राज्यपाल का विश्वविद्यालय स्टॉफ से इसे देश का उत्कृष्ट संस्थान बनाने का आह्वान, गुणात्मक शिक्षा के लिये शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

राज्यपाल का विश्वविद्यालय स्टॉफ से इसे देश का उत्कृष्ट संस्थान बनाने का आह्वान, गुणात्मक शिक्षा के लिये शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

शिमला : राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य का टीम भावना से कार्य करने का आह्वान किया है ताकि संस्थान देश का नम्बर एक विश्वविद्यालय बन सके। राज्यपाल आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय आंकलन एवं मान्यता परिषद (नैक) द्वारा ए-ग्रेड का दर्जा प्रदान करने पर आयोजित समारोह के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

राज्यपाल ने कहा कि केवल अध्यापक ही ज्ञान का प्रकाश उदीयमान कर विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण कर सकते हैं और समाज शिक्षक समुदाय पर पूर्ण विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि देश के सुनहरे भविष्य के लिए और अधिक समर्पण भाव से कार्य करना हमारी नैतिक जिम्मेवारी बनती है। राज्यपाल ने शिक्षक समुदाय से अपनी जिम्मेवारियों का निर्वहन समर्पण व उत्तरदायित्व की भावना से करने आग्रह किया ताकि बच्चों के सुदृढ़ चरित्र निर्माण के साथ उनमें मानवीय मूल्यों का भी समावेश हो सके। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में अध्यापकों की जिम्मेवारियां कई गुणा बढ़ी हैं और समाज को उनसे और अधिक समर्पणभाव से सेवाएं प्रदान करने की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश में विकास के नये आयाम स्थापित हुए हैं और ऐसे में भावी पीढ़ियों में नैतिक मूल्यों को कायम रखना और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने नैक द्वारा ए-ग्रेड का दर्जा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय संस्थान से जुड़े सभी सदस्यों को जाता है जो किसी भी लक्ष्य हासिल करने में उनकी योग्यता को दर्शाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय से इससे भी बेहतर दर्जा हासिल करने के लिए कार्य करने का आग्रह किया और उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय इस लक्ष्य को भी प्राप्त करेगा।

गुणात्मक शिक्षा के लिये शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

गुणात्मक शिक्षा के लिये शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विश्वविद्यालय को ए-ग्रेड की उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि ‘मेरी शिक्षा में विशेष रूचि है और इस क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है’ और उन्होंने हमेशा ही इस विभाग को अपने पास रखा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को उदार वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है तथा सभी संस्थानों में शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने गत चार वर्षों के दौरान राज्य 42 नए महाविद्यालय तथा 1329 पाठशालाएं खोली हैं और शिक्षा विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 5608 पद सृजित किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य ने अपनी यात्रा केवल 70 से 80 पाठशालाओं से आरम्भ की थी और अब शिक्षण संस्थानों की संख्या 15 हजार का आंकड़ा पार कर गई है। महाविद्यालय केवल एक था, जो आज बढ़कर 116 हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के जनजातीय क्षेत्रों पांगी तथा लाहौल एव स्पिति में भी महाविद्यालयों की सुविधा प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार का स्मरण करते हुए कहा कि जब यहां विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था, उन्होंने देश के प्रख्यात साहित्यकार को इस विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि सरकार कभी भी विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली में हस्तक्षेप नहीं करती, इसलिए इस संस्थान में ऐसे लोगों को नियुक्त किया जाना चाहिए, जो इसके काबिल हों तथा शिक्षा के मानकों को बढ़ाने में सक्षम हों।

प्रथम मुख्यमंत्री ने रखी थी विश्वविद्यालय की मजबूत नींव, इसके उपरांत संस्थान निरन्तर उन्नति के पथ पर रहा अग्रसर

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रथम मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की मजबूत नींव रखी थी और इसके उपरांत संस्थान निरन्तर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहा। उन्होंने कहा कि संसाधनों का सृजन भी महत्वपूर्ण है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना अधिक अनिवार्य है और इस दिशा में कार्य करने का दायित्व शिक्षक समुदाय पर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय और अधिक उपलब्धियों के साथ अपनी स्वर्ण जयन्ती मनाएगा।

कुलपति प्रो. ए.डी.एन. बाजपेयी ने राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य की कड़ी मेहनत तथा निरन्तर उन्नति के फलस्वरूप उच्च अध्ययन के इस संस्थान को नैक द्वारा ए-ग्रेड प्रदान किया गया है। उन्होंने नैक टीम के दौरे के दौरान सहयोग के लिए राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और कहा कि उनके हस्तक्षेप एवं आशीर्वाद के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने विश्वविद्यालय का बजट 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 90 करोड़ रुपये करने तथा विश्वविद्यालय को 250 बीघा भूमि प्रदान करने के अलावा 60 सहायक प्रौफेसरों की नई नियुक्तियों के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सामान्य कार्यकलापों के लिए विश्विद्यालय में बेहतर सरंचनात्मक व बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं तथा निकट भविष्य में विश्वविद्यालय को ए-प्लस बनाने के लिए और अधिक प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने समारोह में भाग लेने के लिए गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नैक टीम का सहयोग तथा मदद करने वाले प्रौफेसरों, शिक्षकों, गैर शिक्षकों, छात्र-छात्राओं तथा अन्य को सम्मानित भी किया। इससे पूर्व, कुलपति ने नैक से प्राप्त ‘ए ग्रेड का प्रमाण पत्र’ राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को भेंट किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विश्वविद्यालय का कलेण्डर भी जारी किया। उन्होंने राज कुमार सिंह द्वारा लिखित ‘बिजनेस ऐथिक्स एंड सीएसआर’ पुस्तक का भी विमोचन किया।

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