बेहतर रोजगार के लिए गुणात्मक कौशल प्रशिक्षण पर बल : मुख्य सचिव

बेहतर रोजगार के लिए गुणात्मक कौशल प्रशिक्षण पर बल : मुख्य सचिव

शिमला : हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम द्वारा आज यहां पीटरहॉफ में आयोजित ‘‘कौशल कन्क्लेव’’ के अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव वीसी फारका ने कहा कि उद्योगों, वाणिज्य एवं कार्पोरेट सैक्टर में बेहतर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने के लिए राज्य के युवाओं को गुणात्मक कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम राज्य तथा राष्ट्र के उद्योगों की दीर्घकालीन मांग के मद्देनजर सभी बेरोजगारों, अकुशल और अर्ध कुशल व्यक्तियों को सशक्त बना रहा है। यह भी सुनिश्चित बनाया जाएगा कि तैयार की गई कुशल श्रमशक्ति को उद्योगों में उपयुक्त एवं शत-प्रतिशत रोजगार प्राप्त हो। मुख्य सचिव ने कहा कि सभी कौशल विकास परियोजनाओं में उद्योगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित बनाई गई है ताकि उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सही उम्मीदवार मिल सके।

मुख्य सचिव की उपस्थिति में इस अवसर पर चार समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए  गए जिनमें उषा इंटरनैशनल, रिलायंस रिटेल, एचआरटीसी तथा ऑटो स्किल काउंसिल शामिल हैं। हि.प्र. कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि भारत में विश्व की 25 प्रतिशत श्रमशक्ति मौजूद है जो यह दर्शाती है कि देश में युवा आबादी का एक मजबूत आधार है जिसका सदुपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है। हि.प्र. कौशल विकास निगम ने इस वर्ष फरवरी माह के दौरान विभिन्न औद्योगिक घरानें के साथ 19 समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर किए थे। निगम ने विभिन्न आठ क्षेत्रों में राज्य के एक हजार युवाओं को पायलट आधार पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए हैं जिसमें जानी मानी एजेंसियां तथा व्यापारिक घरानें युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे।

उच्च शिक्षा निदेशक डा. दिनकर बुड़ाथोकी ने कहा कि राज्य में स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक युवाओं को एक बृहद व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। आरंभ में राज्य के सौ स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ किया गया है जिसे बढ़ाकर 200 स्कूलों में शुरू किया जाएगा। राज्य के 16 महाविद्यालयों में आतिथ्य सत्कार एवं रिटेल पाठ्यक्रम आरंभ किए गए हैं। कृषि, बागवानी, जैवेलरी, हस्तशिल्प एवं हथकरघा क्षेत्रों में भी संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है ताकि निचले स्तर से ही प्रशिक्षित श्रम शक्ति को तैयार किया जा सके।

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