प्रदेश का हो व्यापक विकास, राज्य सरकार का यही प्रयास, राज्य रोजगार सृजन योजनाएं

प्रदेश का हो व्यापक विकास, राज्य सरकार का यही प्रयास, राज्य रोजगार सृजन योजनाएं

शिमला: प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं का कौशल उन्नयन  कर उन्हें सशक्त बनाने के लिए वचनबद्ध है, ताकि उन्हें सरकारी तथा निजी क्षेत्र में जीवन पर्यन्त रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध हो सके। प्रदेश की बागडोर संभालने के तुरंत  बाद ही राज्य सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए मई, 2013 से पांच सौ करोड़ रुपये की कौशल विकास भत्ता योजना आरम्भ की। योजना का उददेश्य प्रत्येक पात्र युवा को दो वर्षों की अवधि के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये का कौशल विकास भत्ता प्रदान करना है। 50 प्रतिशत विकालंगता वाले युवाओं को 1500 रुपये प्रति माह भत्ता प्रदान किया जा रहा है।

यही नहीं, राज्य सरकार ने पात्रता आयु की शर्त को 18 वर्ष से घटाकर 16 वर्ष तथा शैक्षिक योग्यता 10वीं से कम कर 8वीं तक किया है। इससे भी एक कदम आगे बढ़ते हुए, अब प्लम्बर, बढ़ई तथा मिस्त्री इत्यादि व्यवसायों में अशिक्षित युवाओं को भी कौशल विकास भत्ता प्रदान किया जा रहा है। इसी प्रकार, इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए युवा के परिवार की वार्षिक आय सीमा दो लाख रुपये निर्धारित की गई है, अभी तक इस योजना के अन्तर्गत 1.52 लाख युवाओं को लाभान्वित किया जा चुका है।

यही नहीं, यह महत्वकांक्षी योजना अब आईटीआई व पॉलिटेक्निक के सभी ट्रेडों, सरकारी अथवा सरकार से सम्बद्ध प्रशिक्षण संस्थानों से होटल प्रबन्धन तथा नर्सिंग कोर्स में डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट पाठ्क्रमों को भी शामिल किया गया है।

राज्य सरकार योजना को और अधिक प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक युवाओं को इसमें शामिल करने के लिए योजना में आवश्यक संशोधन के लिए भी तैयार है।

बेरोजगार युवाओं के कौशल उन्नयन तथा उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2013 में कौशल विकास भत्ता योजना आरम्भ की है।

पिछले चार वर्षों से इस योजना के लिए प्रत्येक वर्ष 100 करोड़ रुपये बजट प्रावधान किया गया जा रहा है।

हिमाचल सरकार ने कौशल विकास निगम की स्थापना की है, जो राज्य के 65 हजार युवाओं को रोजगार प्रदान करने तथा राज्य में कौशल अधोसंरचना विकसित करने के लिए एशियन विकास बैंक सहाता प्राप्त 640 करोड़ रुपये की कौशल विकास परियोजना का कार्यान्वयन करेगा।

हिमाचल सरकार ने दिसम्बर, 2012 में विभिन्न विभागों में 44,463 युवाओं को रोजगार प्रदान करवाया है। वास्तव में मंत्रिमंडल की लगभग प्रत्येक बैठक में सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पदों को भरने की मंजूरी प्रदान की जा रही है।

राज्य सरकार ने हिमाचल में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित योजनाएं आरम्भ की हैं।   

  • उद्योगों में कम से कम 70 प्रतिशत हिमाचलियों को रोजगार दिया जाना है, जबकि वास्तविक आंकड़ा लगभग 73 प्रतिशत है और विभिन्न उद्योगों में 2.90 लाख हिमाचलियों को रोजगार प्रदान किया गया है।
  • लघु उद्योगों में स्वरोजगार को बढ़ावा देेने के लिए चालू वर्ष के दौरान मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप/न्यू उद्योग योजना आरम्भ की गई है।
  • नये निवेश को आकर्षित कर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कांगड़ा जिला के कंदरौरी तथा ऊना जिला के पंडोगा में दो अत्याधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जा रही है।
  • बागवानी क्षेत्र में रोजगार प्रोत्साहित करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये की बागवानी विकास परियोजना आरम्भ की गई है।
  • कृषि क्षेत्र में रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए पॉलिहाउस तथा लघु सिंचाई के लिए अनुदान के प्रावाधान सहित डा. वाई.एस. परमार किसान स्वरोजगार योजना आरम्भ की गई है।
  • उत्तम चारा उपदान योजना तथा जाईका के सहयोग से कृषि विविधिकरण परियोजनाएं भी आरम्भ की गई हैं।
  • डेयरी सहकारी समितियों द्वारा दुग्ध विधायन एवं शीतल इकाइयों की स्थापना के लिए 60 प्रतिशत अनुदान सहित नई योजना आरम्भ की गई है, जिसका उददेश्य ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुनिश्चित करना है।
  • रोजगार सृजन के लिए उद्योगों तथा जल विद्युत परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर रियायतें प्रदान की जा रही हैं।
  • पर्यटन में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ग्रामीण तथा जनजातीय क्षेत्रों में सभी नये होटलों के लिए विलास कर में 10 वर्षों के लिए छूट प्रदान की गई है।
  • शहरी बेरोजगारों के लिए आजीविका प्रदान करने के उददेश्य से शहरी क्षेत्रों के लिए लाल बहादुर शास्त्री कामगार एवं शहरी आजीविका योजना आरम्भ की गई है।
  • राज्य सरकार ने खाद्य विधायन योजना को अपनाया है जिसे केन्द्र सरकार ने समाप्त कर दिया था। फल विधायन क्षेत्र में युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए फल विधायन राज्य मिशन बनाया गया है।
  • आईटीआई में चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों में बाजार की मांग के अनुरूप और अधिक रोजगारोन्मुख बनाने के लिए इनमें बदलाव किया जा रहा है।
  • बड़ी संख्या में नये कोर्स आरम्भ किए गए हैं और अनेक नई आईटीआई खोली गई हैं।
  • अधिक से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए विकेन्द्रीकृत योजना के अन्तर्गत 20 प्रतिशत धनराशि मनरेगा में सम्मिलित की गई है।

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