीं मिलता तो उसे मजबूरन कर की दरों को बढ़ाना पड़ता है। इसका सीधा प्रभाव ईमानदार करदाताओं पर पड़ता है जबकि कर चोरी करने वाले इससे आसानी से बच जाते हैं।

काले धन और भ्रष्टाचार का एक दुष्चक्र : चूँकि काले धन से किये गए लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नहीं होता इसलिए ये गैर कानूनी है जिसके तहत ये भ्रष्टाचार में जुड़ जाता है। फिर चाहे ये रिश्वत के रूप में हो, गैर क़ानूनी व्यवसायों में हो इत्यादि।  काला धन और भ्रष्टाचार एक दुष्चक्र की तरह है।

काले धन के कारण आपराधिक गतिविधियों में होती है वृद्धि : काले धन का प्रयोग आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए किया जाता है जिससे देश की सुरक्षा पर असर पड़ता है। नशीले पदार्थों की तस्करी, असामाजिक तत्वों के पास गैरकानूनी रूप से हथियारों का पहुँच जाना आदि के कारण समाज खोखला होता जा रहा है।

सरकार के द्वारा मुद्रिक और राजकोषीय नीति बनाने में कठिनाई : काले धन का कोई रिकॉर्ड नहीं होता। समाज में इसका मुद्रचालन कितना है इसका भी कोई हिसाब नहीं होता। चूँकि सरकार इन नीतियों का गठन करते समय काले धन को हिसाब में नहीं ले सकती। इसलिए इन नीतियों को पूर्ण रूप से वास्तविक नहीं कहा जा सकता।

काले धन को रोकने के लिए सरकार द्वारा किये गए प्रयास, इन्हें दो भागों में बांटा जा सकता है :

  • काले धन का सफ़ेद धन में रूपांतरण
  • आय का स्वेच्छिक प्रकटीकरण

इस योजना के अनुसार टैक्स बकाएदारों को अपनी छिपी हुई आय का खुलासा करने का अवसर दिया गया है। इसके लिए उन्हें प्रचलित कर दरों पर छिपा हुआ आय का खुलासा करना पड़ता है। इसमें उन्हें आर्थिक रूप से सम्बंधित प्रमुख कानूनों से उन्मुक्ति मिलेगी।

विदेशी सरकारों के साथ द्विपक्षीय समझौते : विदेशी बैंकों में जमा धन, इससे जुड़े खाताधारकों के नाम के खुलासे के लिए सरकार द्वारा ये समझौते किये गए हैं

आयकर छापे : समय-समय पर कर अधिकारियों द्वारा संदेहपूर्ण परिसरों में छापे डाले जाते हैं तथा अवैध सम्पति, काले धन इत्यादि को जब्त किया जाता है

  •  500 व 1000 रूपये के मूल्य नोटों का विमुद्रीकरण

    काले धन को रोकने के प्रतिबंधक उपाय

    काले धन को रोकने के प्रतिबंधक उपाय

  • सरकार द्वारा विशेष बांड ज़ारी करना

सरकार द्वारा विशेष बांड ज़ारी किये जाते हैं जिसमें काले धन के जमाखोरों को निवेश करने के लिए कहा जाता है। इसमें उन्हें मौजूदा कानून से उन्मुक्ति प्रदान की गयी होती है।

काले धन को रोकने के प्रतिबंधक उपाय

  • धन हस्तांतरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और बैंकों का प्रयोग करना ।
  • चूँकि इन माध्यम से किया गया कोई भी लेन-देन का रिकॉर्ड होता है इस कारण ये काले धन को रोकने में महत्वपूर्ण हैं।
  • लोगों को निरंतर आधार पर काले धन की बुराइयों से अवगत कराना चाहिए।

 

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