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नोटबन्दी के फैसले का विरोध से हताश कांग्रेस स्पष्ट करें कि वह कालेधन के पक्ष में है या खिलाफ : प्रो. धूमल

शिमला: देश के व्यापक हितों को देखते हुए लिए गए नोटबन्दी के फैसले का विरोध करने से हताश कांग्रेस स्पष्ट करें कि वह कालेधन के पक्ष में है या खिलाफ है क्योंकि नोटबन्दी से केवल आतंकवाद को पश्रेय देने वाले, जमाखोर, कालेबाजारी, दलाल व आतंकवादी व नकली नोटों के कारोबारी ही दुःखी है जबकि आम व ईमानदार आदमी जिसकी कठिनाईयों की आढ में कांग्रेस नोटबन्दी का विरोध कांग्रेस कर रही है वह अपनी थोड़ी बहुत परेशानियों के बावजूद देशहित में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले के साथ खड़ा है। यह बात आज पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष प्रो. धूमल ने प्रेस विज्ञप्ति के मध्यम से कही।

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि देश के समग्र हितों को देखते हुए केन्द्र सरकार को नोटबन्दी का कठोर फैसला लेना पड़ा इसकी जिम्मेदार भी कांग्रेस ही है। कांग्रेस ने साठ वर्षों के शासनकाल में अगर केवल अमीरों और सम्पन्न लोगों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनाई होती तो जनता को आज परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। कांग्रेस की कुनितियों का ही परिणाम है कि पिछले 60 वर्षों में अमीर और गरीब के बीच इतना अन्तर बढ़ गया है कि 125 करोड़ की आबादी वाले देश में मात्र 60 लाख के पास 7 लाख करोड़ से ज्यादा धन जमा है और कांग्रेस के काले कारनामों का पर्दाफाश हो रहा है तो उनके नेताओं का तिलमिलाना स्वभाविक है।

नेता प्रतिपक्ष प्रो. धूमल ने कहा कि डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर राजनीति कर कांग्रेस ने कई बार सता तो प्राप्त की परन्तु कभी उनकी आर्थिक नीति व देश के प्रति उनकी सोच को नहीं अपनाया। देश की मौद्रिक नीति के बारे में उनके स्पष्ट विचार थे कि अगर देश को आर्थिक रूप से महाशक्ति बनाना है तो हर 10 वर्ष पश्चात देश की मुद्रा को बदलते रहना होगा। भाजपा ने सता में आने के पश्चात न केवल अम्बेडकर जी की सोच को अपनाया बल्कि उनके सिद्धान्तों का देश में आर्थिक नीति में समावेश भी किया है। देश को डिजीटाईजेशन व कैशलैश सोसाईटी बनाने की दिशा एक बड़ा कदम बताते हुए डा. भीमराव अम्बेडकर जी के नाम पर एक नया ऐप ‘‘भीम’’ शुरू किया जिसे मात्र दो दिनों में ही 5 लाख लोगों ने डाऊनलोड़ किया।

प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि कांग्रेस को साफ करना चाहिए कि क्या वह इसलिए विरोध कर रही है कि नोटबन्दी के बाद देश की टैक्स कुलैक्शन में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है ? क्या कांग्रेस इसलिए परेशान है कि कश्मीर में पत्थरवाजी और देश के अन्य हिस्सों में नक्शलबाद व अन्य आतंकी घटनाओं में कमी आई है? नोटबन्दी का विरोध करके कांग्रेस ने दर्शा दिया है कि वह गरीबों के खिलाफ है और वह नहीं चाहती कि गरीबों और देश का विकास हो। यही वजह रही है कि पिछले 60 वर्षों के शासनकाल में देश में गरीबों की संख्या कम होने के बजाए बढी है और अब जब प्रधानमंत्री नोटबन्दी के पश्चात के लाभों को जनता में बांटने का कार्य कर रहे हैं तो कांग्रेस नेता इसका समर्थन करने के वजाए केवल विरोध के लिए विरोध की राजनीति कर रहे हैं।

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