हिमाचल सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

हिमाचल सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

शिमला: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि हिमाचल सरकार सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं तथा उनके आश्रितों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी वार्षिकी और वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वालों को मिलने वाले अनुदान दरों में एकमुश्त वृद्धि की है। वह आज नई दिल्ली में एक पत्रकार वार्ता के दौरान सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र, अशोक चक्र विजेताओं को मिलने वाले अनुदान को एकमुश्त 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये, महावीर चक्र विजेताओं के लिए 15 लाख रुपयें से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया गया है। इसी प्रकार इन वीरता पुरस्कार विजेताओं के लिए वार्षिकी की दरों को क्रमशः एक लाख 25 हजार रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये, एक लाख से बढ़ाकर तीन लाख तथा एक लाख से बढ़ाकर दो लाख रुपये तक किया गया है। उन्होंने कहा कि शौर्य पुरस्कार विजेताओं तथा सशस्त्र बलों- सेना, नौसेना और वायु सेना के विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्राप्त करने वाली अन्य श्रेणियों की वार्षिकी दरों में भी एक अप्रैल, 2016 से बढ़ोतरी की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिकों के उन परिजनों जो डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और हिमाचल प्रदेश से संबंध रखते हैं, को भी रक्षा कर्मी घोषित किया गया है और 04 जनवरी, 2016 से मुख्यमंत्री सैनिक कल्याण कोष से अनुग्रह अनुदान राशि के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सैनिक विश्राम गृहों की मुरम्मत और रख-रखाव के लिए दो करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि राज्य में 1,10,202 पूर्व सैनिक, 1050 युद्ध विधवाएं और 33099 अन्य विधवाएं हैं। इनके अतिरिक्त बड़ी संख्या में अधिकारी व सैनिक देश की सेवा कर  रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निरन्तर इन परिवारों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि एक अप्रैल, 2014 से युद्ध जागीर की राशि को 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रति वर्ष किया गया है। धर्मशाला में युद्ध स्मारक संग्रहालय की स्थापना के लिए 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। वीरता पुरस्कार विजेताओं को राज्य के अंदर डीलक्स और पथ परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के सेवानिवृत्त सैनिकों को मिलने वाली वित्तीय सहायता को एक अप्रैल, 2015 से दो हजार रुपये से बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुग्रह अनुदान राशि में 25 मई, 2015 से संशोधन  किया गया है। अब लाभार्थियों को युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को 5 लाख रुपये अनुग्रह राशि, युद्ध के दौरान 50 प्रतिशत या इससे अधिक विकलांगता होने पर 1.50 लाख रुपये, 50 प्रतिशत से कम विकलांगता पर 75 हजार रुपये तथा युद्ध के दौरान शहीद हुए अर्द्धसैनिक बलों के सैनिकों को 1.50 लाख रुपये जबकि शारीरिक विकलांगता पर 35 हजार रुपये प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों अथवा उनकी विधवाओं जिनकी आयु 60 वर्ष से ऊपर है और उन्हें किसी भी प्रकार की पेंशन नहीं मिल रही है को वित्तीय सहायता (वृद्धावस्था पेंशन) प्रदान करने के लिए वार्षिक आय सीमा (मनरेगा की आय छोड़कर) 15 हजार से बढ़ाकर 35 हजार रुपये प्रतिवर्ष की गई है।

सम्बंधित समाचार

अपने सुझाव दें

Your email address will not be published. Required fields are marked *